भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को आर्थिक मोर्चे पर कई अहम बदलाव करने होंगे. दिग्गज बैंकर और कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने वित्तीय अनुशासन, घरेलू उत्पादन, पूंजी आकर्षित करने के लिए सुधार और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को जरूरी बताया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल तेजी से बदल रहा है और ऐसे समय में भारत के सामने आर्थिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़ी चुनौतियां भी हैं.
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उदय कोटक ने ये बातें वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों और वित्त सचिवों के सम्मेलन में कहीं. इस सम्मेलन का फोकस भारत की 2047 तक की विकास यात्रा के लिए वित्तीय रणनीति और नीतिगत प्राथमिकताओं पर था.
वैश्विक बदलावों को लेकर कोटक ने किया आगाह
उदय कोटक ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों की तुलना इतिहास के कुछ दौर से करते हुए ईस्ट इंडिया कंपनी के विस्तार का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि आज वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों और बड़ी आर्थिक ताकतों का प्रभाव भी लगातार बढ़ रहा है.
उनके मुताबिक, दुनिया की आर्थिक व्यवस्था में हो रहे बदलावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. भारत को अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक परिस्थितियों से पैदा होने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना होगा.
कोटक ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति अच्छी है, लेकिन इस स्थिति को लेकर आत्मसंतुष्ट होने की जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक, केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल देश को बाहरी आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है.
भारत के लिए 7 बड़े फोकस एरिया
उदय कोटक ने भारत के लिए सात प्रमुख प्राथमिकताएं गिनाईं. इनमें वित्तीय मजबूती से लेकर घरेलू उत्पादन और कारोबार में बदलाव को बढ़ावा देने तक के मुद्दे शामिल हैं.
1. वित्तीय अनुशासन मजबूत करना
कोटक ने भारत की वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश को सख्त वित्तीय प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.
उन्होंने बताया कि भारत का सामान्य सरकारी राजकोषीय घाटा 7 फीसदी से ऊपर है, जबकि अमेरिका में यह करीब 6 फीसदी है. उनके मुताबिक, विकासशील अर्थव्यवस्था के शुरुआती चरण में जरूरत से ज्यादा फाइनेंशियलाइजेशन से सावधान रहने की जरूरत है.
2. वित्तीय सिस्टम को मजबूत बनाना
दूसरा बड़ा क्षेत्र वित्तीय प्रणाली को मजबूत करना है. कोटक का मानना है कि देश के वित्तीय बाजार और संस्थान अर्थव्यवस्था में पूंजी निर्माण को बढ़ावा देने वाले होने चाहिए.
उन्होंने अत्यधिक फाइनेंशियलाइजेशन से सावधान करते हुए कहा कि पूंजी बाजारों का मकसद सिर्फ ट्रेडिंग और बाजार की गतिविधियों को बढ़ाना नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था में पूंजी निर्माण को समर्थन देना भी होना चाहिए.
3. वैश्विक संकट को सुधारों के मौके में बदलना
कोटक ने कहा कि दुनिया में जब बड़े आर्थिक या भू-राजनीतिक बदलाव होते हैं, तो भारत को उनका इस्तेमाल अपने यहां सुधारों को तेज करने के अवसर के रूप में करना चाहिए.
उनके मुताबिक, बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे देश में ज्यादा पूंजी आए और घरेलू अर्थव्यवस्था की क्षमता बढ़े.
4. घरेलू उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना
उदय कोटक ने आयात पर भारत की निर्भरता घटाने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने पर खास जोर दिया.
उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ घरेलू जरूरत पूरी करने वाले उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. देश को ऐसे सामान और सेवाएं तैयार करनी चाहिए जिन्हें दुनिया के दूसरे देश भी खरीदना चाहें.
उन्होंने फूलों जैसे उत्पादों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां देश बड़े पैमाने पर वैश्विक निर्यातक बन सकता है.
5. सोने के आयात की चुनौती
कोटक ने भारत के बड़े गोल्ड इंपोर्ट बिल को भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दा बताया. उन्होंने कहा कि देश को ऐसा रास्ता तलाशना चाहिए जिससे भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की संपत्ति का इस्तेमाल ज्यादा उत्पादक तरीके से हो सके.
उन्होंने गोल्ड इंपोर्ट की समस्या पर एक अलग समिति बनाए जाने का सुझाव भी दिया. उनके मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का सकल सोना आयात बिल 88-90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
कोटक ने यह भी कहा कि भारत का FY26 करंट अकाउंट डेफिसिट करीब 25 अरब डॉलर था, जबकि उस साल सकल सोना आयात करीब 72 अरब डॉलर रहा. उनके मुताबिक, सोने को छोड़ दें तो भारत का करंट अकाउंट बैलेंस अलग तस्वीर दिखाता है.
6. रेगुलेशन और विकास के बीच संतुलन
कोटक ने वित्तीय नियमन को लेकर भी संतुलित रवैया अपनाने की जरूरत बताई. उनके मुताबिक, रेगुलेटर्स का काम वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है, लेकिन नियम इस तरह के नहीं होने चाहिए कि वे बिना जरूरत आर्थिक विकास को रोक दें.
यानी नियमन मजबूत हो, लेकिन कारोबार और निवेश के लिए जरूरी गुंजाइश भी बनी रहे.
7. कारोबार में 'क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन'
उदय कोटक ने भारतीय कंपनियों से बदलती तकनीक और नए बिजनेस मॉडल को अपनाने की अपील की. उन्होंने खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों का जिक्र किया.
'क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन' का मतलब है कि नई तकनीक, नए बिजनेस मॉडल और नए उत्पादों के लिए पुराने तरीकों में जरूरी बदलाव किए जाएं. कोटक के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था को बदलने और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कारोबार में इस तरह का बदलाव जरूरी है.
केंद्र और राज्यों के तालमेल पर भी जोर
उदय कोटक ने कहा कि भारत की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है. उनके मुताबिक, देश के सामने मौजूद वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला सिर्फ केंद्र सरकार या सिर्फ राज्य सरकारों के स्तर पर नहीं किया जा सकता.
विकसित भारत के लक्ष्य के लिए नीतियों, निवेश और आर्थिक प्राथमिकताओं में बेहतर तालमेल की जरूरत होगी.
कोटक का संदेश क्या है?
उदय कोटक की बातों का बड़ा फोकस इस पर रहा कि भारत को अपनी आर्थिक ताकत को सिर्फ GDP ग्रोथ तक सीमित नहीं रखना चाहिए. वित्तीय अनुशासन, मजबूत वित्तीय व्यवस्था, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, कम आयात निर्भरता, उत्पादक पूंजी और टेक्नोलॉजी आधारित बदलाव को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा.
उनका कहना है कि भारत की वैश्विक स्थिति फिलहाल मजबूत है, लेकिन बदलती दुनिया में लंबे समय तक आर्थिक स्वतंत्रता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखने के लिए लगातार सुधार जरूरी होंगे.
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