अमेरिकी शेयर बाजार में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली. Nasdaq 100 करीब 1.6 फीसदी तक टूट गया, जबकि S&P 500 की मार्केट वैल्यू में करीब 700 अरब डॉलर यानी लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई. टेक और AI से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला.सवाल है कि आखिर अमेरिकी बाजार में इतनी बड़ी बिकवाली क्यों आई और क्या इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है?
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टेक और AI शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
सोमवार की बिकवाली का सबसे ज्यादा असर टेक और AI से जुड़े शेयरों पर दिखाई दिया. मेटा करीब 3.83 फीसदी टूटा, जबकि AMD में 3.14 फीसदी और Micron में 2.92 फीसदी की गिरावट रही. AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनी Oracle का शेयर भी करीब 2.45 फीसदी नीचे आया.वहीं बड़े टेक शेयरों में Google 1.08 फीसदी, Microsoft 1.31 फीसदी और Amazon 1.41 फीसदी नीचे रहे. इससे साफ है कि बिकवाली सिर्फ कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अमेरिकी टेक मार्केट के बड़े हिस्से में दबाव देखने को मिला.
महंगा Crude Oil बना बड़ी वजह
बाजार में चिंता बढ़ाने वाली प्रमुख वजहों में से एक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही. सोमवार के बाजार आंकड़ों के मुताबिक WTI क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल, जबकि Brent क्रूड करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. कच्चा तेल महंगा होने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है. अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है. यहीं से ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ती है. महंगाई ज्यादा रहने पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है.
बॉन्ड यील्ड में तेजी से बढ़ी चिंता
अमेरिकी बाजार पर दूसरा बड़ा दबाव बॉन्ड यील्ड में तेजी से आया. 10 साल की ट्रेजरी यील्ड करीब 5.26 फीसदी, जबकि 30 साल की यील्ड करीब 5.57 फीसदी तक पहुंच गई. बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए बॉन्ड जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. साथ ही भविष्य में कंपनियों से मिलने वाली कमाई की मौजूदा वैल्यू कम हो जाती है. इसका असर खास तौर पर उन कंपनियों पर ज्यादा पड़ता है जिनकी वैल्यूएशन भविष्य की तेज ग्रोथ की उम्मीदों पर टिकी होती है. अमेरिकी बाजार में टेक और AI सेक्टर की कई कंपनियां इसी कैटेगरी में आती हैं.
AI शेयरों में क्यों बढ़ी बिकवाली?
पिछले कुछ समय में AI से जुड़े शेयरों में तेज तेजी देखने को मिली थी. निवेशकों को AI स्पैंडिंग और इससे होने वाली कमाई में तेज ग्रोथ की उम्मीद थी. लेकिन जब ब्याज दरों और महंगे तेल को लेकर चिंता बढ़ी तो निवेशकों ने हाई-ग्रोथ शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी. AMD, Micron और Oracle जैसे शेयरों पर इसका ज्यादा असर दिखाई दिया.
Nvidia रहा बाजार का बड़ा अपवाद
अमेरिकी टेक शेयरों में व्यापक गिरावट के बीच Nvidia का शेयर करीब 2.34 फीसदी चढ़ा. Nvidia ने शेयर बायबैक के लिए अतिरिक्त 150 अरब डॉलर की मंजूरी दी है. इसके साथ कंपनी का कुल शेयर बायबैक authorization करीब 235 अरब डॉलर हो गया है. यानी जहां ज्यादातर बड़े टेक शेयरों में बिकवाली हुई, वहीं Nvidia इस ट्रेंड से अलग नजर आया.
भारत पर असर?
अब सबसे बड़ा सवाल है कि अमेरिकी बाजार में आई इस गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर कितना पड़ सकता है? अमेरिकी बाजार में बड़ी गिरावट का असर ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ सकता है. खासकर अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स पर भी दबाव देखने को मिल सकता है. भारत के लिए महंगा कच्चा तेल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. तेल की कीमत बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव आ सकता है. इसके अलावा विदेशी निवेशक अमेरिकी बाजार में मिलने वाले रिटर्न और भारत जैसे दूसरे बाजारों में निवेश के बीच संतुलन देखते हैं. ऐसे में अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड लगातार ऊंची रहती है तो इमर्जिंग मार्केट्स में विदेशी निवेश के फ्लो पर भी असर पड़ सकता है.
अब बाजार की नजर किन चीजों पर?
पहली, कच्चे तेल की कीमत. अगर क्रूड लगातार महंगा रहता है तो महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है. दूसरी, US Treasury yields. यील्ड में लगातार तेजी टेक और हाई-वैल्यूएशन शेयरों पर दबाव बढ़ा सकती है. तीसरी, US Federal Reserve का रुख. निवेशक यह देखेंगे कि महंगाई और आर्थिक हालात को देखते हुए फेड ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है. कुल मिलाकर अमेरिकी बाजार की इस गिरावट के पीछे सिर्फ टेक शेयरों में बिकवाली नहीं है. महंगा तेल, बढ़ती Treasury yields और geopolitical tensions ने मिलकर निवेशकों की चिंता बढ़ाई है.अब देखना होगा कि यह दबाव सिर्फ एक दिन की मुनाफावसूली तक सीमित रहता है या अमेरिकी बाजार में निवेशकों के risk appetite में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है.
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