Tata Sons vs Tata Trusts विवाद का असर, Tata Chemicals समेत इन शेयरों पर दबाव

तनीषा त्यागी

21 Sep 2026 (अपडेटेड: Sep 21 2026 11:58 AM)

टाटा सन्स और टाटा ट्रस्ट्स के टकराव का असर शेयरों पर दिख रहा है. टाटा केमिकल्स, टाटा मोटर्स और टाटा पावर में उतार-चढ़ाव के बीच बाजार की नजर अगले कदम पर टिकी है.

As per reports, Noel Tata proposed that Tata Sons should challenge the RBI’s position, explore all legal options and seek more time rather than proceed immediately with a public listing.
As per reports, Noel Tata proposed that Tata Sons should challenge the RBI’s position, explore all legal options and seek more time rather than proceed immediately with a public listing.
Google CTA

न्यूज़ हाइलाइट्स

शुक्रवार की बिकवाली में समूह का बाजार मूल्य 52000 करोड़ रुपये घटा

टाटा केमिकल्स पिछले एक महीने में चढ़ा, लेकिन सालभर में टूटा

टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन और टाटा पावर में भी कमजोरी दर्ज हुई

Tata Group की कंपनियों के शेयरों में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है. Tata Sons और Tata Trusts के बीच चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर बढ़ते विवाद का असर अब ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दे रहा है. सोमवार के कारोबार में Tata Chemicals, Tata Investment Corporation, Tata Motors और Tata Power जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले सप्ताह टाटा ग्रुप के कई शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली थी. शुक्रवार के कारोबार में कुछ शेयरों में गिरावट 10 फीसदी तक पहुंच गई थी और टाटा ग्रुप की कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में 52,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई थी.

Read more!

Tata Chemicals समेत इन शेयरों में दिखा दबाव

खबर लिखे जाने तक Tata Chemicals के शेयर में करीब 0.10 फीसदी की तेजी दिखाई दे रही थी. हालांकि, पिछले एक सप्ताह में शेयर करीब 5.50 फीसदी टूट चुका है. एक महीने की अवधि में Tata Chemicals में 10 फीसदी से ज्यादा की तेजी रही है, जबकि एक साल में शेयर करीब 30.66 फीसदी टूट चुका है. Tata Investment Corporation के शेयर में करीब 2.05 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. पिछले एक सप्ताह में यह शेयर 1.82 फीसदी नीचे आया है. हालांकि, एक महीने में इसमें करीब 6 फीसदी की तेजी रही है. एक साल की अवधि में Tata Investment Corporation का शेयर करीब 6.33 फीसदी टूटा है. Tata Motors के शेयर में करीब 1.35 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. पिछले एक सप्ताह में शेयर करीब 6.48 फीसदी और एक महीने में 6.10 फीसदी नीचे आया है. एक साल की अवधि में Tata Motors के शेयर में करीब 57.74 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है. Tata Power में भी दबाव देखने को मिला. शेयर करीब 2.40 फीसदी नीचे कारोबार करता नजर आया. पिछले एक सप्ताह में इसमें करीब 2.47 फीसदी और एक महीने में करीब 2.28 फीसदी की गिरावट आई है. एक साल की अवधि में Tata Power का शेयर करीब 7.64 फीसदी टूट चुका है.

शुक्रवार को टाटा शेयरों में हुई थी भारी बिकवाली

इससे पहले शुक्रवार को टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली थी. शुरुआती कारोबार में Tata Chemicals करीब 10 फीसदी तक टूट गया था. Tata Investment Corporation में करीब 4 फीसदी की गिरावट आई थी. इसके अलावा Tata Motors Passenger Vehicles का शेयर करीब 2.6 फीसदी और Tata Power करीब 1.4 फीसदी नीचे आया था. इस भारी बिकवाली के बीच टाटा ग्रुप की कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में 52,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी बताई गई. शुक्रवार की गिरावट के बाद अब सोमवार के कारोबार में भी निवेशकों की नजर टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों पर बनी हुई है. खासतौर पर Tata Chemicals और Tata Investment Corporation में उतार-चढ़ाव पर बाजार की नजर है.

