Telegram बनाम WhatsApp, रोजमर्रा की चैट में कौन देता है ज्यादा सुविधा

संदीप शर्मा

02 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 2 2026 5:59 PM)

टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के 5 बड़े फर्क आसान भाषा में समझिए. 48 घंटे एडिट, बदलाव का समय, क्लाउड चैट और सुरक्षा विकल्प में कौन आगे है, जानिए.

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टेलीग्राम या व्हाट्सएप...कौन या जोरदार ?
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न्यूज़ हाइलाइट्स

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मैसेज एडिट फीचर लौटते ही टेलीग्राम ने अपने अलग फीचर फिर गिनाए

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एडिटेड मैसेज पर आखिरी बदलाव का समय दिखने से पारदर्शिता बढ़ती है

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भेजे गए मैसेज को टेलीग्राम में 48 घंटे तक बदला जा सकता है

Telegram और WhatsApp के बीच 5 बड़े फर्क

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भारत में Telegram का मैसेज एडिट फीचर फिर से चालू होने के बाद कंपनी ने उन फीचर पर जोर दिया है, जिनके आधार पर वह खुद को व्हाट्सऐप से अलग बताती है. इनमें एडिट किए गए मैसेज का समय दिखना, ज्यादा लंबा एडिट समय, साफ इंटरफेस, अलग सुरक्षा विकल्प और क्लाउड पर चैट सेव होना शामिल है.

कंपनी का कहना है कि ये फीचर रोज की मैसेजिंग, कम्युनिटी बनाने और बड़े स्तर पर बातचीत चलाने में काम आते हैं. वहीं तुलना में व्हाट्सऐप कुछ जगह सीमित एडिट समय और अपनी अलग सुरक्षा व्यवस्था देता है, जबकि टेलीग्राम ज्यादा लचीलापन और सुविधा पर जोर दे रहा है.

एक नजर में 5 खास बातें

- एडिट किए गए मैसेज पर आखिरी बदलाव का समय दिखता है

- मैसेज को 48 घंटे तक एडिट किया जा सकता है

- चैट स्क्रीन पर फुल स्क्रीन विज्ञापन नहीं दिखते

- आम चैट और सीक्रेट चैट के लिए अलग सुरक्षा विकल्प मिलते हैं

- क्लाउड पर सेव चैट कई डिवाइस पर तुरंत मिल जाती है

एडिट किए गए मैसेज पर साफ जानकारी

Telegram में अगर कोई मैसेज बदला जाता है, तो एडिटेड लेबल के साथ आखिरी बार बदलाव का समय भी दिखता है. कंपनी के मुताबिक, इससे यूजर को यह समझने में आसानी होती है कि मैसेज कब बदला गया. इससे टाइप की गलती सुधारने या बात साफ करने की गुंजाइश भी बनी रहती है. वहीं व्हाट्सऐप और कुछ दूसरे मंच मैसेज के एडिट होने का संकेत तो देते हैं, लेकिन हर बार आखिरी बदलाव का समय इसी तरह साफ नहीं दिखाते

एडिट करने के लिए ज्यादा समय

WhatsApp में भेजे गए मैसेज को 15 मिनट तक ही एडिट किया जा सकता है. इसके बाद यूजर के पास मैसेज हटाने या फिर से भेजने का विकल्प बचता है. टेलीग्राम में आम मैसेज 48 घंटे तक बदला जा सकता है. इस दौरान मैसेज को कितनी बार एडिट किया जा सकता है, उस पर सख्त सीमा नहीं है. कंपनी का कहना है कि इससे बातचीत के दौरान जानकारी सुधारना, साफ करना या ठीक करना आसान होता है.

साफ इंटरफेस पर जोर

Telegram का कहना है कि उसके ऐप में चैट, चैनल और ग्रुप को सामने रखा गया है. कंपनी के मुताबिक, इसमें ऐसे फुल स्क्रीन विज्ञापन नहीं हैं जो मैसेजिंग के बीच में रुकावट बनें. जहां प्रायोजित संदेश दिखते हैं, वे बड़े पब्लिक चैनल में संदर्भ के हिसाब से जोड़े जाते हैं.

सुरक्षा के लिए अलग विकल्प

Telegram आम क्लाउड चैट की सुरक्षा के लिए अपने एमटीप्रोटो आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करता है. इसके साथ सीक्रेट चैट का विकल्प भी मिलता है, जिसमें एंड टू एंड एन्क्रिप्शन और अपने आप मैसेज मिटाने जैसे कंट्रोल दिए जाते हैं. कंपनी का कहना है कि इससे यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से रोज की चैट और ज्यादा निजी बातचीत के लिए अलग तरीका चुन सकता है. वहीं WhatsApp आम तौर पर एंड टू एंड एन्क्रिप्शन और एन्क्रिप्टेड बैकअप का विकल्प देता है.

क्लाउड पर चैट सेव होने का फायदा

Telegram में आम चैट क्लाउड पर सेव रहती हैं और अलग अलग डिवाइस पर साथ साथ चलती हैं. इसका मतलब है कि फोन, टैबलेट या डेस्कटॉप पर लॉग इन करते ही चैट फिर से मिल सकती है. अगर डिवाइस खो जाए या बदला जाए, तो गैर सीक्रेट चैट दोबारा लॉग इन करने पर उपलब्ध रहती हैं.

कंपनी के मुताबिक, इससे डाटा खोने का खतरा कम हो सकता है, खासकर उन सिस्टम के मुकाबले जो एक डिवाइस, लोकल स्टोरेज या समय समय पर बैकअप पर ज्यादा निर्भर रहते हैं.

कुल मिलाकर, Telegram इस तुलना में एडिट टाइम, बदलाव का समय दिखाने, साफ स्क्रीन, अलग सुरक्षा विकल्प और क्लाउड सिंक जैसी बातों पर जोर दे रहा है. वहीं WhatsApp की अपनी मौजूदा व्यवस्था अलग है. रोज की मैसेजिंग में किस मंच को चुनना है, यह यूजर की जरूरत और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करेगा.