शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच 2 जुलाई को तेजी का माहौल दिखा. दोपहर साढ़े 12 बजे निफ्टी 50 119 अंक चढ़कर 24,127 पर था, जबकि सेंसेक्स 77,315 पर कारोबार कर रहा था. इसी बीच वेदांता लिमिटेड के कारोबार के बंटवारे के बाद अलग हुई नई कंपनियों के शेयरों में तेज खरीदारी देखी गई.
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बाजार जानकारों के मुताबिक इस तेजी की बड़ी वजह यह रही कि डिमर्जर के बाद बनी कंपनियों के शेयर अब टी2टी सेगमेंट से बाहर आ गए हैं. इसके बाद इनमें इंट्राडे ट्रेडिंग शुरू हो गई, जिससे खरीद-बिक्री, कारोबार की मात्रा और बाजार में भागीदारी बढ़ी. जानकारों ने यह भी कहा कि तेज रैली के बाद जल्दबाजी में खरीदारी से बचना चाहिए.
अचानक तेजी क्यों आई
वेदांता लिमिटेड के कारोबार के बंटवारे के बाद बनी चार नई कंपनियां 15 जून 2026 को शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थीं. लिस्टिंग के बाद नियमों के तहत इन शेयरों को शुरुआती 10 ट्रेडिंग सेशन के लिए टी2टी सेगमेंट में रखा गया था.
टी2टी सेगमेंट में केवल डिलीवरी आधारित खरीद-बिक्री की इजाजत होती है. यानी निवेशक उसी दिन शेयर खरीदकर बेच नहीं सकते. इस वजह से कारोबार सीमित रहता है और शेयरों में हलचल भी कम दिखती है.
अब यह अवधि खत्म होने के बाद ये शेयर सामान्य ट्रेडिंग श्रेणी में आ गए हैं. इसके साथ इंट्राडे ट्रेडिंग शुरू हुई और खरीद-बिक्री तेजी से बढ़ी. यही बदलाव शेयरों की कीमतों में तेज उछाल की एक बड़ी वजह माना जा रहा है.
किस शेयर में कितनी तेजी रही
- वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड के शेयर में 20 प्रतिशत का अपर सर्किट लगा और यह 38.76 रुपये पर बंद हुआ.
- वेदांता पावर लिमिटेड का शेयर कारोबार के दौरान 17 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 47.20 रुपये तक गया. बाद में मुनाफावसूली आई और यह 44.25 रुपये पर बंद हुआ. फिर भी दिन भर में करीब 10 प्रतिशत की बढ़त रही.
- वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड में भी 10 प्रतिशत का अपर सर्किट लगा और शेयर 38.77 रुपये पर बंद हुआ.
- वेदांता एल्यूमिनियम मेटल लिमिटेड में बाकी कंपनियों के मुकाबले सीमित तेजी रही और यह करीब 0.36 प्रतिशत बढ़कर 452 रुपये के आसपास बंद हुआ.
मूल कंपनी पर दबाव
जहां नई कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी, वहीं वेदांता लिमिटेड के शेयर दबाव में रहे. कारोबार के अंत तक यह शेयर करीब 1.9 प्रतिशत गिरकर 275.50 रुपये पर बंद हुआ. बाजार जानकारों का कहना है कि डिमर्जर के बाद निवेशकों का फोकस फिलहाल नई कंपनियों पर ज्यादा है.
टी2टी सेगमेंट क्या होता है.
टी2टी सेगमेंट का इस्तेमाल आमतौर पर उन शेयरों के लिए किया जाता है, जिनमें ज्यादा उतार-चढ़ाव को काबू में रखना जरूरी माना जाता है. इस सेगमेंट में हर खरीद के बदले असली डिलीवरी लेनी होती है. साथ ही, ऐसे शेयरों पर कम सर्किट सीमा भी लागू रहती है.
जब कोई शेयर इस सेगमेंट से बाहर आता है, तो उसमें इंट्राडे ट्रेडिंग शुरू हो जाती है. इससे कारोबार की मात्रा, नकदी की उपलब्धता और निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है.
निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं
बाजार जानकारों के मुताबिक वेदांता डिमर्जर के बाद बनी कंपनियों को लेकर उत्साह मजबूत है, लेकिन एक ही दिन की तेज बढ़त के बाद जोखिम भी बढ़ जाता है. उनका कहना है कि सिर्फ तेजी देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए, क्योंकि तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली भी आ सकती है.
अगर कोई निवेशक इन शेयरों पर नजर रख रहा है, तो उसे कंपनी के कारोबार, वित्तीय हालत, आगे की संभावना और अपने निवेश लक्ष्य को देखना चाहिए. जानकारों की सलाह है कि ऊंचे स्तर पर जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय कीमतों में ठहराव या संभावित गिरावट का इंतजार करना बेहतर हो सकता है.
कुल मिलाकर, 2 जुलाई को वेदांता समूह की नई सूचीबद्ध कंपनियों में तेजी की सबसे बड़ी वजह टी2टी सेगमेंट से बाहर आना और इंट्राडे ट्रेडिंग की शुरुआत रही. नई कंपनियों के शेयरों में जोश दिखा, जबकि मूल कंपनी वेदांता लिमिटेड दबाव में रही. बाजार जानकारों ने साफ कहा है कि तेजी के बीच मौके हैं, लेकिन जोखिम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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