UPI MDR : दुकानदारों को बड़ी राहत? 15 अक्टूबर से लगने वाला चार्ज अब 1 जनवरी 2027 तक टालने की तैयारी

संदीप शर्मा

08 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 8 2026 1:31 PM)

UPI से पेमेंट लेने वाले दुकानदारों और कारोबारियों को बड़ी राहत मिल सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 15 अक्टूबर से लागू होने वाला MDR अब 1 जनवरी 2027 तक टल सकता है. साथ ही सालाना 40 लाख रुपये तक कारोबार करने वाले छोटे बिजनेस को भी MDR से बाहर रखने पर विचार हो रहा है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

दुकानदारों और कारोबारियों के लिए राहत की खबर सामने आई

मर्चेंट डिस्काउंट रेट फिलहाल टाला जा सकता है

छूट का दायरा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा

UPI से पेमेंट करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए राहत की खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर लगने वाला MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट फिलहाल टाला जा सकता है. जिस व्यवस्था को 15 अक्टूबर से लागू करने की तैयारी थी, उसे अब करीब ढाई महीने आगे बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 से लागू करने का प्रस्ताव बताया जा रहा है. हालांकि, अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता है. MDR की तारीख के साथ-साथ छोटे कारोबारियों को इससे मिलने वाली छूट का दायरा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है.

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15 अक्टूबर से शुरू होना था MDR

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू करने की व्यवस्था 15 अक्टूबर से शुरू होनी थी. लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने की तैयारी की खबर है. प्रस्ताव के मुताबिक, MDR को 1 जनवरी 2027 से लागू किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो त्योहारों के पूरे सीजन में दुकानदारों और कारोबारियों को इस प्रस्तावित चार्ज से राहत मिल सकती है. त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है और इसके साथ UPI से होने वाले पेमेंट भी बढ़ते हैं. ऐसे समय में कारोबारियों की चिंता थी कि अगर MDR लागू हुआ तो हर योग्य UPI पेमेंट पर उनकी लागत बढ़ सकती है.

इसी मुद्दे को लेकर देश के कई हिस्सों में कारोबारियों की तरफ से ' नो यूपीआई डे' भी मनाया गया था. MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह चार्ज है, जो पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी से लिया जाता है. मौजूदा प्रस्ताव के मुताबिक, 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लगाने की बात है. वहीं 2,000 रुपये तक के ट्रांजैक्शन को इस चार्ज से बाहर रखने का प्रस्ताव है. इसके अलावा, 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रखने का प्रस्ताव बताया गया है. यानी अगर कोई ट्रांजैक्शन इस सीमा से ऊपर जाता है, तब भी प्रस्तावित MDR एक तय अधिकतम सीमा से ज्यादा नहीं होगा.

जरूरी सेवाओं के लिए अलग चार्ज का प्रस्ताव

प्रस्ताव में जरूरी सेवाओं के लिए भी अलग व्यवस्था की बात सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2,000 रुपये से ज्यादा के ऐसे पेमेंट पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लगाने का प्रस्ताव है. हालांकि, MDR से जुड़े इन सभी प्रावधानों पर अभी चर्चा चल रही है. इसलिए जब तक अंतिम नियम सामने नहीं आते, तब तक चार्ज की तारीख और इसके दायरे में बदलाव की संभावना बनी हुई है.

सिर्फ MDR की तारीख आगे बढ़ाने की बात ही अहम नहीं है. छोटे कारोबारियों को इससे मिलने वाली छूट का दायरा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सालाना 40 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले बिजनेस को MDR से छूट देने का प्रस्ताव है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और कारोबार MDR के दायरे से बाहर रह सकते हैं. पहले जिस व्यवस्था पर चर्चा थी, उसमें हर महीने 1 लाख रुपये तक का टर्नओवर करने वाले कारोबारियों को छूट देने की बात सामने आई थी. अब सालाना 40 लाख रुपये की सीमा पर विचार किया जा रहा है. इस बदलाव का सीधा फायदा छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को मिल सकता है, क्योंकि MDR का दायरा उनके लिए सीमित हो जाएगा.

MDR को टालने की खबर का असर पेमेंट कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खबर सामने आने के बाद Paytm के शेयर करीब 10 फीसदी तक गिर गए. Mobikwik और Pine Labs के शेयरों में भी तेज गिरावट देखी गई. Paytm का शेयर कुछ समय के लिए लोअर सर्किट तक पहुंच गया. इसके चलते कंपनी के मार्केट कैप में भी कुछ ही मिनटों में करीब 11 हजार करोड़ रुपये की कमी आने की बात सामने आई.

दरअसल, MDR को पेमेंट कंपनियों के लिए UPI ट्रांजैक्शन से कमाई के एक नए रास्ते के तौर पर देखा जा रहा था. अगर MDR लागू होने में देरी होती है तो इन कंपनियों को इस संभावित कमाई का फायदा भी बाद में मिल सकता है. यही वजह है कि MDR की तारीख आगे बढ़ने की खबर का असर पेमेंट कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया.

अगर MDR को 1 जनवरी 2027 तक टालने का फैसला होता है तो सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि त्योहारों के दौरान कारोबारियों को प्रस्तावित MDR का सामना नहीं करना पड़ेगा. दूसरा बड़ा मुद्दा छोटे कारोबारियों के लिए छूट की सीमा है. अगर सालाना 40 लाख रुपये तक के कारोबार को MDR से बाहर रखने का प्रस्ताव मंजूर होता है, तो छोटे दुकानदारों के लिए राहत और बढ़ सकती है. हालांकि, अभी दोनों ही बातें प्रस्ताव के स्तर पर हैं. अंतिम फैसला आने के बाद ही यह साफ होगा कि MDR कब से लागू होगा, किन UPI पेमेंट पर लगेगा और कितने कारोबारियों को इससे छूट मिलेगी.

अब नजर अंतिम फैसले पर

फिलहाल MDR को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था को 1 जनवरी 2027 तक टालने की तैयारी की खबर जरूर है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है. साथ ही छोटे कारोबारियों के लिए सालाना 40 लाख रुपये तक की छूट का प्रस्ताव भी काफी अहम है.अब नजर इस बात पर रहेगी कि NPCI और संबंधित पक्ष MDR की तारीख, चार्ज और कारोबारियों के लिए छूट को लेकर क्या अंतिम फैसला लेते हैं.