क्यों बढ़ा Tata Sons और Tata Trusts के बीच विवाद

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत Tata Sons में एन चंद्रशेखरन के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति से जुड़े फैसले से हुई है. Tata Sons के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को चेयरमैन पद पर एक और पांच साल का कार्यकाल देने को मंजूरी दी है. इसके बाद Tata Trusts की तरफ से इस नियुक्ति पर सवाल उठाए गए. Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने Tata Sons के बोर्ड को पत्र लिखकर इस फैसले पर आपत्ति जताई. Tata Trusts का कहना है कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से जुड़ा प्रस्ताव कानूनी तौर पर वैध नहीं है. ट्रस्ट्स की तरफ से यह भी सवाल उठाया गया है कि इस नियुक्ति के प्रस्ताव को जरूरी समर्थन मिला था या नहीं. Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. ट्रस्ट्स की ओर से नामित निदेशकों में नोएल टाटा ने भी इस फैसले का विरोध किया था. यही वजह है कि Tata Sons और Tata Trusts के बीच पहले से मौजूद मतभेद अब और चर्चा में आ गए हैं. मामला बोर्डरूम से आगे बढ़कर कानूनी रास्ते की ओर जाता है या नहीं, इस पर भी बाजार की नजर बनी हुई है.

Tata Sons की लिस्टिंग भी बना बड़ा मुद्दा

Tata Sons और Tata Trusts के बीच विवाद सिर्फ चेयरमैन के कार्यकाल तक सीमित नहीं है. Tata Sons की संभावित लिस्टिंग भी इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम मुद्दा है. Tata Sons टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है. कंपनी की लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है. इस बीच Reserve Bank of India यानी RBI ने Tata Sons की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कंपनी अपनी रजिस्ट्रेशन स्थिति छोड़कर निजी और अनलिस्टेड कंपनी के तौर पर बने रहना चाहती थी. RBI के रुख के बाद Tata Sons की संभावित लिस्टिंग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया. बड़े शैडो बैंक से जुड़े नियमों के तहत सार्वजनिक लिस्टिंग की जरूरत से जुड़ा सवाल भी इस मामले में महत्वपूर्ण बन गया है. ऐसे में Tata Sons के भविष्य के स्ट्रक्चर और उसकी लिस्टिंग को लेकर आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर निवेशकों की नजर बनी हुई है.

Tata Trusts और Shapoorji Pallonji Group की हिस्सेदारी भी अहम

Tata Sons में Tata Trusts की हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी है. दूसरी ओर Shapoorji Pallonji Group Tata Sons का सबसे बड़ा अल्पांश शेयरधारक है और उसकी हिस्सेदारी करीब 18.37 फीसदी बताई गई है. Tata Trusts ने जुलाई 2025 में Tata Sons को निजी कंपनी बनाए रखने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया था. वहीं Shapoorji Pallonji Group Tata Sons की लिस्टिंग को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी से मूल्य हासिल करने का एक व्यावहारिक रास्ता मानता है. इस तरह Tata Sons के नेतृत्व, कंपनी के भविष्य के स्ट्रक्चर और संभावित IPO से जुड़े कई मुद्दे एक-दूसरे से जुड़ गए हैं.

अब बाजार की नजर किन बातों पर

Tata Sons में चल रहे घटनाक्रम का असर टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में देखने को मिल रहा है. पिछले सप्ताह की तेज गिरावट के बाद सोमवार को भी कुछ प्रमुख टाटा शेयर दबाव में नजर आए. अब बाजार की नजर मुख्य रूप से Tata Sons में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर विवाद, Tata Trusts के रुख, आगे की कानूनी स्थिति और Tata Sons की संभावित लिस्टिंग पर रहेगी. इन घटनाक्रमों के आगे बढ़ने के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है. फिलहाल टाटा ग्रुप से जुड़े इस पूरे मामले ने एक बार फिर नेतृत्व, गवर्नेंस और Tata Sons के भविष्य के स्ट्रक्चर को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

Tata Sons IPO: RBI के फैसले के बाद तेज हुई लिस्टिंग की तैयारी, फरवरी 2027 पर नजर