Tata Trusts में इन दिनों वेणु श्रीनिवासन का नाम चर्चा में है. लेकिन आखिर वेणु श्रीनिवासन कौन हैं और टाटा ग्रुप से उनका रिश्ता इतना अहम कैसे हो गया?वेणु श्रीनिवासन देश के बड़े कारोबारी परिवारों में से एक TVS Group से आते हैं. वह लंबे समय तक TVS ग्रुप के कारोबार की कमान संभाल चुके हैं और पिछले करीब एक दशक से टाटा संस और टाटा ट्रस्ट की गवर्नेंस में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि टाटा में उनकी एंट्री रतन टाटा के दौर में हुई थी. इसके बाद टाटा संस के बोर्ड से लेकर टाटा ट्रस्ट तक उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई.
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कौन हैं वेणु श्रीनिवासन?
वेणु श्रीनिवासन TVS Motor के चेयरमैन एमिरेट्स और TVS होल्डिंग के नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं. 1979 में उन्होंने Sundaram-Clayton के मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभाला. उस समय उनकी उम्र करीब 27 साल थी. इसके बाद करीब पांच दशक तक उन्होंने TVS ग्रुप के कारोबार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. वेणु श्रीनिवासन का कारोबारी अनुभव सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर तक सीमित नहीं रहा. वह इंडस्ट्री और पब्लिक पॉलिसी से भी जुड़े रहे हैं. 2020 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. वहीं 2022 में उन्हें RBI के सेंट्रल बोर्ड में नॉन ऑफिशियल डायरेक्टर भी बनाया गया. उनका TVS Group से पारिवारिक रिश्ता भी काफी पुराना है. TVS ग्रुप के संस्थापक टी.वी. सुंदरम अयंगर उनके दादा थे. यानी वेणु श्रीनिवासन ऐसे कारोबारी परिवार से आते हैं, जिसकी भारत के ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लंबी विरासत रही है. 2025 में उन्होंने TVS Group के रोजमर्रा के कामकाज की जिम्मेदारी अपने बेटे सुदर्शन वेणु को सौंप दी. इसके बाद भी वह समूह के बोर्ड और रणनीतिक स्तर पर जुड़े रहे.
Tata Group में कैसे हुई एंट्री?
वेणु श्रीनिवासन की टाटा ग्रुप में एंट्री साल 2016 में हुई. अगस्त 2016 में उन्हें टाटा संस के बोर्ड में नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया. उसी समय अजय पीरामल और अमित चंद्रा को भी बोर्ड में शामिल किया गया. ये टाटा ग्रुप के लिए अहम दौर था. इसके कुछ ही महीने बाद, 24 अक्टूबर 2016 को साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया. इसके बाद नए चेयरमैन की तलाश के लिए एक सेलेक्शन कमेटी बनाई गई. इस कमेटी में रतन टाटा के साथ वेणु श्रीनिवासन भी शामिल थे. यानी टाटा सिस्टम में एंट्री के कुछ ही महीनों के अंदर श्रीनिवासन उस प्रक्रिया का हिस्सा बन गए, जिसमें टाटा ग्रुप के अगले चेयरमैन के चयन पर फैसला होना था.
Tata Trusts में बढ़ी भूमिका
इसके बाद वेणु श्रीनिवासन की भूमिका सिर्फ टाटा संस के बोर्ड तक सीमित नहीं रही. 2018 में उन्हें टाटा ट्रस्ट में वाइस चेयरमैन की जिम्मेदारी भी मिली. टाटा ट्रस्ट की ताकत को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि ट्रस्ट के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. टाटा संस पूरे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है. इस लिहाज से टाटा ट्रस्ट में अहम पद का मतलब टाटा ग्रुप के सबसे बड़े शेयरहोल्डर के गवर्नेंस स्ट्रक्चर का हिस्सा होना है. समय के साथ वेणु श्रीनिवासन टाटा ट्रस्ट के दोनों बड़े ट्रस्टों सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट से जुड़े और टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टर के तौर पर भी उनकी भूमिका बनी रही. इस तरह एक तरफ वह TVS ग्रुप के दिग्गज कारोबारी बने रहे, वहीं दूसरी तरफ टाटा ग्रुप की गवर्नेंस में भी उनकी भूमिका बढ़ती गई.
रतन टाटा ने वेणु श्रीनिवासन को क्यों दी अहम भूमिका?
वेणु श्रीनिवासन के पास लंबे कारोबारी अनुभव के साथ ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और कॉरपोरेट गवर्नेंस का अनुभव रहा है. उन्होंने TVS ग्रुप को ऐसे दौर में संभाला जब भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से बदल रहा था. उनका लंबा कारोबारी अनुभव और बोर्ड स्तर का अनुभव टाटा सिस्टम में उनकी भूमिका के लिए महत्वपूर्ण रहा. इसी वजह से टाटा संस के बोर्ड से लेकर टाटा ट्रस्ट तक उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती गईं.
नोएल टाटा के बाद बदला समीकरण
रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया गया. इसके बाद ट्रस्ट के गवर्नेंस और टाटा संस के भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए.
शुरुआत में वेणु श्रीनिवासन और नोएल टाटा कई मुद्दों पर एक ही पक्ष में दिखाई दिए. लेकिन 2025 और 2026 में कुछ मुद्दों पर दोनों के रुख अलग दिखाई दिए. टाटा संस की लिस्टिंग और एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के मुद्दे पर श्रीनिवासन ने टाटा संस बोर्ड में नोएल टाटा से अलग रुख अपनाया. सितंबर 2026 में श्रीनिवासन ने टाटा ट्रस्ट के गवर्नेंस को लेकर महाराष्ट्र के चैरेटी कमिशनर के सामने भी सवाल उठाए हैं.
वेणु श्रीनिवासन ने क्या सवाल उठाए?
- नोएल के आजीवन ट्रस्टी बनने और बने रहने के आधार पर सवाल
- टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के तौर पर नोएल की नियुक्ति की जांच की मांग
- नोएल के बेटे नेविल टाटा की ट्रस्ट्री नियुक्त करने के तरीके पर आपत्ति
- ट्रस्ट फैसलों में खुद को बाहर रखे जाने का आरोप
- टाटा संस की लिस्टिंग पर वोट से रोकने की कोशिश पर आपत्ति
- टाटा संस के कमर्शियल मामलों में ट्रस्ट की भूमिका पर सवाल
इन सभी को वेणु श्रीनिवासन की ओर से उठाई गई आपत्तियों और मांगों के रूप में देखा जाना चाहिए. इन्हें किसी प्राधिकरण का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता.
TVS से Tata Trusts तक लंबा सफर
वेणु श्रीनिवासन की टाटा ग्रुप में एंट्री करीब दस साल पहले हुई थी. उस समय वह TVS ग्रुप के एक बड़े कारोबारी थे. लेकिन रतन टाटा के दौर में टाटा संस के बोर्ड से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे टाटा ट्रस्ट तक पहुंचा और आज वो टाटा ग्रुप के गवर्नेंस स्ट्रक्चर में अहम भूमिका निभा रहे हैं. यानी TVS ग्रुप के कारोबार से लेकर टाटा संस के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट तक वेणु श्रीनिवासन का सफर करीब एक दशक में काफी आगे बढ़ा है.अब जब वह टाटा ट्रस्ट के गवर्नेंस को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो टाटा ग्रुप की आगे की गवर्नेंस में उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है.
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