लोकसभा ने गुरुवार को 'Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026' को मंजूरी दे दी. सरकार का कहना है कि इस बिल का मकसद भारत को विदेशी निवेश, विदेशी कंपनियों और ग्लोबल फंड मैनेजर्स के लिए ज्यादा आकर्षक बनाना है. हालांकि, इस बिल के कुछ प्रावधान आम लोगों और छोटे निवेशकों से भी जुड़े हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस बिल से क्या बदल सकता है.
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UPI पेमेंट पर क्या लगेगा चार्ज?
बिल का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला प्रावधान UPI और RuPay पेमेंट से जुड़ा है.फिलहाल, जब आप UPI से किसी दुकान पर भुगतान करते हैं या RuPay कार्ड से पेमेंट करते हैं, तो दुकानदार से Merchant Discount Rate (MDR) नहीं लिया जाता. यही वजह है कि UPI देश में तेजी से लोकप्रिय हुआ है.नए बिल में उस कानूनी प्रावधान को हटा दिया गया है, जो बैंकों और पेमेंट कंपनियों को भविष्य में MDR लगाने से रोकता था.हालांकि, अभी UPI पर कोई चार्ज नहीं लगाया गया है. यह बिल सिर्फ सरकार को भविष्य में जरूरत पड़ने पर MDR लागू करने का अधिकार देता है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर भविष्य में MDR लागू होता भी है तो यह मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों और हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर लागू हो सकता है. यानी सब्जी, दूध या चाय की दुकान जैसे छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा.
विदेशी निवेशकों के लिए आसान होंगे नियम
बिल का बड़ा उद्देश्य भारत में विदेशी निवेश बढ़ाना है.अब विदेश में बैठे फंड मैनेजर अगर भारत आकर काम करना चाहें, तो उनके लिए नियम आसान किए गए हैं. पहले कई टैक्स नियमों की वजह से पूरी विदेशी फंड संरचना पर भारत में टैक्स लगने का खतरा रहता था. नए संशोधन के बाद यह जोखिम कम होगा.सरकार को उम्मीद है कि इससे ज्यादा विदेशी फंड मैनेजर भारत आएंगे, जिससे पूंजी बाजार में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी बनेंगे.
REIT और InvIT निवेशकों को राहत
अगर आपने REIT (Real Estate Investment Trust) या InvIT (Infrastructure Investment Trust) में निवेश किया है, तो आपके लिए राहत की खबर है.बिल के तहत इन निवेशों से मिलने वाले डिविडेंड पर मिलने वाला टैक्स लाभ जारी रहेगा, भले ही संबंधित कंपनी नई टैक्स व्यवस्था में चली जाए. इससे छोटे निवेशकों का टैक्स लाभ बना रहेगा.
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा
मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट बनाने वाली भारतीय फैक्ट्रियों को मशीनें उपलब्ध कराने वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली टैक्स छूट को 10 साल के लिए बढ़ा दिया गया है.सरकार का मानना है कि इससे ज्यादा विदेशी कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाएंगी, जिससे रोजगार बढ़ेगा और भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है.
डेटा सेंटर और डायमंड कारोबार को भी राहत
बिल में विदेशी डायमंड ट्रेडर्स और भारत में डेटा सेंटर संचालित करने वाली क्लाउड कंपनियों के लिए भी टैक्स छूट का प्रावधान किया गया है. इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में वैश्विक निवेश आकर्षित करना है.
क्या है सरकार की रणनीति?
सरकार इस बिल के जरिए भारत को वैश्विक निवेश के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना चाहती है. टैक्स नियमों को सरल बनाकर विदेशी पूंजी, नई फैक्ट्रियां और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को भारत की ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई है.
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