US Fed के फैसले से सेंसेक्स में 500 अंकों का उछाल, लेकिन दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ीं तो क्या होगा?

तनीषा त्यागी

• 10:46 AM • 29 Oct 2026

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.75% से 4% की रेंज में स्थिर रखा, जिसके बाद भारतीय शेयर बाजार में तेजी आई. सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा चढ़ा और निफ्टी 22,850 के पार पहुंच गया. लेकिन महंगाई, कच्चे तेल और विदेशी निवेश की चुनौतियों के बीच आगे बाजार की दिशा क्या होगी?

Fed Rate Cut Impact On Markets
अमेरिका में पॉलिसी रेट कट का भारत पर दिख सकता है असर (Photo: ITGD)
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US Fed Policy: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन उसके फैसले के साथ आए संकेतों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है. एक तरफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का आकलन बेहतर हुआ है, तो दूसरी तरफ महंगाई अब भी 2% के लक्ष्य से ऊपर है. इसी बीच भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा उछला और निफ्टी 22,850 के पार पहुंच गया. अब सवाल है कि क्या यह तेजी आगे भी टिकेगी या ग्लोबल चुनौतियां बाजार की चाल बदल सकती हैं.

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US Fed ने ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया?

अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.75% से 4% की रेंज में बरकरार रखा है. बाजार को पहले से ही इस फैसले की उम्मीद थी, इसलिए फेड के इस कदम को अप्रत्याशित नहीं माना जा रहा है. हालांकि, निवेशकों की नजर सिर्फ ब्याज दरों पर नहीं, बल्कि फेड के बयान और आगे की नीतिगत दिशा पर भी है. फेड के सदस्यों के बीच ब्याज दरों को लेकर मतभेद भी देखने को मिला. कुल 12 सदस्यों में से 10 ने दरों को स्थिर रखने का समर्थन किया, जबकि 2 सदस्य ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में रहे. इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और महंगाई को लेकर केंद्रीय बैंक के भीतर पूरी तरह एक जैसी राय नहीं है. ब्याज दरें स्थिर रखने का फैसला फिलहाल राहत दे सकता है, लेकिन आगे दरों में कटौती होगी या बढ़ोतरी, यह काफी हद तक महंगाई और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर फेड का आकलन बदला

फेडरल रिजर्व ने अमेरिकी आर्थिक गतिविधियों को लेकर अपने आकलन में बदलाव किया है. केंद्रीय बैंक ने अर्थव्यवस्था की रफ्तार को पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत बताया है. उसके आकलन में आर्थिक गतिविधियों की स्थिति को 'सॉलिड' यानी ठोस से बढ़ाकर 'स्ट्रॉन्ग' यानी मजबूत किया गया है. फेड के मुताबिक, अमेरिका में आर्थिक गतिविधियां मजबूती से आगे बढ़ रही हैं. घरेलू खर्च और उत्पादकता में भी मजबूती बनी हुई है. यह संकेत देता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मांग और कामकाज की रफ्तार फिलहाल कमजोर नहीं पड़ी है. हालांकि, मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ महंगाई की चुनौती भी बनी हुई है. फेड ने माना है कि अनिश्चितता का स्तर ऊंचा है और महंगाई अब भी उसके 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है. यही वह स्थिति है जो आगे ब्याज दरों को लेकर फैसले को मुश्किल बना सकती है. अगर आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहती हैं और महंगाई उम्मीद के मुताबिक नीचे नहीं आती, तो ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित हो सकती है. वहीं, दिसंबर में एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना भी चर्चा में बनी हुई है.

Fed के फैसले के बाद भारतीय शेयर बाजार में तेजी

अमेरिकी फेड के फैसले के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए. सुबह करीब 10:30 बजे सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा उछलकर 73,798 के स्तर तक पहुंच गया. वहीं, निफ्टी 50 में 150 अंकों से ज्यादा की बढ़त आई और यह 22,850 के पार कारोबार करने लगा. बाजार में तेजी का असर सिर्फ बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब 0.4% तक की बढ़त दर्ज की गई. शेयर बाजार में इस तेजी को फेड के फैसले से मिली राहत के तौर पर देखा जा सकता है. जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें नहीं बढ़ाता, तो वैश्विक बाजारों को फिलहाल अतिरिक्त सख्ती का सामना नहीं करना पड़ता. इससे निवेशकों की धारणा को सहारा मिल सकता है. हालांकि, केवल ब्याज दरें स्थिर रहने से भारतीय बाजार की सभी मुश्किलें खत्म नहीं हो जातीं. विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड जैसे कारक आगे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

Adani Ports और Power Grid में खरीदारी, Trent का शेयर फिसला

गुरुवार के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला. अडानी पोर्ट्स और पावर ग्रिड के शेयर करीब 3% तक चढ़कर बाजार के प्रमुख गेनर्स में शामिल रहे. इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक, NTPC, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाइटन, हिंदुस्तान यूनिलीवर और ITC के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली. इन शेयरों में करीब 2% तक की बढ़त दर्ज की गई. दूसरी तरफ, बाजार की तेजी के बीच Trent का शेयर दबाव में रहा और करीब 2% तक गिर गया. इससे साफ है कि बाजार में व्यापक खरीदारी के बावजूद सभी शेयरों में एक जैसा रुझान नहीं था. सेक्टर के स्तर पर भी ज्यादातर इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे थे. FMCG, PSU बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टरों में मजबूती रही. हालांकि, निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 0.45% की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE पर भी बाजार का रुख सकारात्मक रहा. उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, 1,809 शेयरों में तेजी थी, जबकि 1,337 शेयर गिरावट में कारोबार कर रहे थे. 105 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.

