सोना सिर्फ निवेश और ज्वेलरी की जरूरत नहीं है, इसका असर अब भारत के External Accounts पर भी दिखाई देने लगा है. Veteran Banker Uday Kotak ने भारत के बढ़ते Gold Import Bill को लेकर चिंता जताई है. उनका अनुमान है कि FY27 में देश का Gold Import Bill बढ़कर करीब 88 से 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
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चिंता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इसी दौरान अगर Crude Oil महंगा रहता है और रुपया कमजोर होता है, तो भारत को Imports के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं. ऐसे में Current Account और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ने की स्थिति बन सकती है.
FY26 में Gold Import $72 अरब, Current Account Deficit $25 अरब
Uday Kotak ने Gold Import के आंकड़े को Current Account के साथ जोड़कर समझाया है. उनके मुताबिक FY26 में भारत का Current Account Deficit करीब 25 अरब डॉलर रहा, जबकि इसी दौरान देश ने करीब 72 अरब डॉलर का Gold Import किया.
Kotak के मुताबिक अगर Gold Imports को अलग कर दिया जाए, तो भारत का Current Account Surplus में होता.
यानी यहां सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि देश में कितना सोना आ रहा है. बड़ा सवाल यह है कि इस सोने को खरीदने के लिए कितनी विदेशी मुद्रा देश से बाहर जा रही है.
गौर करने वाली बातें:
- FY26 Gold Import: 72 अरब डॉलर
- FY26 Current Account Deficit: 25 अरब डॉलर
- Gold Import को अलग करने पर Current Account Surplus, Kotak के मुताबिक
- Gold Import बढ़ने का मतलब ज्यादा डॉलर खर्च
FY27 में और बढ़ सकता है दबाव
Uday Kotak का अनुमान है कि अगर Crude Oil की औसत कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो FY27 में भारत का Current Account Deficit करीब 60 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
इसके साथ ही Gold Import Bill भी बढ़कर 88 से 90 अरब डॉलर तक जा सकता है.
यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा Crude Oil और Gold Imports के जरिए पूरा करता है. अगर दोनों का Import Bill एक साथ बढ़ता है, तो देश की विदेशी मुद्रा की जरूरत भी बढ़ती है.
कमजोर रुपये से Gold और महंगा हो सकता है
Gold Import का असर सिर्फ देश के External Accounts तक सीमित नहीं रहता. अगर रुपया कमजोर होता है, तो डॉलर में खरीदे जाने वाले Imports भारतीय खरीदारों के लिए महंगे हो सकते हैं.
यानी एक तरफ Gold का अंतरराष्ट्रीय भाव बढ़े और दूसरी तरफ रुपया कमजोर हो, तो भारत में Gold की कीमत पर दोहरा दबाव बन सकता है.
इसका असर आम खरीदार पर भी पड़ सकता है.
रुपया कमजोर होने पर संभावित असर:
- Imported Gold की लागत बढ़ सकती है.
- Gold की घरेलू कीमतों पर दबाव आ सकता है.
- Jewellery खरीदना महंगा हो सकता है.
- Import Bill और बढ़ सकता है.
Kotak ने Gold Imports को लेकर क्या सुझाव दिया?
Uday Kotak का मानना है कि भारत को बढ़ते Gold Import Bill से निपटने के लिए कोई रास्ता तलाशना होगा. उन्होंने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए एक Committee बनाने का सुझाव दिया है.
उनकी चिंता का एक दूसरा पहलू भारत के घरों में मौजूद बड़ी Gold Wealth से जुड़ा है. लोगों के पास रखा सोना व्यक्तिगत संपत्ति है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा ऐसी आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल नहीं हो रहा जिससे Productive Economy को फायदा मिले.
यही वजह है कि Gold Wealth को ज्यादा Productive तरीके से Economy से जोड़ने की जरूरत पर भी चर्चा हो रही है.
सिर्फ Gold नहीं, Fiscal Deficit और Capital Markets पर भी चिंता
Uday Kotak ने Fiscal Deficit को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही है. उनके मुताबिक भारत का Consolidated Fiscal Deficit अभी भी 7 फीसदी से ऊपर है और Fiscal Discipline पर ध्यान देना जरूरी है.
उन्होंने Capital Markets के उद्देश्य पर भी सवाल उठाया. उनके मुताबिक Capital Markets का फोकस सिर्फ Trading, Volumes और Market Movements बढ़ाने पर नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका इस्तेमाल Capital Formation के लिए होना चाहिए.
Global Uncertainty को भारत के लिए मौका बनाने की बात
Kotak ने Global Economic Uncertainty के बीच भारत के लिए Reforms और Investment को तेज करने की जरूरत बताई है. उनका जोर ऐसी Goods और Services का Production बढ़ाने पर है, जिनकी दुनिया में मांग है.
साथ ही जरूरी चीजों के लिए दूसरे देशों पर Dependence कम करने की दिशा में भी काम करने की बात कही गई है.
कुल मिलाकर, Uday Kotak की चिंता सिर्फ सोने की कीमत को लेकर नहीं है. असली मुद्दा बढ़ता Gold Import Bill है. अगर Gold और Oil दोनों पर भारत का Import खर्च बढ़ता है, तो Current Account और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में आने वाले समय में Gold Imports को लेकर सरकार की नीति और भारतीयों की लगातार बढ़ती Gold Demand, दोनों पर नजर रहेगी.
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