अमेरिका के नए टैरिफ फैसले ने भारतीय एक्सपोर्ट सेक्टर को लेकर नई बहस शुरू कर दी है. पहली नजर में यह कदम भारत के लिए बड़ा झटका नजर आता है, लेकिन पूरी तस्वीर देखें तो कहानी इतनी सीधी नहीं है. ट्रंप प्रशासन के इस फैसले में भारत को कुछ राहत मिली है, वहीं कुछ सेक्टरों के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं.
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अमेरिका ने भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, लेकिन इसी फैसले में भारत को चीन, रूस और ब्राजील जैसे देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति भी मिली है. वहीं दूसरी तरफ Textile Sector में भारत को बांग्लादेश और कुछ अन्य एशियाई देशों से कड़ी चुनौती मिल सकती है.
भारत को 12.5% की जगह लगा 10% टैरिफ
अमेरिका ने Section 301 के तहत कई देशों की जांच की थी. इस जांच का आधार Forced Labour से जुड़े नियम थे. अमेरिका का कहना था कि कुछ देश ऐसे सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे, जो जबरन मजदूरी के जरिए तैयार किए जाते हैं. शुरुआत में भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी थी. लेकिन भारत ने Forced Labour से जुड़े नियमों को सख्त किया, अपनी Foreign Trade Policy में बदलाव किए और अमेरिका के साथ लगातार बातचीत जारी रखी.
इसके बाद अमेरिका ने भारत को 12.5% वाले टैरिफ ग्रुप से हटाकर 10% वाले Lower Tariff Tier में रखा. भले ही 2.5% का अंतर छोटा नजर आता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में यह अंतर काफी अहम होता है. एक्सपोर्टर्स के लिए टैरिफ का छोटा बदलाव भी कीमतों, ऑर्डर और प्रतिस्पर्धा पर बड़ा असर डाल सकता है.
चीन, रूस और ब्राजील जैसे देशों के मुकाबले भारत को बढ़त
अमेरिका के इस फैसले में भारत को एक रणनीतिक बढ़त मिली है. चीन, रूस, ब्राजील समेत करीब 38 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है, जबकि भारत पर यह दर 10% रखी गई है.
इसका मतलब है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियां अपने कुछ प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले थोड़ी बेहतर स्थिति में रह सकती हैं. कई अमेरिकी खरीदारों के लिए अब भारत से सामान खरीदना तुलनात्मक रूप से ज्यादा आकर्षक हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां कीमत और सप्लाई चेन की स्थिरता अहम भूमिका निभाती है.
45% भारतीय Export पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त टैरिफ का असर
भारत के लिए एक बड़ी राहत यह है कि अमेरिका को होने वाले करीब 45% Export पर इस अतिरिक्त 10% टैरिफ का असर नहीं पड़ेगा. इसमें Generic Medicines, Smartphones और कुछ Electronics Products शामिल हैं. इन सेक्टरों के लिए फिलहाल अतिरिक्त टैरिफ की चिंता नहीं है.इसके अलावा Steel, Aluminium और Auto Parts जैसे उत्पाद भी इस नए टैरिफ के दायरे से बाहर रखे गए हैं, क्योंकि ये पहले से ही अलग टैरिफ व्यवस्था के तहत आते हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के सभी एक्सपोर्ट पूरी तरह सुरक्षित हैं. भारत के बाकी करीब 55% Export पर इस अतिरिक्त शुल्क का असर देखने को मिल सकता है.
Textile Sector के लिए बढ़ी चुनौती
इस पूरे फैसले में सबसे बड़ा झटका भारतीय Textile Industry को लगा है.भारत अमेरिका को हर साल करीब 11 अरब डॉलर का Textile और Apparel Export करता है. अमेरिका भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है. लेकिन इस बार अमेरिका ने Bangladesh, Cambodia, Indonesia और Malaysia को Textile Tariff Rate Quota यानी TRQ की सुविधा दी है. इस व्यवस्था के तहत अगर ये देश अमेरिकी Cotton और Fibre का इस्तेमाल करके कपड़े तैयार करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त टैरिफ से छूट मिल सकती है.
भारत को यह सुविधा नहीं मिली है. यही वजह है कि भारतीय Textile कंपनियों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका है. अमेरिकी खरीदारों के लिए कुछ मामलों में बांग्लादेश और दूसरे एशियाई देशों से सामान खरीदना ज्यादा किफायती हो सकता है.
बांग्लादेश को मिल सकता है फायदा
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा बांग्लादेश जैसे देशों को मिल सकता है. बांग्लादेश पहले से ही अमेरिका को बड़े पैमाने पर Garment Export करता है. अगर उसे अतिरिक्त टैरिफ से राहत मिलती है, तो वह अमेरिकी बाजार में भारत के मुकाबले मजबूत स्थिति बना सकता है.
इसका असर सिर्फ तैयार कपड़ों तक सीमित नहीं रह सकता. भारत बांग्लादेश को Cotton, Yarn और Fabric जैसे उत्पाद भी सप्लाई करता है. अगर बांग्लादेश अमेरिकी Cotton का इस्तेमाल बढ़ाता है, तो भारतीय Textile Value Chain पर भी दबाव बढ़ सकता है.
अभी बातचीत का रास्ता खुला
हालांकि भारत के लिए पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है. Textile से जुड़ी यह व्यवस्था अभी पूरी तरह लागू नहीं हुई है. भारत सरकार इस मुद्दे को भारत-अमेरिका Bilateral Trade Agreement यानी BTA की बातचीत में उठा रही है. अगर दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता जल्द पूरा होता है, तो भारत को Textile समेत कई क्षेत्रों में राहत मिल सकती है.
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह खबर हर सेक्टर पर एक जैसा असर नहीं डालेगी. Pharma, Smartphones और Electronics जैसे सेक्टर फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित नजर आ रहे हैं, क्योंकि इन पर अतिरिक्त टैरिफ का सीधा असर नहीं पड़ेगा.
वहीं दूसरी तरफ Textile, Leather, Chemicals, Machinery, Furniture, Plastics और Gems & Jewellery जैसे Export-Oriented सेक्टरों पर दबाव बढ़ सकता है. Global Trade Research Initiative यानी GTRI के अनुमान के मुताबिक भारत के अमेरिका को होने वाले करीब 70% Export किसी न किसी रूप में इस नए टैरिफ के असर को महसूस कर सकते हैं. ऐसे में निवेशकों को Export आधारित कंपनियों के ऑर्डर बुक, मार्जिन और मैनेजमेंट की भविष्य की रणनीति पर नजर रखनी होगी.
भारत के लिए राहत और चुनौती दोनों
कुल मिलाकर अमेरिका का नया टैरिफ फैसला भारत के लिए न पूरी तरह नुकसान है और न पूरी तरह फायदा. एक तरफ भारत को अपने कई बड़े प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर टैरिफ स्थिति मिली है. दूसरी तरफ Textile Sector में बांग्लादेश और दूसरे एशियाई देशों को मिली राहत भारत के लिए नई चुनौती बन सकती है. अब इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका भारत-अमेरिका Bilateral Trade Agreement की होगी. अगर दोनों देश जल्द किसी समझौते पर पहुंचते हैं, तो मौजूदा चुनौती भारत के लिए एक नए अवसर में बदल सकती है.
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