UPI पर लगेगा चार्ज? सरकार के नए प्रस्ताव से क्या बदल सकता है, जानिए पूरा सच

संदीप शर्मा

• 04:48 PM • 04 Aug 2026

यूपीआई भुगतान पर अभी कोई नया चार्ज नहीं लगा है. सरकार सिर्फ कानून में बदलाव का प्रस्ताव लाई है, ताकि आगे जरूरत पड़ने पर एमडीआर पर अलग से फैसला कर सके.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

UPI पर अभी कोई चार्ज नहीं

PSS Act में बदलाव का प्रस्ताव

MDR पर फैसला भविष्य में होगा

UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के बीच इन दिनों यह सवाल तेजी से चल रहा है कि क्या अब भुगतान पर चार्ज देना पड़ेगा. इसकी वजह वित्त मंत्रालय की तरफ से Payment and Settlement Systems Act में संशोधन का प्रस्ताव है. फिलहाल साफ बात यह है कि यूपीआई पर कोई नया चार्ज नहीं लगाया गया है. सरकार ने न कोई नई फीस लागू की है और न ही इस बारे में कोई नोटिफिकेशन जारी किया है. अभी सिर्फ कानूनी ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव है, ताकि आगे जरूरत पड़ने पर सरकार तय कर सके कि किन डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर MDR लागू होगा और किन पर नहीं.

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अभी क्या स्थिति है?

अभी PSS Act की धारा 10A के तहत UPI और RuPay डेबिट कार्ड जैसे नोटिफाइड पेमेंट सिस्टम पर Merchant Discount Rate यानी MDR नहीं लगाया जा सकता.सरकार अब इस प्रावधान में संशोधन करना चाहती है. अगर ये बदलाव लागू होता है, तो भविष्य में सरकार नोटिफिकेशन के जरिए तय कर सकेगी कि किन डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर MDR लागू होगा और किन पर नहीं. यानी फिलहाल सिर्फ कानून का ढांचा बदला जा रहा है. UPI पर चार्ज लगाने का कोई फैसला अभी नहीं लिया गया है.

क्या अभी UPI पर कोई चार्ज लगेगा?

  • UPI से भुगतान पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा
  • ग्राहकों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा
  • दुकानदारों पर भी अभी कोई MDR लागू नहीं होगा

सरकार ने किसी भी तरह की फीस, उसकी दर या लागू होने की तारीख का ऐलान नहीं किया है

सरकार यह बदलाव क्यों करना चाहती है?

UPI आज दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क में शामिल हो चुका है. जुलाई 2026 में UPI के जरिए 23.66 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.88 लाख करोड़ रुपये रही.इतने बड़े नेटवर्क को चलाने के लिए बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और फिनटेक कंपनियों को सर्वर, साइबर सिक्योरिटी और तकनीकी ढांचे पर लगातार निवेश करना पड़ता है.जनवरी 2020 में MDR हटने के बाद सरकार इंसेंटिव स्कीम के जरिए कुछ आर्थिक सहायता देती रही है. लेकिन उद्योग का कहना है कि यह सहायता वास्तविक लागत के मुकाबले काफी कम है. इसी वजह से सरकार भविष्य के लिए अधिक टिकाऊ व्यवस्था का विकल्प अपने पास रखना चाहती है.

MDR क्या होता है?

Merchant Discount Rate (MDR) वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर दुकानदार (Merchant) बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है.यह शुल्क ग्राहक के बैंक खाते से नहीं काटा जाता. अगर भविष्य में MDR लागू भी होता है, तो उसका भुगतान व्यापारी करेगा. बाद में वह इस लागत को अपनी कीमतों में शामिल करे या नहीं, यह उसका व्यावसायिक फैसला होगा.

Jefferies का क्या कहना है?

ब्रोकरेज हाउस Jefferies का मानना है कि अगर भविष्य में सरकार UPI पर MDR लागू करने का फैसला करती है, तो इसकी शुरुआत ₹2,000 से अधिक के Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन से हो सकती है. Jefferies के मुताबिक, ₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन कुल ट्रांजैक्शन की संख्या का सिर्फ 4% हैं, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी करीब 67% है. ऐसे में सरकार छोटे भुगतान को मुफ्त रखते हुए बड़े लेन-देन पर MDR लागू करने पर विचार कर सकती है. ब्रोकरेज का अनुमान है कि अगर ऐसा मॉडल लागू होता है, तो FY28 तक डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए ₹5,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू पूल बन सकता है. हालांकि, ये Jefferies का अनुमान है. सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव या घोषणा नहीं की गई है.

आगे क्या होगा?

अगर भविष्य में सरकार MDR लागू करने का फैसला करती है, तो इसके लिए अलग से नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. उसी में यह स्पष्ट होगा कि किन ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगेगा, कितनी दर होगी और यह कब से लागू होगा.फिलहाल UPI पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त है. इसलिए आम यूजर्स और छोटे कारोबारियों को अभी किसी अतिरिक्त शुल्क की चिंता करने की जरूरत नहीं है. सरकार का मौजूदा प्रस्ताव केवल भविष्य के लिए नीति बनाने की प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाने से जुड़ा है.