Tariff News : अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारतीय Quartz Industry के लिए एक नई चिंता सामने आई है. अमेरिका ने भारत से आने वाले Quartz Surface Products पर Safeguard Tariff लागू किया है. अलग-अलग Products के मामले में Tariff और मौजूदा Duty को मिलाकर कुल बोझ 55 फीसदी तक पहुंच सकता है. इस फैसले का असर उन भारतीय Exporters पर पड़ सकता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर है.
ADVERTISEMENT
15 अगस्त से लागू हुआ नया टैरिफ
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 15 अगस्त 2026 से Quartz Surface Products पर नया Safeguard Tariff लागू किया है. इसके तहत तय सीमा के अंदर अमेरिका पहुंचने वाले कुछ Imports पर अतिरिक्त 25 फीसदी Duty लगेगी, जबकि तय सीमा से ज्यादा माल भेजे जाने पर अतिरिक्त Tariff 50 फीसदी तक हो सकता है. कुछ Glass Products पर पहले से लागू Duty को भी इसमें जोड़ दिया जाए, तो कुल Tariff Burden 55 फीसदी तक पहुंच सकता है. यह व्यवस्था चार साल तक लागू रहने वाली है. यानी इसका असर 15 अगस्त 2026 से 14 अगस्त 2030 तक रह सकता है.
Quartz Surface Products क्या होते हैं?
आसान भाषा में समझें तो ये ऐसे इंजीनियर्ड स्टोन स्लैब होते हैं, जो देखने में प्राकृतिक पत्थर जैसे लगते हैं, लेकिन इन्हें Factory में तैयार किया जाता है. इन्हें बनाने के लिए Quartz के छोटे-छोटे टुकड़ों को रेज़िन, पिगमेंटऔर दूसरी सामग्री के साथ मिलाया जाता है. इस मिश्रण को दबाकर और फिर पोलिश करके बड़े और मजबूत स्लैब तैयार किए जाते हैं. इनका इस्तेमाल घरों और व्यावसायिक इमारतें में बड़े पैमाने पर होता है. किचन काउंटरटॉप्स, बाथरूम वैनिटी, फ्लोरिंग और दीवारों की क्लैडिंग में इनका इस्तेमाल किया जाता है. इन उत्पादों की सतह चिकनी होती है और इन्हें साफ करना भी आसान होता है. भारत में इस इंडस्ट्री की मैन्युफैक्चरिंग मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और तेलंगाना में होती है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक में भी इन प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मौजूद है।
अमेरिका भारतीय Quartz Industry के लिए क्यों अहम है?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता अमेरिका के साथ भारत के क्वार्ट्ज एक्सपोर्ट को लेकर है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के क्वार्ट्ज सरफेस प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट में अमेरिका की तरफ करीब 72.5 फीसदी रही। इस दौरान भारत ने अमेरिका को करीब 23.33 करोड़ डॉलर यानी लगभग 1,900 करोड़ रुपये से ज्यादा के क्वार्ट्ज और इससे जुड़े सरफेस प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए। इस आंकड़े से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अमेरिकी बाजार भारतीय क्वार्ट्ज निर्यातकों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। अगर अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर ड्यूटी बढ़ती है, तो निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है और अमेरिकी बाजार में उनके उत्पादों की कीमत पर भी असर पड़ सकता है।
भारत ने WTO का रुख क्यों किया?
अमेरिका के इस फैसले के खिलाफ भारत ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन यानी WTO का रुख किया है। भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत की मांग की है, ताकि इस सेफगार्ड मेज़र से जुड़े अपने ट्रेजरी हितों और भारतीय एक्सपोर्टर्स के हितों की रक्षा की जा सके। बातचीत के दौरान भारत इस बात पर सवाल उठा सकता है कि अमेरिका ने इम्पोर्ट्स में बढ़ोतरी और डोमेस्टिक इंडस्ट्री को हुए नुकसान को किस आधार पर तय किया है। इसके अलावा भारत टैरिफ की व्यवस्था, तय इम्पोर्ट सीमा और अलग-अलग देशों के लिए किए गए प्रावधानों पर भी चर्चा कर सकता है। भारत का मकसद बातचीत के ज़रिए अपने एक्सपोर्टर्स के लिए राहत, छूट या बेहतर व्यवस्था हासिल करना हो सकता है।
चार साल तक रहेगा असर
सेफगार्ड टैरिफ की सबसे बड़ी चिंता इसकी अवधि भी है। यह व्यवस्था चार साल तक लागू रहने वाली है। यानी भारतीय निर्यातकों को अगर अमेरिकी बाजार में यह अतिरिक्त ड्यूटी चुकानी पड़ती है, तो इसका असर लंबे समय तक उनके कारोबार पर रह सकता है। हालांकि, भारत ने WTO में बातचीत शुरू कर दी है और अब आगे की स्थिति इसी बातचीत पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
भारतीय Exporters के लिए आगे की चुनौती
कुल मिलाकर अमेरिका का नया सेफगार्ड टैरिफ भारतीय क्वार्ट्ज इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। खासकर इसलिए क्योंकि भारत के क्वार्ट्ज सरफेस प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट में अमेरिका की तरफ काफी बड़ी है। अगर टैरिफ का पूरा बोझ एक्सपोर्टर्स पर आता है, तो कंपनियों को अपनी लागत, कीमत और अमेरिकी बाजार में कॉम्पिटिशन को लेकर नई रणनीति बनाई पड़ सकती है। वहीं अगर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत से कोई राहत मिलती है, तो भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए दबाव कुछ कम हो सकता है। अब सबसे बड़ी नजर WTO में होने वाली बातचीत पर रहेगी। यही तय करेगा कि भारतीय क्वार्ट्ज एक्सपोर्टर्स को अमेरिकी बाजार में इस नए टैरिफ के बीच कितनी राहत मिल पाती है।
अमेरिका भारत पर ठोकेगा 100% Tariff, Senate में बिल हुआ पास !
ADVERTISEMENT

