टोल गेट के AI कैमरे केवल Tax ही नहीं बल्कि फाइन भी काटते हैं...छोटी सी लापरवाही बुरी तरह ढीली कर देगी जेब

टोल प्लाजा के कैमरे नंबर प्लेट को स्कैन करके सीधे सरकारी डेटाबेस से मिलाते हैं और अगर आपका इंश्योरेंस या प्रदूषण सर्टिफिकेट (PUC) एक्सपायर्ड हुआ, तो बिना कोई रोक-टोक किए सीधे आपके मोबाइल पर तुरंत भारी-भरकम ई-चालान भेज दिया जाता है.

टोल प्लाजा का ये नियम जान लीजिए
टोल प्लाजा का ये नियम जान लीजिए

अलका कुमारी

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क्या आपको याद है कि आपने अपनी गाड़ी का काजगात कब रिन्यू कराया था. नहीं न... हमारे देश की सड़कों पर हर रोज करोड़ों की संख्या में गाड़ियां निकलती है. उनमें से न जाने कितनी ही ऐसी होगी जिसका इंश्योरेंस या पॉल्यूशन सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं होगा. आमतौर पर लोगों को गाड़ी के कागजात रिन्यू कराना तभी याद आता है जब सामने ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग दिख जाती है. लेकिन अगर आपको भी लगता है कि फाइन सिर्फ ट्रैफिक पुलिस के सामने आ जाने पर ही लगेगा तो अपनी ये आदत तुरंत बदल लीजिए. क्योंकि आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ ट्रैफिक पुलिस ही नहीं बल्कि टोल प्लाजा पर लगे हाई-टेक कैमरे भी सीधे आपकी जेब ढीली कर सकते हैं. 

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आइए समझते हैं कि ये टेकनीक आखिर काम कैसे करता है, इसके नियम क्या हैं और अलग-अलग राज्यों में इसकी क्या स्थिति है.

क्या है ये टेकनीक 

देश के कई राज्यों में हाईवे के टोल गेटों पर एक नया ई-डिटेक्शन सिस्टम शुरू कर दिया है. जिसके तहत कोई भी गाड़ी बिना वैलिड इंश्योरेंस के टोल क्रास करती है तो सीधे आपके मोबाइल पर ऑनलाइन चालान पहुंच जाता है. ये सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक है. ऐसे में जब आप टोल प्लाजा से गुजरते हैं तो सबसे पहले वहां लगे हाई-स्पीड कैमरे तुरंत गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे.  

इसके बाद ये कैमरे नंबर प्लेट को रीड करते हैं और कुछ ही सेकेंड्स के अंदर केंद्रीय वाहन डेटाबेस से कनेक्ट होकर गाड़ी के इंश्योरेंस और पेपर्स का स्टेटस चेक कर लिया जाता है. अगर सिस्टम को पता चलता है कि गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म हो चुका हैतो कंप्यूटर तुरंत एक ई-चालान जनरेट कर देता जो सीधे कार ऑनर के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर पहुंच जाता है. 

क्या देश के सभी राज्यों में ये नियम है

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालयके निर्देश पर इस डिजिटल व्यवस्था को धीरे-धीरे पूरे देश पर लागू किया जा रहा है. 

दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा

वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर में पॉल्यूशन को लेकर नियम सबसे ज्यादा कड़े हैं. यहां के मेन टोल प्लाजा और हाईवे (दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे) पर यह ऑटोमैटिक चालान सिस्टम पूरी तरह से एक्टिव है. अगर आप बिना वैलिड पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के इन रास्तों पर किसी भी टोल या कैमरे के नीचे से गुजरते हो तो आपके फोन पर 10,000 का चालान आ जाएगा.

महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु

इन राज्यों ने अपने स्टेट एक्सप्रेसवे और कुछ नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर AI कैमरों और FASTag डेटाबेस को पूरी तरह इंटीग्रेट कर दिया है. यहां कमर्शियल गाड़ियों के फिटनेस सर्टिफिकेट और थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस न होने पर तुरंत ऑटोमैटिक चालान कट रहे हैं.

मध्य प्रदेश, राजस्थान

इन राज्यों में नेशनल हाइवेज के मुख्य टोल प्लाजा पर यह सिस्टम काम कर रहा है. लेकिन राज्य सरकार के छोटे टोल टैक्स बूथों पर अभी भी इसे पूरी तरह अपग्रेड किया गया है. हालांकि, नेशनल हाईवे के टोल पर आप किसी भी राज्य में हों ऑनलाइन डेटाबेस से जुड़े होने के कारण चालान कटने का रिस्क हमेशा रहता है.

