UPI Charges: क्या अब UPI से पेमेंट करने पर पैसे देने होंगे? जानिए पूरी सच्चाई

सौरभ दीक्षित

• 07:54 PM • 07 Aug 2026

यूपीआई पर अभी आम ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जा रहा है. छोटे दुकानदारों पर भी एमडीआर नहीं है. असली चर्चा सिस्टम का खर्च कैसे चले, इस पर है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

यूपीआई 2016 से ग्राहकों के लिए बिना लेनदेन शुल्क के चल रहा है

छोटे दुकानदार और किराना स्टोर यूपीआई लेने पर अभी एमडीआर नहीं देते

खर्च में तकनीक, सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकना और ग्राहक मदद जैसी जरूरतें शामिल

यूपीआई चार्ज को लेकर इन दिनों काफी चर्चा है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अब यूपीआई से पेमेंट करने पर आम लोगों को पैसे देने होंगे. मौजूदा जानकारी के मुताबिक, इसका जवाब नहीं है.

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फिलहाल ग्राहक के लिए यूपीआई पेमेंट मुफ्त है. छोटे दुकानदारों और किराना स्टोर के लिए भी यूपीआई पेमेंट लेने पर एमडीआर, यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट, नहीं लगता. चर्चा असल में इस बात पर है कि इतने बड़े सिस्टम का खर्च लंबे समय तक कैसे संभाला जाए.

ग्राहकों के लिए अभी क्या स्थिति है

यूपीआई की शुरुआत 2016 में हुई थी. तब से इसके जरिए पेमेंट करना ग्राहकों के लिए मुफ्त रहा है. अभी ऐसी कोई बात नहीं है कि आम ग्राहक से यूपीआई इस्तेमाल करने पर अलग से चार्ज लिया जाएगा.

छोटे दुकानदारों पर क्या असर है

छोटे दुकानदारों और किराना स्टोर के लिए यूपीआई पेमेंट स्वीकार करने पर एमडीआर नहीं है. यूपीआई को इस तरह बनाया गया था कि छोटे कारोबारी भी आसानी से डिजिटल पेमेंट ले सकें. इसी वजह से छोटे कारोबारियों को इससे जोड़ना इसकी बड़ी बात रही है.

फिर चार्ज की चर्चा क्यों हो रही है

यूपीआई अब सिर्फ नई सुविधा नहीं रहा. यह भारत के डिजिटल पेमेंट का बहुत बड़ा सिस्टम बन चुका है और हर महीने इसके जरिए अरबों लेनदेन होते हैं. इतने बड़े सिस्टम को चलाने, सुरक्षित रखने और बेहतर बनाने के लिए लगातार खर्च होता है.

इस खर्च में तकनीक, ऑनलाइन सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकना, नियमों का पालन, ग्राहक मदद और नई सुविधा तैयार करना शामिल है. इसी वजह से यह चर्चा चल रही है कि इस पूरे सिस्टम को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ कैसे रखा जाए.

कौन उठाता है खर्च

मौजूदा व्यवस्था में यह लागत बैंक, पेमेंट सेवा देने वाली कंपनियां, फिनटेक कंपनियां, एनपीसीआई और आरबीआई जैसे जुड़े पक्ष उठाते हैं. पिछले करीब 10 वर्षों में इन संस्थाओं ने तकनीक, सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने, नई सुविधा और ग्राहक मदद पर निवेश किया है. इसी वजह से यूपीआई 24 घंटे और 7 दिन उपलब्ध रहने वाला पेमेंट सिस्टम बना हुआ है.

अगर बड़े दुकानदारों पर चार्ज लगा तो क्या ग्राहक भी पैसे देंगे

जरूरी नहीं है. जहां मर्चेंट सर्विस चार्ज लागू होता है, वह दुकानदार और पेमेंट सेवा देने वाली कंपनी के बीच का कारोबारी इंतजाम होता है. इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को यूपीआई से पेमेंट करने पर अलग से पैसे देने होंगे.

कई डिजिटल पेमेंट सिस्टम में दुकानदार से पेमेंट स्वीकार करने के लिए सर्विस चार्ज लिया जाता है, जबकि ग्राहक के लिए पेमेंट की सुविधा बनी रहती है. इसलिए बड़े दुकानदारों से संभावित चार्ज की चर्चा और ग्राहक पर सीधे चार्ज लगने की बात एक जैसी नहीं है.

एक नजर में बड़ी बातें

आम ग्राहक के लिए फिलहाल यूपीआई पेमेंट मुफ्त है.छोटे दुकानदारों और किराना स्टोर पर यूपीआई लेने के लिए एमडीआर नहीं है.चर्चा का मुख्य मुद्दा ग्राहकों से वसूली नहीं, बल्कि सिस्टम का खर्च है.इस खर्च में तकनीक, सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकना और ग्राहक मदद शामिल है.मौजूदा व्यवस्था में यह लागत बैंक और दूसरी जुड़ी संस्थाएं उठाती हैं.

सीधी बात यह है कि फिलहाल आम यूपीआई यूजर को घबराने की जरूरत नहीं है. अभी ग्राहकों पर चार्ज लगाने की बात नहीं है. असली सवाल यह है कि देश के इस बड़े डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आगे भी सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ तरीके से कैसे चलाया जाए.