अमेरिकी शेयर बाजार में हाहाकार! नैस्डैक 5.54% टूटा, निवेशकों के डूबे 2.5 ट्रिलियन डॉलर

सौरभ दीक्षित

• 12:28 PM • 06 Nov 2026

अमेरिकी शेयर बाजार में गुरुवार को ऐसी भारी बिकवाली हुई कि निवेशकों के करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर डूब गए. नैस्डैक कारोबार के दौरान 6.4 फीसदी तक गिरा और अंत में 5.54 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ.

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सोचिए... सुबह आप अपना पोर्टफोलियो खोलें और पता चले कि एक ही दिन में बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आ गई कि आपकी सालभर की कमाई पर पानी फिर गया. अमेरिका के शेयर बाजार में गुरुवार को कुछ ऐसा ही हुआ. वहां ऐसी बिकवाली हुई कि दुनिया भर के निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं.

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अमेरिकी टेक शेयरों में सबसे ज्यादा मार पड़ी. नैस्डैक में कारोबार के दौरान करीब 6.4 फीसदी तक गिरावट आ गई. यह 2020 में कोरोना महामारी के दौर के बाद नैस्डैक में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट बताई जा रही है. हालांकि, कारोबार खत्म होने पर यह 5.54 फीसदी नीचे बंद हुआ. इस भारी गिरावट के कारण निवेशकों की करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर की दौलत साफ हो गई.

यानी अमेरिकी बाजार में एक ही दिन में इतनी बड़ी रकम का नुकसान हुआ, जिसका असर दुनिया के दूसरे शेयर बाजारों पर भी दिखाई देने लगा. आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि अमेरिका का शेयर बाजार धड़ाम हो गया? और क्या इस गिरावट की आंच भारतीय निवेशकों तक भी पहुंच सकती है? आइए समझते हैं.

नैस्डैक 10 फीसदी नीचे, टेक शेयरों में सबसे ज्यादा मार

गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार में बिकवाली का सबसे ज्यादा दबाव टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला. नैस्डैक अपने 6 अक्टूबर के उच्चतम स्तर से करीब 10 फीसदी नीचे आ चुका है.

इस गिरावट के साथ ही अमेरिकी बाजार के दूसरे बड़े इंडेक्स S&P 500 और Dow Jones भी बुरी तरह टूटे. दोनों ने अप्रैल 2025 के बाद अपनी सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट दर्ज की.

अमेरिका में आई इस बिकवाली का असर दूसरे देशों के बाजारों पर भी पड़ा. दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार खुलते ही करीब 9 फीसदी तक गिर गया. हालात ऐसे बने कि वहां के KOSPI इंडेक्स में करीब 20 मिनट के लिए कारोबार रोकना पड़ा.

यह दिखाता है कि अमेरिका के बाजार में होने वाली हलचल का असर दुनिया भर के निवेशकों पर कितना गहरा पड़ सकता है.

अमेरिकी बाजार में गिरावट की वजह क्या है?

इस गिरावट के पीछे एक बड़ी वजह अमेरिका में हाल ही में हुए मध्यावधि चुनावों के नतीजे बताए जा रहे हैं. इन चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ी जीत मिली है.

निवेशकों को आशंका है कि संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर रोक-टोक बढ़ सकती है. खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सेक्टर में हो रहे भारी निवेश पर इसका असर पड़ सकता है.

पिछले कुछ समय से अमेरिका में AI को लेकर बड़ी-बड़ी कंपनियां अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं. इसके लिए बड़े डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं. इन डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली, जमीन और दूसरे संसाधनों की जरूरत होती है.

लेकिन अमेरिका के कई इलाकों में डेटा सेंटर बनाने के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है. चुनावों में डेमोक्रेट्स ने ऐसे कई राज्यों में भी जीत हासिल की है, जहां डेटा सेंटर परियोजनाओं को लेकर विरोध देखने को मिल रहा है.

अब निवेशकों को डर है कि नई राजनीतिक परिस्थितियों में AI कंपनियों के लिए नए प्रोजेक्ट शुरू करना और तेजी से विस्तार करना मुश्किल हो सकता है. इसी आशंका के चलते टेक शेयरों में जमकर बिकवाली हुई.

