अमेरिका ने TCS-Infosys समेत 8 कंपनियों को दिया झटका! PERM रोक से कमाई पर पड़ेगा असर ?

चिराग ठाकुर

• 02:34 PM • 09 Oct 2026

अमेरिका ने TCS, Infosys समेत 8 कंपनियों के PERM आवेदनों की प्रोसेसिंग रोकी. जानिए भारतीय IT कंपनियों, कर्मचारियों, Green Card और निवेशकों पर इसका क्या असर हो सकता है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

TCS, Infosys, Wipro, HCLTech समेत 8 कंपनियों के PERM आवेदनों की प्रोसेसिंग रोकी गई

प्रभावित कर्मचारियों की Green Card प्रक्रिया में देरी हो सकती है

Hiring Cost और अनुभवी कर्मचारियों को बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है

अमेरिका में कारोबार करने वाली भारतीय IT कंपनियों के सामने इमिग्रेशन से जुड़ी एक नई चुनौती खड़ी हो गई है. अमेरिकी प्रशासन ने TCS, Infosys, Wipro, HCLTech और Cognizant समेत 8 कंपनियों से जुड़े Green Card आवेदनों की प्रोसेसिंग रोक दी है. इस फैसले के बाद भारतीय कर्मचारियों के अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की योजना और IT कंपनियों की Hiring Strategy पर सवाल उठने लगे हैं.

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हालांकि, इस कार्रवाई का असर समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि अमेरिकी प्रशासन ने किस प्रक्रिया पर रोक लगाई है और इसका दायरा कितना है.

1. अमेरिका ने 8 कंपनियों के PERM आवेदन क्यों रोके?

इस कार्रवाई के दायरे में TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Cognizant, Microsoft, Adobe और Capgemini शामिल हैं. अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े नियमों का गलत इस्तेमाल किया और अमेरिकी कर्मचारियों के मुकाबले कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी.

ये आरोप हैं, किसी कंपनी के दोषी साबित होने का प्रमाण नहीं. कार्रवाई के तहत इन कंपनियों से जुड़े PERM आवेदनों की प्रोसेसिंग रोकी गई है.

PERM क्या है?

PERM यानी Permanent Labor Certification, अमेरिका में कई Employer-Sponsored Green Card मामलों का एक अहम चरण है. इस प्रक्रिया में कंपनी को यह साबित करना होता है कि उसने भर्ती से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन किया है और संबंधित पद के लिए अमेरिकी कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखा है.

PERM खुद Green Card नहीं है, बल्कि उसे हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसकी प्रोसेसिंग रुकने से प्रभावित कर्मचारियों के Green Card आवेदन में देरी हो सकती है.

2. भारतीय कर्मचारियों और IT कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

अमेरिका भारतीय IT कंपनियों के सबसे अहम बाजारों में से एक है. ऐसे में वहां के इमिग्रेशन नियमों में बदलाव कंपनियों की भर्ती, कर्मचारियों को बनाए रखने और लागत से जुड़ी योजनाओं को प्रभावित कर सकता है.

इसके संभावित असर को तीन हिस्सों में समझा जा सकता है:

  • Green Card का इंतजार बढ़ सकता है: जिन कर्मचारियों की प्रक्रिया PERM पर निर्भर है, उन्हें आगे के चरणों के लिए अधिक इंतजार करना पड़ सकता है.

  • अनुभवी कर्मचारियों को बनाए रखने की चुनौती: लंबे समय से अमेरिका में काम कर रहे कुछ कर्मचारी अपनी भविष्य की योजनाओं पर दोबारा विचार कर सकते हैं.

  • Hiring Cost बढ़ने का जोखिम: यदि कंपनियों को अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती बढ़ानी पड़ती है, तो उनकी लागत पर दबाव आ सकता है.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय IT कंपनियों का कारोबार तुरंत प्रभावित होना तय है. TCS ने कहा है कि उसे इस फैसले से अपनी Hiring Strategy या ग्राहकों के साथ कामकाज पर असर पड़ने की उम्मीद नहीं है.

3. IT शेयरों और निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

इस खबर के बीच शुक्रवार को Nifty IT इंडेक्स में 3% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई. TCS, Infosys और Wipro के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली.

लेकिन शेयरों में तेजी को इस बात का संकेत नहीं मानना चाहिए कि अमेरिकी फैसले का कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसका वास्तविक प्रभाव आगे स्पष्ट होगा, जब Hiring Cost और अनुभवी कर्मचारियों को बनाए रखने की चुनौती की तस्वीर सामने आएगी.

निवेशकों को इन बातों पर नजर रखनी चाहिए:

  • कंपनियों के तिमाही नतीजे और नए ऑर्डर.
  • अमेरिकी ग्राहकों के खर्च में होने वाले बदलाव.
  • AI के कारण IT कंपनियों के कारोबार और लागत में आ रहे बदलाव.
  • भर्ती और इमिग्रेशन रणनीति में कंपनियों की ओर से किए जाने वाले बदलाव.
  • किसी शेयर की तेजी या गिरावट की पूरी वजह सिर्फ PERM पर लगी रोक को मानना सही नहीं होगा. कंपनियों की कमाई, कारोबारी प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाएं भी अहम रहेंगी.

H-1B Visa धारकों और अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे युवाओं को क्या समझना चाहिए?

H-1B Visa अमेरिका में नौकरी करने की अनुमति देता है, जबकि Green Card स्थायी रूप से वहां रहने का रास्ता देता है. इसलिए PERM आवेदनों की प्रोसेसिंग रुकने का मतलब यह नहीं है कि सभी H-1B Visa रद्द हो गए हैं या पहले से जारी Green Card अपने आप खत्म हो जाएंगे.

हालांकि, जिन कर्मचारियों की Green Card प्रक्रिया प्रभावित होती है, उन्हें अपने इमिग्रेशन स्टेटस और आगे की समयसीमा पर ध्यान देना चाहिए. H-1B की अवधि बढ़ाने की संभावना व्यक्तिगत मामले और लागू नियमों पर निर्भर करती है.

EB-1A और EB-2 NIW जैसे दूसरे रास्ते भी कुछ योग्य लोगों के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन इनके लिए अलग पात्रता शर्तें होती हैं. इन्हें आसान विकल्प या निश्चित समाधान नहीं समझना चाहिए.

भारत के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी फैसले पर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे दोनों देशों के साझा हितों को फायदा नहीं होगा.

फिलहाल इस कार्रवाई को भारतीय IT सेक्टर के लिए बड़ा झटका कहना जल्दबाजी होगी. आगे का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि रोक कितने समय तक रहती है और कंपनियां अपनी भर्ती तथा इमिग्रेशन रणनीति में क्या बदलाव करती हैं.