Trump Hormuz Claims: 'होर्मुज पर हमारा लगभग पूरा कंट्रोल...', ट्रंप के बयान से तेल और शेयर बाजार में मचा हड़कंप

तनीषा त्यागी

• 10:43 AM • 02 Sep 2026

होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप के दावे के बाद कच्चे तेल में तेज उछाल आया और एशियाई बाजारों में बिकवाली बढ़ी. जानें अमेरिका-ईरान तनाव से भारतीय बाजार क्यों सहमे हैं.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

ट्रंप ने कहा होर्मुज समुद्री रास्ते पर अमेरिका की पकड़ मजबूत है

बयान के बाद ब्रेंट 96 डॉलर पार और कच्चा तेल चढ़ा

जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजारों में तेज बिकवाली दिखी

Trump Hormuz Claims : मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर ग्लोबल मार्केट की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दिए गए ताजा बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. वहीं, एशियाई शेयर बाजारों में भी भारी बिकवाली का दबाव नजर आया. ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जबकि WTI क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.

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होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अब अमेरिका का लगभग पूरा नियंत्रण है. ट्रंप ने इसके साथ ही ईरानी अर्थव्यवस्था को लेकर भी बड़ा बयान दिया. उनके मुताबिक, ईरान की इकोनॉमी पूरी तरह ध्वस्त होने की ओर बढ़ रही है. ट्रंप ने उस मीडिया रिपोर्ट को भी खारिज किया, जिसमें कहा जा रहा था कि अमेरिका ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है. ट्रंप ने साफ किया कि उनका मकसद ईरान को किसी समझौते के लिए मजबूर करना नहीं है.

ट्रंप के बयान का तेल बाजार पर सीधा असर

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और तेज हो गई. खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड ऑयल 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका था. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड की कीमत करीब 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. दूसरी ओर, मर्बन क्रूड भी 104 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार करता नजर आया. कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी ने ग्लोबल मार्केट में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. मिडिल ईस्ट में तनाव और युद्ध की स्थिति लंबी खिंचने पर तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने की आशंका बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव डाल रही है.

एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट

तेल की कीमतों में उछाल का असर सिर्फ कमोडिटी मार्केट तक सीमित नहीं रहा. एशियाई शेयर बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली. जापान के निक्केई इंडेक्स में करीब 1,800 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी गई. हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी करीब 300 अंक नीचे कारोबार करता नजर आया. दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में तो करीब 4 फीसदी की तेज गिरावट दर्ज की गई. यानी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दिया.

भारतीय बाजार के लिए भी बढ़ी चिंता

एशियाई बाजारों में कमजोरी के बीच भारतीय शेयर बाजार को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. सेंसेक्स और निफ्टी के प्रमुख संकेतक माने जाने वाला गिफ्ट निफ्टी भी गिरावट के साथ रेड जोन में कारोबार करता दिखाई दिया. गिफ्ट निफ्टी में कमजोरी से संकेत मिल रहे थे कि भारतीय शेयर बाजार में भी बुधवार के कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिल सकता है. खासकर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को बाजार के लिए अहम जोखिम के तौर पर देखा जा रहा है.

अमेरिका ने ईरान पर तेज किए हमले

इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है. अमेरिकी सेना की ओर से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने की खबर सामने आई है. दिए गए विवरण के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. इनमें हवाई रक्षा स्थल, रडार सिस्टम, मरीन एसेट्स, बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमान यानी CENTCOM ने कहा कि ये कार्रवाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े ठिकानों पर की गई. इसके पीछे होर्मुज में कमर्शियल जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर हाल में किए गए हमलों की कोशिशों को वजह बताया गया.

ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई का दावा

अमेरिका के हमलों के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की बात कही है. इस तरह दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ गया है. इसका असर अब सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि कच्चे तेल से लेकर एशियाई शेयर बाजारों तक इसकी हलचल नजर आ रही है.

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट ?

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी तरह का तनाव ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यही वजह है कि इस समुद्री मार्ग से जुड़े किसी भी बयान या घटनाक्रम पर कच्चे तेल की कीमतों में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. ट्रंप के ताजा बयान, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और तेल की कीमतों में तेज उछाल ने बाजारों की चिंता बढ़ा दी है. एक तरफ क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचता नजर आ रहा है, तो दूसरी तरफ एशियाई शेयर बाजारों में भारी बिकवाली ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स के सेंटीमेंट पर दबाव बढ़ा दिया है. अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव किस दिशा में जाता है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्थिति आगे कैसी रहती है. क्योंकि तनाव बढ़ने पर इसका असर कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ दुनिया के शेयर बाजारों पर भी और गहरा हो सकता है.

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