रिजल्ट सीजन की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए उत्साह लेकर आई. देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS के पहली तिमाही के नतीजों के बाद शुक्रवार को बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली. कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी 24,200 के पार पहुंच गया. सबसे ज्यादा तेजी आईटी शेयरों में देखने को मिली, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ TCS के नतीजों ने बाजार का रुख बदल दिया या इसके पीछे कई दूसरे फैक्टर भी काम कर रहे थे. आइए विस्तार से समझते हैं.
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बाजार में क्यों लौटी तेजी?
शुक्रवार को खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 1 फीसदी की बढ़त के साथ 77,516 के आसपास कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी भी लगभग 1 फीसदी मजबूत होकर 24,200 के ऊपर पहुंच गया. अगर सेक्टरों की बात करें तो सबसे ज्यादा खरीदारी मेटल और आईटी शेयरों में देखने को मिली. इसके अलावा केमिकल, सीमेंट और बैंकिंग शेयरों में भी अच्छी तेजी रही. यानी बाजार की तेजी सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली.
TCS के नतीजों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा
शुक्रवार की तेजी की सबसे बड़ी वजह TCS के जून तिमाही के नतीजे रहे. कंपनी ने पहली तिमाही में 13,349 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 5 फीसदी ज्यादा है. वहीं कंपनी का रेवेन्यू 14 फीसदी बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. मुनाफा बाजार के अनुमान के आसपास रहा, लेकिन रेवेन्यू उम्मीद से बेहतर रहा. यही वजह रही कि निवेशकों ने इन नतीजों को सकारात्मक माना.
सिर्फ आंकड़े नहीं, भविष्य का भरोसा भी मिला
बाजार को सिर्फ तिमाही के आंकड़े ही पसंद नहीं आए, बल्कि कंपनी की आगे की रणनीति और आउटलुक ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया. TCS ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से पिछले कुछ समय में कई क्लाइंट्स के फैसलों में देरी हुई थी. हालांकि कंपनी को अब उम्मीद है कि सितंबर तिमाही से मांग में सुधार देखने को मिल सकता है. इसके साथ ही कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि उसका AI बिजनेस लगातार मजबूत हो रहा है. इस तिमाही में कंपनी का AI से जुड़ा वार्षिक रेवेन्यू रन रेट 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया. वहीं 9.5 अरब डॉलर की ऑर्डर बुक में कई बड़े AI आधारित ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट शामिल हैं. इससे निवेशकों को यह भरोसा मिला कि आने वाले समय में AI कंपनी की ग्रोथ का बड़ा आधार बन सकता है.
TCS के साथ पूरे IT सेक्टर में आई तेजी
TCS के बेहतर आउटलुक का असर सिर्फ उसके शेयर तक सीमित नहीं रहा. शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में TCS का शेयर 3 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया. हालांकि बाद में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली. खबर लिखे जाने तक शेयर करीब 1 फीसदी की बढ़त के साथ 2,071 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था. इसके साथ Infosys, HCL Tech, Wipro और Tech Mahindra जैसे दूसरे बड़े आईटी शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 2 फीसदी तक मजबूत हो गया.
CLSA ने भी जताया भरोसा
निवेशकों के साथ-साथ ब्रोकरेज हाउस भी TCS के नतीजों के बाद पहले से ज्यादा सकारात्मक नजर आए. CLSA के विश्लेषकों सुमीत जैन और मृदुल गोयनका का मानना है कि TCS की रेवेन्यू ग्रोथ उम्मीद से बेहतर रही. खासकर ऐसे समय में, जब कुछ दिन पहले Accenture के कमजोर संकेतों की वजह से पूरे आईटी सेक्टर को लेकर चिंता बढ़ गई थी. ब्रोकरेज का मानना है कि अगर वैश्विक आर्थिक माहौल में सुधार जारी रहता है, तो सितंबर तिमाही में TCS की ग्रोथ और बेहतर हो सकती है. इससे बाजार में यह धारणा मजबूत हुई कि आईटी सेक्टर के लिए आने वाले महीने पहले के मुकाबले बेहतर हो सकते हैं.
सिर्फ TCS नहीं, ग्लोबल संकेतों ने भी दिया सहारा
शुक्रवार की तेजी के पीछे सिर्फ TCS के नतीजे नहीं थे. अमेरिका की ओर से यह संकेत मिला कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर पर संवाद चल रहा है. इससे निवेशकों को उम्मीद मिली कि फिलहाल पश्चिम एशिया में तनाव और ज्यादा नहीं बढ़ेगा. जब भू-राजनीतिक जोखिम कम होने की उम्मीद बनती है, तो निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है और उसका असर शेयर बाजार पर दिखाई देता है.
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी बनी सहारा
बाजार को एक और बड़ा सहारा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से मिला. ब्रेंट क्रूड करीब 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की नरम कीमतें राहत की खबर होती हैं. इससे आयात बिल पर दबाव कम पड़ सकता है, महंगाई नियंत्रित रहने में मदद मिल सकती है और अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलता है.
वैश्विक बाजारों से भी मिला सकारात्मक संकेत
एशियाई बाजारों का रुख भी भारतीय बाजार के पक्ष में रहा. जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, हांगकांग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे. वहीं अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे.इन सकारात्मक वैश्विक संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला.
India VIX में गिरावट से बढ़ा भरोसा
शुक्रवार को India VIX में भी करीब 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.India VIX को बाजार का डर मापने वाला इंडेक्स माना जाता है. इसमें गिरावट का मतलब होता है कि निवेशकों को निकट भविष्य में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका नहीं है. ऐसे माहौल में बाजार में खरीदारी का रुझान बढ़ जाता है.
क्या अब शुरू हो गई है नई तेजी?
हालांकि शुक्रवार की तेजी के बावजूद तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है.पश्चिम एशिया का तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इसके अलावा अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी और ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बाजार ने पूरी तरह नई तेजी का दौर शुरू कर दिया है.
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में दूसरी बड़ी आईटी कंपनियों के नतीजे भी मजबूत रहते हैं और वैश्विक हालात ज्यादा नहीं बिगड़ते, तो बाजार को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है. हालांकि अगर भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ता है या कॉरपोरेट नतीजे उम्मीद से कमजोर आते हैं, तो बाजार में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है. शुक्रवार की तेजी सिर्फ एक वजह का नतीजा नहीं थी. TCS के उम्मीद से बेहतर रेवेन्यू, सितंबर तिमाही के लिए सकारात्मक डिमांड आउटलुक, AI बिजनेस की मजबूत प्रगति, CLSA की सकारात्मक टिप्पणी, कच्चे तेल की नरम कीमतें, अमेरिका-ईरान बातचीत की उम्मीद और मजबूत वैश्विक संकेतों ने मिलकर निवेशकों का भरोसा बढ़ाया.
अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दूसरे आईटी दिग्गज भी इसी तरह के संकेत देते हैं. अगर ऐसा होता है, तो आईटी सेक्टर की रिकवरी को और मजबूती मिल सकती है. वहीं अगर वैश्विक चुनौतियां फिर बढ़ती हैं, तो बाजार की यह तेजी एक राहत वाली रैली बनकर भी रह सकती है.
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