Vedanta Ltd से अलग होने के बाद Vedanta Oil & Gas ने बाजार का ध्यान तेजी से खींचा है. अलग लिस्टिंग के बाद शेयर में मजबूत तेजी दिखी है और अब निवेशकों के बीच यह चर्चा है कि क्या यह सिर्फ शुरुआती उत्साह है या लंबे समय की कहानी बन सकती है.कंपनी का कारोबार कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन से जुड़ा है. पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट, उत्पादन बढ़ाने की योजना और लागत पर नियंत्रण की कोशिशों ने इस शेयर को चर्चा में रखा है.
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शेयर की परफॉर्मेंस
8 जुलाई को शेयर 2 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ. बीते 1 हफ्ते में ये शेयर 13 फीसदी से ज्यादा उछला है. Vedanta Ltd के डिमर्जर के बाद Vedanta Oil & Gas को अलग इकाई के रूप में बाजार में लाया गया. अलग लिस्टिंग के बाद इस शेयर में निवेशकों की अच्छी दिलचस्पी देखने को मिली. निवेशकों का मानना है कि पहले Vedanta Ltd. के अंदर Oil & Gas बिजनेस की असली वैल्यू सामने नहीं आ पा रही थी क्योंकि कंपनी के अंदर Aluminium, Zinc, Iron Ore, Power और दूसरे कारोबार भी शामिल थे. अब अलग कंपनी बनने के बाद निवेशकों को केवल Oil & Gas बिजनेस में निवेश करने का मौका मिला है। यही वजह है कि शुरुआती कारोबार में शेयर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
कंपनी क्या करती है
ये कंपनी जमीन के नीचे मौजूद कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस निकालती है. इसके बाद इन्हें रिफाइनरी और गैस कंपनियों को बेचा जाता है. यहीं से कंपनी की कमाई आती है.भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है. ऐसे में देश के भीतर तेल और गैस का उत्पादन बढ़ने पर आयात का दबाव कम हो सकता है. कंपनी के लिए यही एक बड़ा अवसर माना जा रहा है.
कमाई कैसे होती है
कंपनी की कमाई मुख्य रूप से तीन स्रोतों से आती है
- कच्चे तेल की बिक्री
- प्राकृतिक गैस की बिक्री
- नए ऑयल ब्लॉक्स के विकास से होने वाली आय
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें मजबूत रहती हैं तो कंपनी की कमाई बढ़ सकती है.हालांकि यदि तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आती है तो इसका सीधा असर कंपनी की आय और मुनाफे पर पड़ सकता है.यानी यह बिजनेस पूरी तरह कमोडिटी साइकिल से जुड़ा हुआ है.
कंपनी की सबसे बड़ी ताकत
- Vedanta Oil & Gas की सबसे बड़ी ताकत इसकी मजबूत एसेट क्वालिटी है
- राजस्थान के ऑयल फील्ड देश के सबसे उत्पादक क्षेत्रों में गिने जाते हैं
- इसके अलावा कंपनी के पास पहले से विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है
नई कंपनियों को जहां शुरुआत से निवेश करना पड़ता है, वहीं Vedanta Oil & Gas के पास पाइपलाइन, प्रोसेसिंग फैसिलिटी और उत्पादन नेटवर्क पहले से मौजूद है।कंपनी लगातार नई टेक्नोलॉजी के जरिए पुराने कुओं से भी ज्यादा उत्पादन निकालने की कोशिश कर रही है. अगर इसमें सफलता मिलती है तो आने वाले वर्षों में उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं.
जोखिम भी समझिए
हर निवेश के साथ जोखिम भी जुड़े होते हैं.
- Vedanta Oil & Gas के लिए सबसे बड़ा जोखिम अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतें हैं. अगर ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट आती है तो कंपनी की आय प्रभावित हो सकती है
- दूसरा जोखिम सरकारी नीतियों से जुड़ा है. ऑयल और गैस सेक्टर में रॉयल्टी, टैक्स और रेगुलेटरी बदलाव का असर भी कंपनी पर पड़ सकता है
- तीसरा जोखिम ये है कि अगर नए ऑयल ब्लॉक्स में उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं बढ़ता तो ग्रोथ की रफ्तार धीमी हो सकती है
एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?
कई ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि डिमर्जर के बाद इस कारोबार की असली कीमत अब सामने आ सकती है. उनका कहना है कि पहले ऑयल एंड गैस कारोबार दूसरे कारोबारों के बीच दबा हुआ था. अब निवेशक इसे अलग नजर से देख पाएंगे. वहीं दूसरी तरफ ये सलाह भी दी जा रही है कि सिर्फ शेयर की तेजी देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. जानकारों के अनुसार, आने वाली तिमाहियों में उत्पादन, नकदी और लागत की स्थिति देखना ज्यादा जरूरी होगा. अगर ये तीनों मोर्चे मजबूत रहते हैं, तो लंबी अवधि की ग्रोथ की कहानी बन सकती है.
निवेशकों के लिए अहम बात
लंबी अवधि के निवेशक के लिए सिर्फ तेजी देखना काफी नहीं है. यह देखना जरूरी है कि कंपनी उत्पादन कितना बढ़ा रही है, कमाई कैसी बढ़ रही है, नकदी कितनी मजबूत है और मौजूदा भाव पर शेयर कितना आकर्षक दिखता है. कुल मिलाकर, डिमर्जर ने वेदांता ऑयल एंड गैस को अलग पहचान दी है. देश में ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, घरेलू उत्पादन पर जोर है और कंपनी के पास मजबूत संपत्तियां हैं. लेकिन तेल की कीमतों और उत्पादन से जुड़े जोखिम भी साथ हैं. इसलिए इस शेयर में मौका भी है और सावधानी की जरूरत भी.
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