भारतीय बाजार के सामने अभी कौन-सी चुनौतियां हैं?

फेड के फैसले से बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन भारतीय शेयर बाजार के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, फेड का ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला वैश्विक इक्विटी बाजारों के लिए हल्का सकारात्मक संकेत है. हालांकि, भारत के नजरिए से चुनौतियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं.

उनके मुताबिक, अमेरिकी 10 साल के बॉन्ड की यील्ड करीब 5% के आसपास बनी हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में भी राहत के स्पष्ट संकेत नहीं हैं. ऐसे माहौल में विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार के मुकाबले दूसरे बाजारों में निवेश के अवसर आकर्षक बने रह सकते हैं.

इसके अलावा, सेमीकंडक्टर चिप की कमी लंबे समय तक जारी रहने की खबरों से दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में चिप कंपनियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी कंपनियों पर निवेशकों का ध्यान बढ़ा है. इससे विदेशी निवेश का रुझान AI और उससे जुड़ी कंपनियों की तरफ बना रह सकता है.

भारत के लिए यह अहम इसलिए है, क्योंकि अगर विदेशी निवेशक लगातार दूसरे बाजारों में पैसा लगाते हैं, तो घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी पर दबाव पड़ सकता है. ऐसे में अमेरिकी फेड का फैसला सकारात्मक होने के बावजूद भारतीय बाजार में लगातार तेजी की गारंटी नहीं देता.

विदेशी निवेश की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर

भारतीय बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी चिंता का विषय बनी हुई है. विजयकुमार के मुताबिक, 2026 में अब तक भारत से करीब 31 अरब डॉलर की पूंजी निकलने का आंकड़ा सामने आया है. उनके अनुसार, इतनी बड़ी निकासी का असर देश के व्यापक आर्थिक संकेतकों पर पड़ सकता है.

अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत के व्यापार घाटे और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है. इससे रुपये की कीमत में कमजोरी आने का जोखिम भी बढ़ सकता है.

रुपये में गिरावट का एक असर आयात महंगा होने के रूप में सामने आ सकता है. इससे आयातित महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है. ऐसे में एक तरफ महंगे कच्चे तेल का दबाव और दूसरी तरफ रुपये की कमजोरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं.

इसके साथ ही, इस साल मानसून की भारी कमी को लेकर जताई गई चिंता भी महंगाई के जोखिम को बढ़ा सकती है. अगर खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ता है और कच्चा तेल भी महंगा रहता है, तो महंगाई को नियंत्रित करना और मुश्किल हो सकता है.

इसी पृष्ठभूमि में आगामी बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी LTCG टैक्स में राहत की उम्मीदों पर भी चर्चा बढ़ रही है. हालांकि, यह अभी एक उम्मीद है, किसी घोषित सरकारी फैसले की पुष्टि नहीं.

Nifty के लिए 22,500 से 23,600 तक के स्तर अहम

तकनीकी नजरिए से निफ्टी की अगली चाल पर भी निवेशकों की नजर रहेगी. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स के मुताबिक, फिलहाल बाजार में स्पष्ट दिशा की कमी है और निफ्टी में दोनों तरफ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. उनके आकलन के अनुसार, शुरुआती तौर पर निफ्टी के लिए 22,725 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण रह सकता है. वहीं, 22,840 और 22,500 के स्तर बाजार की चाल को सीमित करने वाले अहम स्तर हो सकते हैं.

अगर निफ्टी में मजबूती बनी रहती है और इंडेक्स 22,660 के नीचे बंद नहीं होता, तो ऊपर की तरफ 23,050 से 23,600 के स्तरों तक जाने की संभावना पर नजर रखी जा सकती है. हालांकि, ये तकनीकी स्तर बाजार की संभावित चाल का आकलन हैं, किसी निश्चित तेजी या गिरावट की गारंटी नहीं. निवेशकों को बाजार की दिशा समझने के लिए इन स्तरों के साथ वैश्विक संकेतों और घरेलू परिस्थितियों पर भी ध्यान देना होगा.

निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत हैं?

अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है, जिससे फिलहाल वैश्विक बाजारों को राहत मिली है. इसी के बाद भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी देखने को मिली. लेकिन फेड के बयान में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती, ऊंची महंगाई और अनिश्चितता का जिक्र यह बताता है कि आगे की मौद्रिक नीति को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार के लिए अहम रहेंगी. वहीं, निफ्टी के 22,500 और 22,660 जैसे स्तरों पर टिके रहने से इसकी आगे की चाल को समझने में मदद मिल सकती है. ऐसे में निवेशकों के लिए सिर्फ एक दिन की तेजी के आधार पर बाजार की दिशा तय करना सही नहीं होगा. आने वाले दिनों में ग्लोबल संकेतों और घरेलू बाजार की चाल के बीच तालमेल पर नजर रखना जरूरी होगा.


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