Vodafone Idea यानी Vi को अपने नेटवर्क और सर्विसेज को मजबूत करने के लिए करीब ₹35,000 करोड़ का बड़ा बैंक लोन मिलने की उम्मीद है. कंपनी अगले 10 साल के लिए इस टर्म लोन को जुटाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए कई सरकारी और निजी बैंकों को साथ लाकर एक कंसोर्टियम तैयार किया जा रहा है.
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लेकिन इस पूरी डील में सिर्फ ₹35,000 करोड़ की रकम ही अहम नहीं है. असली ध्यान उन शर्तों पर है, जिनके साथ बैंक Vi को यह कर्ज देने की तैयारी कर रहे हैं.
10 साल के लिए ₹35,000 करोड़ का कर्ज
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Vodafone Idea करीब 8 से 10 बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिलकर ₹35,000 करोड़ का टर्म लोन जुटा सकती है. इसका इस्तेमाल कंपनी नेटवर्क विस्तार, क्षमता बढ़ाने और 4G-5G सेवाओं को मजबूत करने में कर सकती है.
लोन प्लान की बड़ी बातें:
करीब ₹35,000 करोड़ का टर्म लोन. अवधि करीब 10 साल. 8-10 lenders का कंसोर्टियम. नेटवर्क और सर्विसेज में निवेश पर फोकस.
कंसोर्टियम का मतलब है कि इस कर्ज का बोझ और जोखिम कई lenders के बीच बांटा जाएगा.
SBI और NaBFID की बड़ी हिस्सेदारी
इस फंडिंग में SBI सबसे बड़ा lender बन सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, SBI करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है. इसका मतलब करीब ₹7,000 करोड़ का कर्ज हो सकता है.
वहीं NaBFID करीब ₹4,000 करोड़ के साथ दूसरा बड़ा lender बन सकता है. इसके अलावा PNB, Canara Bank, Bank of Baroda और Union Bank जैसे सरकारी बैंकों के साथ ICICI Bank और HDFC Bank से भी बातचीत की खबर है.
₹35,000 करोड़ के बाद भी बचेगा बड़ा Funding Gap
Vi के लिए यह रकम बड़ी जरूर है, लेकिन कंपनी की पूरी जरूरत इससे कहीं ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक, नेटवर्क और सेवाओं को मजबूत करने के लिए Vi को कुल करीब ₹60,000 करोड़ की जरूरत हो सकती है.
यानी ₹35,000 करोड़ का लोन मिलने के बाद भी करीब ₹25,000 करोड़ का फंडिंग गैप रह सकता है.
इस रकम का इंतजाम कंपनी को दूसरे स्रोतों से करना होगा.
Internal resources से फंडिंग. Equity के जरिए नया पैसा जुटाना. अतिरिक्त निवेश की जरूरत पड़ने पर खुद फंड की व्यवस्था करना.
अगर कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटाती है, तो मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी में कमी आ सकती है.
Banks की शर्तें क्यों हैं अहम?
इस पूरी डील का सबसे दिलचस्प हिस्सा lenders की शर्तें हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, SBI चाहता है कि ₹35,000 करोड़ के अलावा अगर नेटवर्क निवेश के लिए और पैसा चाहिए, तो उसका इंतजाम Vi खुद करे.
इसके अलावा Kumar Mangalam Birla को लेकर भी एक अहम शर्त बताई गई है. Birla ने 2021 में Vi के बोर्ड से इस्तीफा दिया था और मई 2026 में दोबारा कंपनी के Chairman बने. रिपोर्ट के मुताबिक, कर्ज की पूरी अवधि के दौरान उनका Chairman बने रहना lenders की शर्तों में शामिल हो सकता है.
SBI कंपनी के cash flow पर भी नजर रख सकता है, यानी Vi के पास पैसा कहां से आ रहा है और उसका इस्तेमाल किस तरह हो रहा है, इसकी निगरानी की जा सकती है.
Aditya Birla Group पर भी नजर
Aditya Birla Group को लेकर भी कुछ शर्तें सामने आई हैं. रिपोर्ट के अनुसार, warrants और rights को equity में बदलने के बाद Group को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने की जरूरत हो सकती है.
इसके अलावा Group की एक कंपनी की comfort guarantee भी loan arrangement का हिस्सा हो सकती है.
Vi के Investors के लिए अब क्या अहम है?
Vi में सरकार की करीब 49 फीसदी हिस्सेदारी बताई जाती है, जबकि Vodafone Group की हिस्सेदारी करीब 19 फीसदी और Aditya Birla Group व उससे जुड़ी entities की करीब 6.64 फीसदी है.
ऐसे में ₹35,000 करोड़ की फंडिंग कंपनी के लिए बड़ा सहारा बन सकती है. लेकिन असली सवाल यह है कि इस पैसे से Vi का नेटवर्क, ग्राहक आधार, revenue और cash flow कितना मजबूत होता है.
Investors को अब खास तौर पर तीन चीजों पर नजर रखनी होगी:
₹35,000 करोड़ का लोन कब पूरी तरह final और disburse होता है. बाकी ₹25,000 करोड़ की funding कंपनी कैसे जुटाती है. Network investment का असर customers, revenue और cash flow पर कितना पड़ता है.
क्योंकि Vi के लिए असली चुनौती सिर्फ पैसा जुटाना नहीं है. चुनौती यह है कि इस पूंजी का इस्तेमाल करके कंपनी अपने कारोबार को दोबारा मजबूत और टिकाऊ बना पाए.
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