भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य अब सिर्फ एक राजनीतिक संकल्प नहीं, बल्कि कई बड़े economic और technology targets से जुड़ चुका है. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे ही कई लक्ष्य सामने रखे हैं, जिनमें Fortune Global 500 में 50 भारतीय कंपनियां, दुनिया के Top-5 बैंकों में एक भारतीय बैंक, 100 GW Nuclear Power, 1 करोड़ AI-skilled युवा और नए Semiconductor Plants शामिल हैं.
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इन आंकड़ों से साफ है कि Viksit Bharat का रोडमैप सिर्फ GDP बढ़ाने तक सीमित नहीं है. इसका फोकस Global Companies, Banking, Energy, Artificial Intelligence और Semiconductor जैसे strategic sectors में भारत की ताकत बढ़ाने पर भी है. लेकिन सवाल यही है कि मौजूदा स्थिति से इन लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए भारत को कितनी बड़ी छलांग लगानी होगी.
Fortune Global 500 में 50 भारतीय कंपनियां
सबसे पहला और बड़ा लक्ष्य है कि भारत की 50 कंपनियां Fortune Global 500 में जगह बनाएं. यह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों के बीच भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर की मौजूदगी को कई गुना बढ़ाने की कोशिश होगी.
अभी स्थिति क्या है?
- 2025 की Fortune Global 500 लिस्ट में भारत की सिर्फ 9 कंपनियां.
- Reliance Industries भारत की सबसे ऊपर रहने वाली कंपनी, 88वें स्थान पर.
- लिस्ट में LIC, Indian Oil, SBI, ONGC, HDFC Bank, Tata Motors, BPCL और ICICI Bank भी शामिल.
यानी 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए भारत को 9 कंपनियों से बढ़कर 50 कंपनियों तक जाना होगा. यह मौजूदा संख्या के मुकाबले 5 गुना से ज्यादा की छलांग होगी.
Top-5 Global Banks में एक भारतीय बैंक
दूसरा लक्ष्य Banking Sector से जुड़ा है. भारत चाहता है कि कम से कम एक भारतीय बैंक दुनिया के Top-5 सबसे बड़े बैंकों में शामिल हो.
फिलहाल इस रैंकिंग में चीन का दबदबा नजर आता है. S&P Global की 2026 रैंकिंग में Industrial and Commercial Bank of China यानी ICBC करीब $7.65 ट्रिलियन Assets के साथ सबसे ऊपर रहा. वहीं भारत का सबसे बड़ा बैंक SBI करीब $877 अरब Assets के साथ काफी पीछे है.
यानी चुनौती सिर्फ बैंक को बड़ा बनाने की नहीं, बल्कि Global Scale तक पहुंचाने की है.
8.78 GW से 100 GW Nuclear Power का लक्ष्य
भारत की Energy Security के लिए Nuclear Power को भी बड़ा लक्ष्य बनाया गया है. देश की मौजूदा Nuclear Power Capacity करीब 8.78 GW है, जिसे 2047 तक बढ़ाकर 100 GW करने का लक्ष्य रखा गया है.
आंकड़ों में समझिए:
- मौजूदा क्षमता: 8.78 GW
- 2047 लक्ष्य: 100 GW
- यानी क्षमता में 11 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी.
- 2031-32 तक अनुमानित क्षमता: 22.38 GW
- इस दशक में 5 नए Nuclear Reactors शुरू करने का लक्ष्य.
इसके लिए Nuclear Sector में private participation बढ़ाने और Small Modular Reactors यानी SMRs पर भी जोर दिया जा रहा है.
1 करोड़ युवाओं को AI की स्किल
अब सबसे तेजी से बदलते Technology Sector की बात. Artificial Intelligence आने वाले वर्षों में Jobs, Business और Productivity को बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकती है. ऐसे में भारत का लक्ष्य अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI skills देना है.
सरकार का YUVA AI for All program पहले से चल रहा है.
अब तक की स्थिति:
- 8 जुलाई तक करीब 85.27 लाख Enrolments.
- लक्ष्य: 1 करोड़ AI-skilled Youth.
- यानी मौजूदा enrolments और लक्ष्य के बीच अंतर करीब 14.73 लाख का है.
इसका मतलब है कि सरकार पहले ही इस लक्ष्य के काफी करीब पहुंच चुकी है. असली चुनौती यह होगी कि Training के साथ युवाओं को इन skills का इस्तेमाल Jobs और Entrepreneurship में करने के मौके भी मिलें.
Semiconductor में भारत की बड़ी छलांग
पांचवां लक्ष्य Semiconductor Manufacturing को लेकर है. प्रधानमंत्री ने अगले 7 से 8 साल में 5 से 8 नए Semiconductor Plants लगाने की बात कही है.
भारत में Semiconductor Ecosystem तैयार करने के लिए सरकार पहले ही कई projects को मंजूरी दे चुकी है.
अब तक का अपडेट:
- 6 राज्यों में 12 Semiconductor Projects मंजूर.
- कुल निवेश की प्रतिबद्धता ₹1.64 लाख करोड़ से ज्यादा.
- 3 Projects में Commercial Production शुरू.
यह सेक्टर इसलिए भी अहम है क्योंकि Semiconductor सिर्फ Smartphones तक सीमित नहीं हैं. Cars, Electronics, Defence, AI और कई Critical Technologies के लिए Chips जरूरी हैं.
Viksit Bharat का असली Scoreboard
इन सभी लक्ष्यों को एक साथ देखें तो तस्वीर काफी बड़ी है.
50 → Fortune Global 500 में भारतीय कंपनियां.
TOP-5 → Global Banks में एक भारतीय बैंक.
100 GW → Nuclear Power Capacity.
1 करोड़ → AI-skilled Youth.
5–8 → नए Semiconductor Plants.
यानी 2047 का Viksit Bharat सिर्फ एक बड़ी Economy बनने की कहानी नहीं है. लक्ष्य है कि भारत Global Economic और Technology Powerhouse के तौर पर अपनी जगह मजबूत करे.
अब असली चुनौती इन Targets को घोषित करने की नहीं, बल्कि अगले दो दशकों में इन्हें जमीन पर उतारने की है. 2047 तक इनमें से कितने बड़े नंबर हकीकत बनते हैं, यही भारत की अगली विकास कहानी का सबसे बड़ा Scoreboard होगा.
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