बिहार

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार में इस सिस्टम का दायरा थोड़ा और बड़ा है. वहां गाड़ी के इंश्योरेंस के साथ-साथ PUC यानी पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट भी इसी तरह ऑटोमैटिक चेक किया जाता है. बिहार के टोल प्लाजा से अगर कोई गाड़ी बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के गुजरती है तो सीधे 10,000 हजार का भारी-भरकम ई-चालान कट जाता है. इस सिस्टम की कड़ाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बिहार में शुरुआत के महज दो दिनों के भीतर ही 5,000 से ज्यादा डिजिटल चालान काट दिए गए थे.

बिहार सरकार की सफलता को देखते हुए ही इसे ओडिशा और फिर अन्य राज्यों ने अपनाया और अब बिहार सरकार इसे पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे अपने प्रमुख स्मार्ट शहरों के चौराहों पर भी लगाने की तैयारी कर रही है.

ओडिशा में जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है

ओडिशा स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) ने इस सिस्टम के जरिए नियम तोड़ने वालों के लिए बेहद सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान किया है. यानी अगर कोई गाड़ी पहली बार इस सिस्टम की नजर में बिना इंश्योरेंस के आता है तो कार ऑनर पर 2,000 का जुर्माना लगाया जाएगा. अगर वही गाड़ी दोबारा किसी टोल प्लाजा पर बिना इंश्योरेंस के पकड़ी जाती है तो इसपर जुर्माना दोगुना होकर सीधे 4,000 हजार हो जाएगा. इतना ही नहीं नए नियमों के अनुसार अगर कोई बार-बार लापरवाही बरतता है तो कार ऑनर को 3 महीने तक की जेल की सजा भी हो सकती है. गंभीर मामलों में कोर्ट दोषी व्यक्ति पर जुर्माना और जेल की सजा दोनों एक साथ भी लागू कर सकता है.

सरकार को क्यों उठानी पड़ी इतनी सख्त तकनीक?

अक्सर देखा गया है कि लोग गाड़ी खरीद तो लेते हैं लेकिन वक्त रहते उसका थर्ड-पार्टी या फुल इंश्योरेंस रिन्यू कराना जरूरी नहीं समझते. ऐसे में जब भी सड़क पर किसी बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ी से कोई बड़ा हादसा होता है तो पीड़ित परिवार या घायल व्यक्ति को इंश्योरेंस कंपनी से कोई मुआवजा नहीं मिल पाता. ऐसे में पीड़ितों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है. सरकार का मानना है कि इस नए डिजिटल सिस्टम के आने के बाद लोगों में चालान का डर रहेगा और इसी वजह से वो अपनी गाड़ियों का बीमा हमेशा अपडेट रखेंगे. इससे सड़क हादसों के शिकार लोगों को समय पर और सही मुआवजा मिल पाएगा. 

तो इस चालान से बचना कैसे है 

इसके लिए सबसे पहले आपको अपने फोन में mParivahan या DigiLocker ऐप रखना होगा. हमेशा किसी भी सफर पर निकलने से पहले इन सरकारी ऐप्स पर अपनी गाड़ियों का स्टेटस देख लें कि इंश्योरेंस या पॉल्यूशन एक्सपायर्ड तो नहीं दिखा रहा. इसके अलावा जब भी प्रदूषण केंद्र से नया PUC बनवाएं इस बात को सुनिश्चित करें कि उसने उसे ऑनलाइन Parivahan Portal पर अपलोड कर दिया है. कभी-कभी ऑफलाइन पर्ची होने के बावजूद सिस्टम में अपडेट न होने से ऑटोमैटिक चालान कट जाता है. 

कब लाया गया ये नियम 

इस पूरे डिजिटल चालान सिस्टम का आधार मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 (Motor Vehicles Amendment Act 2019) है, जिसे केंद्र सरकार ने 1 सितंबर 2019 से लागू किया था. इसी कानून की धारा 136A के तहत सड़कों और हाईवे पर इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग (कैमरों के जरिए चालान) को कानूनी मान्यता दी गई.

दिसंबर 2022 में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि नेशनल हाईवे पर बिना रुके टोल टैक्स कटने और गाड़ियों की पहचान के लिए ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों का पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर शुरू कर दिया गया है.

2023 के दौरान इस सिस्टम को केवल टोल टैक्स वसूलने तक सीमित न रखकर केंद्र सरकार के VAHAN 4.0 डेटाबेस से जोड़ा गया. जिससे गाड़ी के नंबर प्लेट से ही उसके इंश्योरेंस और PUC (प्रदूषण सर्टिफिकेट) की लाइव जांच शुरू हुई.

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