ट्रंप ने गिरावट के लिए डेमोक्रेट्स को ठहराया जिम्मेदार

शेयर बाजार में इस भारी गिरावट के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर निशाना साधा.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि चुनाव नतीजों के बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई है. उन्होंने इसे इतिहास की बड़ी गिरावटों में से एक बताया और कहा कि बाजार को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए काफी मेहनत की गई थी.

ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों की रिटायरमेंट बचत का जिक्र करते हुए कहा कि उनका 401(k) भी गिर गया है. उन्होंने इसके लिए रिपब्लिकन पार्टी के बजाय डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया.

अब समझते हैं कि आखिर यह 401(k) क्या है?

क्या है अमेरिका की 401(k) रिटायरमेंट स्कीम?

अमेरिका में 401(k) एक तरह की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है. इसे कंपनियां अपने कर्मचारियों को उपलब्ध कराती हैं.

इस स्कीम में कर्मचारी अपनी सैलरी का एक हिस्सा बचाकर निवेश कर सकते हैं. यह पैसा टैक्स कटने से पहले या टैक्स कटने के बाद भी जमा किया जा सकता है. कई मामलों में कंपनी भी कर्मचारी की बचत के साथ कुछ रकम जोड़ती है.

इस स्कीम का नाम अमेरिकी कानून Internal Revenue Code के सेक्शन 401(k) के नाम पर रखा गया है.

आसान भाषा में समझें तो जैसे भारत में लोग रिटायरमेंट के लिए EPF या दूसरी बचत योजनाओं में पैसा जमा करते हैं, वैसे ही अमेरिका में बड़ी संख्या में कर्मचारी 401(k) के जरिए रिटायरमेंट के लिए निवेश करते हैं. इस रकम का एक हिस्सा शेयर बाजार जैसे निवेश विकल्पों में लगाया जा सकता है. इसलिए जब बाजार गिरता है, तो इन खातों में निवेश की वैल्यू भी घट सकती है.

Nvidia को झटका, सालभर की कमाई साफ

इस बिकवाली में AI से जुड़ी कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. दुनिया की बड़ी चिप निर्माता कंपनी Nvidia का शेयर 9.3 फीसदी तक टूट गया.

इस गिरावट के साथ Nvidia ने इस साल अब तक शेयर में हुई पूरी बढ़त गंवा दी. यानी जिस कमाई को निवेशकों ने कई महीनों में बनाया था, वह एक ही दिन की गिरावट में मिट गई.

एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी Tesla के शेयरों में भी करीब 11 फीसदी की गिरावट आई. वहीं SpaceX से जुड़ी कंपनी के शेयरों में करीब 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

AI सेक्टर को लेकर बढ़ती चिंता का असर इन कंपनियों पर भी पड़ा है. निवेशकों को डर है कि अगर डेटा सेंटर और AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर खर्च धीमा हुआ, तो इन कंपनियों की भविष्य की कमाई पर असर पड़ सकता है.

क्या बाजार में गिरावट अभी और बढ़ेगी?

फिलहाल अमेरिकी शेयर बाजार में आई इस गिरावट ने दुनिया भर के निवेशकों को सतर्क कर दिया है. खास तौर पर टेक्नोलॉजी और AI कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी AI निवेश पर रोक लगने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. फिलहाल बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह निवेशकों की आशंका और राजनीतिक बदलावों को लेकर अनिश्चितता है.

बुधवार को अमेरिकी बाजार में तेजी आई थी, लेकिन गुरुवार की बिकवाली ने उस बढ़त को काफी हद तक मिटा दिया. अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई राजनीतिक परिस्थितियों में AI सेक्टर से जुड़ी नीतियां किस दिशा में जाती हैं और बड़ी टेक कंपनियां अपने निवेश की योजनाओं को कैसे आगे बढ़ाती हैं.

कुल मिलाकर, अमेरिकी बाजार में आई यह गिरावट सिर्फ कुछ कंपनियों के शेयर टूटने की कहानी नहीं है. यह AI में हो रहे भारी निवेश, अमेरिकी राजनीति और दुनिया भर के निवेशकों की उम्मीदों से जुड़ा मामला है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक दिन की घबराहट है या अमेरिकी टेक शेयरों में बड़ी गिरावट का नया दौर शुरू हो रहा है.