टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में गुरुवार, 17 सितंबर को तेज खरीदारी देखने को मिली. इसकी वजह Tata Sons से जुड़ी दो बड़ी खबरें हैं. एक तरफ Tata Sons के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाए रखने को मंजूरी दी है. दूसरी तरफ Tata Sons की संभावित शेयर बाजार में लिस्टिंग का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है.
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किस शेयर में कितनी तेजी रही?
- • टाटा केमिकल्स 13.5 प्रतिशत चढ़कर 831 रुपये पर पहुंचा
- • टाटा टेलीसर्विसेज 7.3 प्रतिशत बढ़कर 38.14 रुपये पर पहुंचा
- • टाटा इन्वेस्टमेंट 7.3 प्रतिशत चढ़कर 732.10 रुपये पर पहुंचा
- • टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स 6.2 प्रतिशत बढ़कर दिन के ऊंचे स्तर 319.70 रुपये तक गया
- • टाटा स्टील 3.5 प्रतिशत बढ़कर 189.40 रुपये पर पहुंचा
- • टाटा मोटर्स 3 प्रतिशत चढ़कर 436.90 रुपये पर पहुंचा
- • टीसीएस 3.2 प्रतिशत, टाटा पावर 2.5 प्रतिशत, इंडियन होटल्स 2.2 प्रतिशत और टाटा एल्क्सी 1 प्रतिशत बढ़ा.
N. Chandrasekaran को मिला एक और कार्यकाल
एन. चंद्रशेखरन 2017 से Tata Sons के चेयरमैन हैं. उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना था. उन्होंने अगस्त में बोर्ड को बताया था कि वह अगला कार्यकाल नहीं लेना चाहते. लेकिन 17 सितंबर को Tata Sons के बोर्ड ने उन्हें एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बोर्ड के इस फैसले पर वोटिंग हुई और Noel Tata ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया. Tata Sons या संबंधित पक्षों की ओर से इस घटनाक्रम पर विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी अभी सामने नहीं आई है.
Tata Sons की लिस्टिंग क्यों चर्चा में है?
टाटा को RBI ने अपर लेयर NBFC यानी NBFC-UL की कैटेगरी में रखा है. इस कैटेगरी की कंपनियों पर लिस्टिंग से जुड़ी नियामकीय शर्तें लागू होती हैं. टाटा संस ने अपनी कोर इंवेस्टमेंट कंपनी का रजिस्ट्रेशन खत्म करने की कोशिश की थी, ताकि कंपनी को लिस्टिंग की जरूरत से बाहर रखा जा सके. लेकिन RBI ने सितंबर 2026 में इस आवेदन को खारिज कर दिया और Tata Sons को NBFC-UL से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए कहा. इससे टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है.
टाटा ग्रुप के शेयरों में क्यों आया उत्साह?
टाटा संस, टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और इसकी कई बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी है. मार्च 2025 तक टाटा संस की standalone assets करीब ₹1.75 लाख करोड़ बताई गई थीं. यही वजह है कि बाजार में यह चर्चा है कि अगर टाटा संस की लिस्टिंग होती है तो उसकी हिस्सेदार कंपनियों के लिए भी वैल्यू अनलॉक होने की संभावना बन सकती है. खास तौर पर उन टाटा कंपनियों पर निवेशकों की नजर है जिनके पास टाटा संस में हिस्सेदारी है.हालांकि, अभी टाटा संस की IPO तारीख, इश्यू साइज या वैल्यूएशन को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में लिस्टिंग के मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पर कोई अंतिम प्रस्ताव पारित नहीं हुआ.
Tata Sons में किसकी कितनी हिस्सेदारी?
टाटा संस में टाटा ट्रस्ट की हिस्सेदारी करीब 66% है, जबकि शापूरजी पलॉन्जी ग्रुप की हिस्सेदारी करीब 18% बताई जाती है. शापूरजी पलॉन्जी ग्रुप लंबे समय से टाटा संस की लिस्टिंग के पक्ष में रहा है. ऐसे में लिस्टिंग का मुद्दा सिर्फ बाजार से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि टाटा संस के शेयरहोल्डिंग और कॉरपोरेट स्ट्रक्चर से भी जुड़ा हुआ है.
अब आगे क्या?
फिलहाल टाटा संस के सामने दो बड़े मुद्दे हैं चंद्रशेखरन की नई पांच साल की पारी और लिस्टिंग से जुड़ी RBI की प्रक्रिया. RBI के फैसले के बाद टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. वहीं चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से कंपनी के नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता कम हुई है. हालांकि लिस्टिंग कब और किस तरीके से होगी, इस पर अभी तस्वीर साफ नहीं है. RBI ने अपने फैसले के बाद कानूनी चुनौती की स्थिति में अपना पक्ष रखने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में केविएट भी दाखिल किया है.
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