Tata Trusts में Noel Tata की स्थायी ट्रस्टी नियुक्ति पर सवाल, Charity Commissioner को सौंपा जवाब; अब आगे क्या होगा?

सौरभ दीक्षित

• 04:53 PM • 20 Oct 2026

Tata Trusts विवाद में Sir Dorabji Tata Trust ने चैरिटी कमिश्नर को जवाब सौंप दिया है. जानिए Noel Tata की स्थायी ट्रस्टी नियुक्ति, Neville Tata की भूमिका, Tata Sons की लिस्टिंग और N Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति से जुड़े विवाद के बारे में.

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Tata Trusts Dispute : टाटा ग्रुप के भीतर ट्रस्ट के संचालन और बड़े कारोबारी फैसलों को लेकर चल रहा विवाद अब अहम मोड़ पर पहुंच गया है. Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) ने अपने दो ट्रस्टियों की ओर से दायर शिकायतों पर 19 अक्टूबर को महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के सामने जवाब दाखिल कर दिया है. अब चैरिटी कमिश्नर शिकायतों और ट्रस्ट के जवाब की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे.

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इस विवाद के केंद्र में Noel Tata की स्थायी ट्रस्टी के तौर पर भूमिका, उनके बेटे Neville Tata की ट्रस्टी के रूप में नियुक्ति और Tata Sons से जुड़े रणनीतिक फैसलों में Tata Trusts के हस्तक्षेप का मुद्दा है. हालांकि, ट्रस्ट की ओर से दाखिल जवाब की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.

Tata Trusts विवाद में अब तक क्या हुआ?

Sir Dorabji Tata Trust के दो ट्रस्टियों और वाइस-चेयरमैन Venu Srinivasan और Vijay Singh ने ट्रस्ट के प्रशासन और कामकाज को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं. शिकायतों में नेतृत्व से जुड़ी नियुक्तियों, निर्णय लेने की प्रक्रिया और Tata Sons के कारोबारी फैसलों में ट्रस्ट की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. शिकायतकर्ताओं ने Noel Tata की स्थायी ट्रस्टी के रूप में नियुक्ति और Tata Trusts के चेयरमैन के तौर पर उनकी भूमिका के आधार पर भी सवाल किए हैं. इसके अलावा, Noel Tata के बेटे Neville Tata को ट्रस्टी बनाए जाने और उनकी नियुक्ति से जुड़े फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए गए, इस पर भी चिंता जताई गई है.

महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने SDTT को पहले 12 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने को कहा था. ट्रस्ट ने अतिरिक्त समय मांगा, जिसके बाद समयसीमा बढ़ाई गई. SDTT ने 19 अक्टूबर को अपना जवाब जमा कर दिया. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रस्ट ने शिकायतों में उठाए गए प्रत्येक सवाल पर क्या दलील दी है. चैरिटी कमिश्नर के अगले कदम से पता चलेगा कि मामले में आगे किस तरह की जांच या कार्रवाई की जरूरत समझी जाती है.

Noel Tata की स्थायी ट्रस्टी नियुक्ति पर क्यों उठे सवाल?

इस विवाद का एक अहम पहलू Noel Tata की स्थायी ट्रस्टी के तौर पर भूमिका है. शिकायतकर्ताओं ने उनकी नियुक्ति और Tata Trusts के चेयरमैन के रूप में उनकी स्थिति के आधार पर सवाल उठाए हैं. इसके साथ ही Neville Tata की ट्रस्टी के रूप में नियुक्ति भी विवाद का हिस्सा है. शिकायतों में इस नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया और निर्णय लेने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं. हालांकि, शिकायतों में सवाल उठने का मतलब यह नहीं है कि किसी नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया गया है. इस स्तर पर चैरिटी कमिश्नर के सामने शिकायतें और ट्रस्ट का जवाब हैं. आगे क्या कार्रवाई होगी, यह संबंधित प्राधिकरण के आकलन पर निर्भर करेगा.

Tata Trusts के पास Tata Sons की कितनी हिस्सेदारी है?

इस विवाद का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि Tata Trusts केवल सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले संगठन नहीं हैं. इनके पास Tata Group की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में बड़ी हिस्सेदारी भी है.

