Crude Oil : ईरान पर फिर बरसे ट्रंप, 'मैं उसका बैंकर हूं' बयान से Crude Oil में मचा हड़कंप

तनीषा त्यागी

12 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 12 2026 11:28 AM)

डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर सख्त बयान से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया. ब्रेंट 90 डॉलर के करीब पहुंचा. जानिए भारत की महंगाई और आयात बिल पर असर.

NewsTak
Google CTA

न्यूज़ हाइलाइट्स

ब्रेंट तेल करीब 90 डॉलर पहुंचा, डब्ल्यूटीआई भी 84 डॉलर के पास

ट्रंप ने कहा, ईरान की अटकी संपत्तियों पर अमेरिका का असर बना

बातचीत को मुश्किल बताकर ट्रंप ने शांति उम्मीदों को नया झटका दिया

Trump Warning: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है. खासतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में इसका सीधा असर देखने को मिला है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI Crude भी 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया. ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को मुश्किल बताते हुए उसकी आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी की है. उन्होंने ईरान की जब्त संपत्तियों का जिक्र करते हुए खुद को उसका 'बैंकर' बताया. इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष को खत्म करने के लिए दो संभावित रास्तों का भी जिक्र किया है.

Read more!

ईरान की Economy पर ट्रंप का बड़ा दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने एक फोन इंटरव्यू के दौरान ईरान की आर्थिक स्थिति को लेकर कड़ा बयान दिया. उनके मुताबिक ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर दबाव में है और देश के लिए आर्थिक स्थिति काफी मुश्किल बनी हुई है. ट्रंप ने ईरान की जब्त संपत्तियों का हवाला देते हुए कहा कि ईरान के पास कर्ज लेने की पर्याप्त क्षमता नहीं है और उसके पैसे पर अमेरिका का नियंत्रण है. इसी संदर्भ में उन्होंने खुद को ईरान का 'बैंकर' बताया. ट्रंप के इस बयान का संकेत साफ तौर पर ईरान की आर्थिक स्थिति और उसके वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति की ओर जाता है.

बातचीत को लेकर भी ट्रंप का सख्त रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की ओर से बातचीत में शामिल लोगों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत करना आसान नहीं है और बातचीत में शामिल लोग काफी चालाकी से काम कर रहे हैं. यानी एक तरफ शांति वार्ता को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की कोशिशों के बीच इस तरह के बयान बाजार के लिए खास महत्व रखते हैं, क्योंकि किसी भी नए सैन्य या आर्थिक तनाव का सीधा असर Energy Supply और Crude Oil Prices पर पड़ सकता है.

ट्रंप ने दिए संघर्ष खत्म करने के दो विकल्प

ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर ट्रंप ने दो संभावित विकल्पों का जिक्र किया है.

  • पहला विकल्प यह है कि अमेरिका अपनी मौजूदा रणनीति को जारी रखे और ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखे. इस स्थिति में ईरान की Economy पर दबाव आगे भी बना रह सकता है.
  • दूसरा विकल्प इससे ज्यादा आक्रामक है. ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ और बड़ा सैन्य हमला कर सकता है.

इन दोनों विकल्पों का जिक्र ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता पर टिकी हुई है.

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भी उठे सवाल

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने की कोशिशों में पाकिस्तान ने खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है. पाकिस्तान की ओर से यह दावा किया गया था कि दोनों देश किसी समझौते के करीब पहुंच सकते हैं. लेकिन ट्रंप के ताजा बयान के बाद फिलहाल ऐसी उम्मीदों को झटका लगा है. ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई नई चेतावनी यह संकेत देती है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत और समझौते की राह अभी आसान नहीं है. इससे पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर किए गए दावों पर भी सवाल खड़े होते हैं.

Trump के बयान से Crude Oil में तेज हलचल

अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान का सबसे तेज असर कच्चे तेल के बाजार में दिखाई दिया. मिडिल ईस्ट दुनिया के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण Energy Region है. ऐसे में यहां किसी भी नए तनाव की आशंका Crude Oil Prices को प्रभावित कर सकती है. ताजा घटनाक्रम के दौरान Brent Crude Oil करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया. वहीं WTI Crude Oil का भाव भी करीब 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. इसके अलावा Marban Crude में भी तेजी देखने को मिली. तेल की कीमतों में यह उछाल सिर्फ Energy Market तक सीमित नहीं रहता. अगर Crude लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो इसका असर Transport, Manufacturing और दूसरे क्षेत्रों की लागत पर भी पड़ सकता है.

महंगे तेल से बढ़ सकता है महंगाई का खतरा

Crude Oil की कीमतों में तेजी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है. महंगा तेल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतों पर दबाव बढ़ाता है और इससे कई क्षेत्रों की लागत बढ़ सकती है. इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है. खासकर उन देशों के लिए चुनौती बढ़ सकती है जो अपनी Energy जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर Crude Oil Import करते हैं. भारत के लिए भी Crude Oil की कीमतें बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. इसलिए लंबे समय तक तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत के Import Bill और महंगाई की स्थिति पर दबाव डाल सकती है.

आगे बाजार की नजर किन चीजों पर रहेगी

अब बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच आगे होने वाली बातचीत और किसी संभावित समझौते पर रहेगी. अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है और शांति की दिशा में ठोस प्रगति होती है, तो Crude Oil Prices पर दबाव कम हो सकता है. इसके उलट अगर अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई बढ़ती है या ईरान के साथ तनाव और गहरा होता है, तो Oil Supply को लेकर चिंता बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है. फिलहाल ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि अमेरिका-ईरान विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ऐसे में आने वाले दिनों में Geopolitical Developments और Crude Oil Prices पर बाजार की खास नजर रहेगी.