UPI Rules : भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके UPI को लेकर जल्द अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं. पिछले कई वर्षों से ग्राहकों और दुकानदारों के लिए लगभग मुफ्त रहने वाली यह व्यवस्था अब नए नियमों के दौर में प्रवेश कर सकती है. सरकार पेमेंट कानूनों में संशोधन की तैयारी कर रही है, जिसके बाद 2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने का रास्ता खुल सकता है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो इसका असर सिर्फ पेमेंट इकोसिस्टम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल पेमेंट कंपनियों, बैंकों और बड़े कारोबारियों के लिए भी इसका आर्थिक महत्व काफी बढ़ जाएगा.
ADVERTISEMENT
क्या बदल सकता है मौजूदा सिस्टम ?
फिलहाल UPI के जरिए किए जाने वाले Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लिया जाता. यही वजह है कि दुकानदार बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के UPI पेमेंट स्वीकार करते हैं. लेकिन प्रस्तावित बदलाव के बाद 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार Payment and Settlement Systems Act में संशोधन पर विचार कर रही है. इस बदलाव के बाद UPI ट्रांजैक्शन पर MDR तय करने का अधिकार सीधे भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के पास होगा.
कितना लग सकता है चार्ज?
प्रस्ताव के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट पेमेंट पर 15 से 30 बेसिस पॉइंट तक का MDR लगाया जा सकता है. हालांकि अभी यह केवल प्रस्तावित व्यवस्था है. इसे लागू करने से पहले संसदीय मंजूरी और इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न पक्षों के साथ चर्चा की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसलिए फिलहाल ग्राहकों और व्यापारियों के लिए मौजूदा व्यवस्था में कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है.
आम ग्राहकों पर कितना असर पड़ेगा
अगर यह नियम लागू भी होता है तो आम उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की खरीदारी पर इसका बहुत सीमित असर पड़ने की संभावना है. इसकी वजह यह है कि 2,000 रुपये से कम के अधिकांश UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह बिना किसी बदलाव के जारी रह सकते हैं. आंकड़ों के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन कुल संख्या का केवल लगभग 4 फीसदी हैं. हालांकि कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी करीब 67 फीसदी तक पहुंच जाती है. यानी संख्या कम होने के बावजूद बड़े भुगतान की आर्थिक अहमियत काफी ज्यादा है.
पेमेंट कंपनियों के लिए खुलेगा कमाई का नया रास्ता
अगर MDR लागू होता है तो सबसे बड़ा फायदा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ी कंपनियों को मिल सकता है. अभी तक बड़ी संख्या में ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के बावजूद कई कंपनियां इस सेवा से पर्याप्त कमाई नहीं कर पा रही थीं. नई व्यवस्था लागू होने पर MDR से मिलने वाली राशि बैंकों, मर्चेंट एक्वायरर और पेमेंट प्लेटफॉर्म के बीच बांटी जा सकती है. इससे डिजिटल पेमेंट कंपनियों के लिए स्थायी राजस्व का नया स्रोत तैयार होगा.
Paytm को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा
डिजिटल पेमेंट बाजार में मजबूत मौजूदगी रखने वाली Paytm इस बदलाव की सबसे बड़ी लाभार्थी कंपनियों में शामिल हो सकती है. अनुमान है कि MDR लागू होने की स्थिति में कंपनी को सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है. विश्लेषकों का मानना है कि इससे कंपनी के मुनाफे में 15 से 35 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. वहीं Pine Labs जैसी कंपनियों को भी अतिरिक्त आय मिलने की संभावना जताई जा रही है.
हजारों करोड़ रुपये का नया बाजार बनने की उम्मीद
विश्लेषकों का अनुमान है कि बड़े UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने से आने वाले वर्षों में डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए हजारों करोड़ रुपये का नया राजस्व बाजार तैयार हो सकता है. यह अतिरिक्त आय कंपनियों को अपने नेटवर्क, तकनीकी ढांचे, साइबर सिक्योरिटी और नई सेवाओं में निवेश करने का अवसर भी दे सकती है.
क्यों जरूरी माना जा रहा है यह बदलाव ?
डिजिटल पेमेंट की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, लेकिन इस पूरे सिस्टम को चलाने वाली कंपनियां लंबे समय से लागत और कमाई के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रही हैं. हर ट्रांजैक्शन को सुरक्षित तरीके से प्रोसेस करना, नए व्यापारियों को जोड़ना, सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत रखना और साइबर सुरक्षा पर लगातार निवेश करना काफी महंगा साबित होता है. ऐसे में इंडस्ट्री लंबे समय से किसी टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की मांग कर रही थी. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़े ट्रांजैक्शन पर सीमित MDR लागू होता है तो इससे कंपनियों को वित्तीय मजबूती मिलेगी और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
आगे क्या होगा ?
फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है और इसे लागू होने से पहले कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा. सरकार, RBI, बैंकिंग सेक्टर और डिजिटल पेमेंट कंपनियों के बीच चर्चा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा. बाजार की नजर अब इस बात पर होगी कि सरकार इस प्रस्ताव को किस रूप में आगे बढ़ाती है. यदि यह लागू होता है तो भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में यह पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा सकता है. वहीं ग्राहकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रहेगी कि छोटे रोजमर्रा के UPI ट्रांजैक्शन पर फिलहाल किसी बदलाव की संभावना नहीं दिखाई दे रही है, जबकि बड़े व्यापारिक भुगतान के तरीके में बदलाव देखने को मिल सकता है.
ADVERTISEMENT