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक:

  • Sir Dorabji Tata Trust (SDTT): Tata Sons में 27.98 फीसदी हिस्सेदारी.

  • Sir Ratan Tata Trust (SRTT): Tata Sons में 23.56 फीसदी हिस्सेदारी.

  • दोनों ट्रस्टों की कुल हिस्सेदारी: 51.54 फीसदी.

  • Tata Trusts के अंतर्गत आने वाले चैरिटेबल ट्रस्टों की कुल हिस्सेदारी: करीब 66 फीसदी.

इसका मतलब है कि Tata Sons में शेयरधारक के तौर पर इन ट्रस्टों का प्रभाव काफी बड़ा है. Tata Sons की रणनीति और नेतृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में शेयरधारकों की भूमिका अहम हो सकती है. इसी वजह से ट्रस्ट के प्रशासन, नियुक्तियों और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल केवल आंतरिक विवाद तक सीमित नहीं हैं. इनका असर Tata Sons के कामकाज और बड़े कारोबारी फैसलों से जुड़ी बहस पर भी पड़ सकता है.

हालांकि, शिकायतों के आधार पर ट्रस्ट की हिस्सेदारी या मतदान के अधिकारों में कोई बदलाव अपने आप नहीं हो जाता. इसके लिए संबंधित नियमों और प्राधिकरण के फैसले को देखना होगा.

N Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति और Tata Sons की लिस्टिंग भी विवाद के केंद्र में

Tata Trusts के भीतर मतभेद केवल ट्रस्टियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं बताए जा रहे हैं. Tata Sons के भविष्य और नेतृत्व से जुड़े दो बड़े मुद्दे भी इस विवाद के केंद्र में हैं. पहला मुद्दा Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran की तीसरी पांच साल की अवधि के लिए दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव है. उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है.

दूसरा बड़ा मुद्दा Tata Sons को शेयर बाजार में लिस्ट कराने का है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियामकीय ढांचे के तहत Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर चर्चा चल रही है. कॉरपोरेट लॉ विशेषज्ञ C Krishna Sai के मुताबिक, Noel Tata और कुछ अन्य बोर्ड सदस्यों के बीच Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति और Tata Sons की लिस्टिंग जैसे मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं. इन मतभेदों ने समूह के प्रमुख हितधारकों के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज की है. इन मुद्दों पर अलग-अलग पक्षों की राय और नियामकीय आवश्यकताएं अहम रहेंगी. लिस्टिंग या चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित कॉरपोरेट प्रक्रियाओं और लागू नियमों पर निर्भर करेगी.

चैरिटी कमिश्नर के फैसले का क्या होगा असर?

अब महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के सामने SDTT का जवाब और ट्रस्टियों की शिकायतें हैं. प्राधिकरण इन दस्तावेजों की समीक्षा कर तय करेगा कि आगे क्या कदम उठाया जाए. आगे की कार्रवाई में अतिरिक्त जानकारी मांगना, मामले की जांच करना या नियमों के मुताबिक कोई अन्य कदम उठाना शामिल हो सकता है. लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि चैरिटी कमिश्नर किस तरह का फैसला देंगे. कॉरपोरेट लॉ विशेषज्ञ C Krishna Sai के अनुसार, चैरिटी कमिश्नर का आकलन इस बहस को प्रभावित कर सकता है कि Tata Trusts, Tata Sons में अपने शेयरधारक अधिकारों का इस्तेमाल किस तरह करते हैं. इसलिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि SDTT ने समयसीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल कर दिया है. अब सबकी नजर चैरिटी कमिश्नर के अगले कदम पर है. 

कुल मिलाकर, Tata Trusts का यह विवाद ट्रस्ट के प्रशासन, Noel Tata और Neville Tata की भूमिकाओं, N Chandrasekaran की संभावित दोबारा नियुक्ति और Tata Sons की लिस्टिंग जैसे अहम मुद्दों से जुड़ा है. चैरिटी कमिश्नर की अगली कार्रवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि शिकायतों पर आगे किस तरह विचार किया जाएगा.