Tata Sons IPO : टाटा ग्रुप से आई बड़ी खबर, चंद्रशेखरन को 5 साल के लिए फिर से मिली कमान, IPO का रास्ता भी साफ!

सौरभ दीक्षित

• 03:19 PM • 17 Sep 2026

टाटा संस के बोर्ड ने कंपनी की लिस्टिंग को मंजूरी दे दी है. साथ ही एन चंद्रशेखरन को 5 साल का विस्तार मिला है. आरबीआई के दबाव के बीच यह बड़ा फैसला माना जा रहा है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

करीब तीन घंटे चली बोर्ड बैठक में लिस्टिंग पर अहम चर्चा हुई

आरबीआई ने ऊपरी स्तर की एनबीएफसी मानकर लिस्टिंग का दबाव बढ़ाया

कंपनी ने निजी बने रहने की कोशिश की, लेकिन अर्जी खारिज हुई

Tata Group की होल्डिंग कंपनी Tata Sons को अब शेयर बाजार में लिस्ट कराने का रास्ता साफ हो गया है. Tata Sons के बोर्ड ने कंपनी की लिस्टिंग को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही बोर्ड ने N Chandrasekaran को Tata Sons के चेयरमैन पद पर 5 साल का एक्सटेंशन देने को भी मंजूरी दी है.

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Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को हुई बोर्ड मीटिंग में करीब 3 घंटे तक इस मुद्दे पर चर्चा हुई. यह बैठक ऐसे समय में हुई जब Tata Group के भीतर लिस्टिंग और नेतृत्व को लेकर मतभेद चल रहे थे.

RBI के फैसले के बाद बढ़ा लिस्टिंग का दबाव

Tata Sons की लिस्टिंग का मामला सीधे Reserve Bank of India यानी RBI के फैसले से जुड़ा है. सितंबर 2022 में RBI ने Tata Sons को Upper Layer Non-Banking Financial Company यानी NBFC के तौर पर क्लासिफाई किया था.

इस कैटेगरी में आने के बाद Tata Sons को 3 साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना था.

इसके बाद Tata Sons ने अपना कर्ज चुका दिया और Core Investment Company का रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की कोशिश की, ताकि कंपनी प्राइवेट बनी रह सके. लेकिन 11 सितंबर 2026 को RBI ने इस आवेदन को खारिज कर दिया.

इसके साथ ही RBI ने Tata Sons को तत्काल लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया.

Tata Trusts IPO के खिलाफ, SP Group लिस्टिंग के पक्ष में

Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर Tata Group के भीतर लंबे समय से मतभेद रहे हैं.

Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है और Trusts IPO के खिलाफ रहा है. वहीं Shapoorji Pallonji Group यानी SP Group के पास करीब 18.4% हिस्सेदारी है और वह Tata Sons की लिस्टिंग के पक्ष में रहा है.

SP Group का तर्क रहा है कि शेयर बाजार में लिस्टिंग से कंपनी में मौजूद वैल्यू को अनलॉक करने और शेयरधारकों के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

N Chandrasekaran को 5 साल का एक्सटेंशन

लिस्टिंग के साथ ही Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran के भविष्य को लेकर भी तस्वीर साफ हो गई है.

N Chandrasekaran फरवरी 2017 से Tata Sons के चेयरमैन हैं. 2022 में उन्हें दूसरी बार 5 साल के कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति से दोबारा नियुक्त किया गया था. उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है.

2025 में Tata Trusts ने Chandrasekaran के तीसरे कार्यकाल का समर्थन किया था. लेकिन फरवरी 2026 में यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया.

रिपोर्ट के मुताबिक, Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने Air India और Tata Digital समेत कुछ कारोबारों को लेकर चिंताएं जताई थीं.

इसके बाद अगस्त 2026 में Chandrasekaran ने कहा था कि वह एक और कार्यकाल के लिए प्रयास नहीं करेंगे.

बोर्ड मीटिंग में Noel Tata को नहीं मिला बहुमत

Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार की बोर्ड मीटिंग में Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata को बाकी बोर्ड सदस्यों का समर्थन नहीं मिला. रिपोर्ट में कहा गया है कि बोर्ड में अन्य सदस्यों ने लिस्टिंग और Chandrasekaran के 5 साल के कार्यकाल के पक्ष में मतदान किया.

इस घटनाक्रम को Tata Group के भीतर चल रहे संगठनात्मक और रणनीतिक मतभेदों के संदर्भ में देखा जा रहा है.

Tata Sons की लिस्टिंग क्यों अहम है?

Tata Sons सिर्फ एक सामान्य कंपनी नहीं है. यह Tata Group की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और ग्रुप की कई बड़ी कंपनियों में इसकी हिस्सेदारी है.

इसलिए Tata Sons की लिस्टिंग का मतलब सिर्फ एक नई कंपनी का शेयर बाजार में आना नहीं होगा. इससे Tata Sons की वैल्यूएशन सामने आ सकती है और इसके शेयरधारकों के लिए अपनी हिस्सेदारी की वैल्यू को समझना और जरूरत पड़ने पर लिक्विडिटी हासिल करना आसान हो सकता है.

फिलहाल बोर्ड की मंजूरी के बाद Tata Sons की लिस्टिंग की दिशा में एक बड़ा कदम उठ चुका है. साथ ही N Chandrasekaran को 5 साल का एक्सटेंशन मिलने से Tata Sons के नेतृत्व को लेकर भी तत्काल अनिश्चितता खत्म होती दिखाई दे रही है.