UPI पर 0.3% MDR की वापसी ? आने वाले 10 दिनों में बदल जाएगा पूरा खेल ?

चिराग ठाकुर

• 02:37 PM • 23 Aug 2026

यूपीआई पर 2000 रुपये से ऊपर के दुकानदार भुगतान पर 0.3 प्रतिशत एमडीआर लग सकता है. जानिए इसका असर किस पर होगा और ग्राहक से पैसा कटेगा या नहीं.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

दोस्त या परिवार को भेजे गए पैसे पर यह शुल्क नहीं लगेगा

प्रस्तावित शुल्क सिर्फ दुकानदार या कंपनी को किए भुगतान पर लागू होगा

MDR की रकम बैंक, ऐप कंपनियों और NPCI में बंट सकती है

अगर आप रोज UPI से पेमेंट करते हैं, तो आने वाले दिनों में इससे जुड़ा एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. करीब छह साल से Zero-MDR व्यवस्था के तहत चल रहे UPI पर अब कुछ बड़े merchant transactions के लिए MDR यानी Merchant Discount Rate वापस लाने की तैयारी है.

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Financial Express की रिपोर्ट के मुताबिक, ₹2,000 या उससे ज्यादा के UPI merchant transactions पर 0.3% तक MDR लगाए जाने का ऐलान अगले 10-12 दिनों में हो सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI payment पर आपसे पैसा लिया जाएगा.

सबसे पहले समझिए, MDR क्या है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो merchant digital payment स्वीकार करने के लिए payment ecosystem को देता है. यानी इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि ग्राहक के UPI balance से अपने आप पैसा कट जाएगा.

प्रस्तावित व्यवस्था में फोकस Person-to-Merchant यानी P2M transactions पर है. यानी जब आप किसी दुकान, कंपनी या दूसरे business को UPI से पेमेंट करते हैं.

सरकार की तरफ से यह भी कहा गया है कि ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर इसका सीधा बोझ नहीं डाला जाएगा.

₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर क्या होगा?

माना आपने किसी merchant को UPI से ₹5,000 का भुगतान किया. अगर 0.3% MDR लागू होता है, तो MDR की गणना ₹5,000 की transaction value पर होगी.

लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल है कि यह पैसा जाएगा किसके पास?

इसका जवाब किसी एक बैंक या fintech के पास नहीं है.

MDR का पैसा कई खिलाड़ियों में बंटेगा

UPI payment के पीछे कई layers काम करती हैं. इसलिए MDR से मिलने वाला revenue भी payment chain के अलग-अलग हिस्सों में जा सकता है.

इसमें मुख्य तौर पर शामिल हैं.

  • Issuing Bank: यानी ग्राहक का बैंक.
  • Acquiring Bank: यानी merchant की तरफ का बैंक.
  • PSP: Payment Service Provider, जो transaction को facilitate करता है.
  • Fintech Apps: PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे platforms, जो app, QR code और merchant onboarding जैसी सेवाएं देते हैं.
  • NPCI: जो UPI network को operate और transactions को settle करता है.

P2M transactions में MDR का एक अहम हिस्सा issuing bank को interchange के तौर पर मिल सकता है. वहीं NPCI को network चलाने के लिए एक छोटा network fee हिस्सा मिल सकता है.

यानी 0.3% की पूरी रकम किसी एक खिलाड़ी की कमाई नहीं होगी.

आखिर MDR वापस लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

UPI को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए सरकार ने 2019 के बाद MDR को Zero कर दिया था. इसका मकसद digital payments को बढ़ावा देना था.

लेकिन अब UPI का इस्तेमाल जिस स्तर पर पहुंच चुका है, उसे चलाने की लागत भी काफी बढ़ गई है.

Payment infrastructure, cybersecurity, fraud prevention और network maintenance पर लगातार खर्च होता है.

Parliamentary Standing Committee on Finance के मुताबिक, digital payments industry की अनुमानित सालाना operating cost करीब ₹20,700 करोड़ है. वहीं UPI को बढ़ावा देने और Zero-MDR की वजह से industry को compensate करने के लिए करीब ₹2,000 करोड़ का allocation किया गया है.

यानी लागत और सरकारी support के बीच बड़ा gap है.

किन पेमेंट्स पर ज्यादा असर दिख सकता है?

MDR का असर खास तौर पर बड़े-value वाले merchant payments में दिखाई दे सकता है.

जैसे.

  • महंगे electronics और gadgets.
  • बड़े retail purchases.
  • महंगे कपड़े और lifestyle products.
  • कुछ financial और securities-related payments.

यहां transaction value जितनी ज्यादा होगी, MDR की रकम भी उतनी ही ज्यादा होगी.

हालांकि बड़ा सवाल यह रहेगा कि merchant इस लागत को खुद उठाता है या किसी दूसरे तरीके से इसकी भरपाई करने की कोशिश करता है.

UPI का scale कितना बड़ा है?

FY26 में भारत में करीब 24,000 करोड़ UPI transactions हुए और इनकी कुल value करीब ₹314 लाख करोड़ रही.

यानी UPI अब सिर्फ payment करने का तरीका नहीं है. यह भारत की digital economy का एक अहम हिस्सा बन चुका है.

इसलिए सरकार के सामने दोहरी चुनौती है.

पहली, UPI आम लोगों के लिए आसान और कम लागत वाला बना रहे.

दूसरी, banks, fintechs और payment infrastructure से जुड़े खिलाड़ियों के लिए इसका business model टिकाऊ हो.

यही वजह है कि MDR को लेकर चर्चा तेज हुई है.

फिलहाल बड़ा सवाल यह नहीं है कि हर UPI payment पर charge लगेगा या नहीं. असली सवाल यह है कि 0.3% MDR का final structure क्या होगा, revenue किसे कितना मिलेगा और merchant पर इसका असर आखिर कितना पड़ेगा.

क्योंकि UPI की सबसे बड़ी ताकत रही है आसान, तेज और लगभग बिना शुल्क वाला payment. अब चुनौती यह है कि payment ecosystem की कमाई का मॉडल भी बने और UPI की यही ताकत कमजोर भी न हो.