15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा के UPI लेनदेन पर 0.40% MDR शुल्क लगाने का प्रस्ताव है. इस फैसले से देशभर के व्यापारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाई है. CTI के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है. उन्होंने सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है. सूत्रों के अनुसार यह मांग नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) तक पहुंच चुकी है.
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छोटे व्यापारियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
मंदी की मार झेल रहे छोटे व्यापारी इस अतिरिक्त खर्च को उठाने की स्थिति में नहीं हैं. CTI के सर्वे के अनुसार इस शुल्क से डिजिटल लेनदेन में 50% तक की गिरावट आ सकती है. लोग फिर से कैश में लेनदेन करना शुरू कर देंगे. इससे बाजार में काले धन को बढ़ावा मिलेगा और डिजिटल इंडिया मिशन को झटका लगेगा.
त्योहारी सीजन के कारोबार पर असर
आने वाले तीन महीनों में कई बड़े त्योहार आ रहे हैं. इनमें नवरात्रि, करवाचौथ, छठ पूजा, क्रिसमस और नया साल शामिल हैं. इस दौरान लोग जमकर खरीदारी करते हैं. यूपीआई पर एमडीआर शुल्क लगने से त्योहारी व्यापार प्रभावित हो सकता है. व्यापारियों का कहना है कि सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए.
दुकानों पर 'Cash Only' बोर्ड लगाने की चेतावनी
CTI ने सरकार को चेतावनी दी है कि मांगे नहीं माने जाने पर व्यापारी बड़ा कदम उठाएंगे. दिल्ली और देश के व्यापारी दुकानें से 'UPI Accepted' का बोर्ड हटा देंगे. वे अपनी दुकानों पर 'Cash Only' के बोर्ड लगाएंगे और यूपीआई का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे.
CTI की प्रमुख मांगें
CTI ने वित्त मंत्रालय से एमडीआर शुल्क को तुरंत वापस लेने का अनुरोध किया है. अगर ऐसा संभव न हो तो इसे कम से कम 1 जनवरी 2027 तक टाल दिया जाए. 40 लाख रुपये तक के सालाना कारोबार वाले छोटे व्यापारियों को इससे स्थायी रूप से छूट दी जाए. इसके अलावा 2000 रुपये तक के सभी लेनदेन को भी एमडीआर शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा जाए.
जानिए लेनदेन पर कितना लगेगा शुल्क
पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने 2000 रुपये से अधिक के चुनिंदा लेनदेन पर 0.40 फीसदी शुल्क तय किया था. आसान शब्दों में समझें तो 2000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर 8 रुपये का एमडीआर शुल्क बनेगा. वहीं 10,000 रुपये के लेनदेन पर व्यापारी को 40 रुपये का शुल्क देना होगा. अधिकतम 300 रुपए एमडीआर फिक्स की गई है. MDR वह राशि है जो डिजिटल पेमेंट की सुविधा देने के बदले व्यापारी द्वारा संबंधित बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता को दी जाती है.
एनपीसीआई के अगले कदम पर टिकी नजरें
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 अक्टूबर से नया नियम लागू होगा या राहत मिलेगी. यदि एनपीसीआई तारीख आगे नहीं बढ़ाता है तो 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर एमडीआर लागू हो जाएगा.
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