वॉरेन बफेट की निवेश कहानी इस वजह से खास मानी जाती है कि उन्होंने बहुत कम उम्र और बहुत छोटी रकम से शेयर बाजार में शुरुआत की थी. आज उनकी पहचान दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में होती है, लेकिन शुरुआत एक आम निवेशक की तरह छोटे पैसे से हुई थी.
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यही बात छोटे निवेशकों के लिए सबसे अहम है. अगर आपके पास 5 हजार, 10 हजार या 20 हजार रुपये हैं, तब भी निवेश शुरू किया जा सकता है. बफेट की सीख यह है कि सही जानकारी, धैर्य और लगातार निवेश की आदत लंबे समय में बड़ा धन बना सकती है.
11 साल में पहला शेयर
वॉरेन बफेट ने साल 1942 में 11 साल की उम्र में अपना पहला शेयर खरीदा था. यह शेयर सिटीज सर्विस प्रिफर्ड कंपनी का था और इसकी कीमत 38 डॉलर प्रति शेयर थी. इसी शुरुआती निवेश से उन्हें यह समझ मिली कि बाजार में उतार चढ़ाव हमेशा रहेगा, लेकिन धैर्य रखने वाला निवेशक आगे निकल सकता है.
कम पैसे से शुरुआत क्यों फायदेमंद हो सकती है
बफेट का मानना है कि कम पैसे से निवेश शुरू करना नुकसान नहीं, बल्कि फायदा भी हो सकता है. उनका कहना है कि छोटी रकम के साथ निवेशक छोटी और तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों पर नजर रख सकता है. ऐसी कंपनियां सफल होने पर अच्छा रिटर्न दे सकती हैं.
मेहनत का मतलब पढ़ना और समझना
बफेट के मुताबिक निवेश में मेहनत का सबसे बड़ा मतलब पढ़ाई है. स्रोत में बताया गया है कि 94 साल की उम्र में भी वह रोज करीब 500 पेज पढ़ते हैं. उनकी पसंदीदा किताबों में बेंजामिन ग्राहम की द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर और द ग्रेट क्रैश ऑफ 1929 शामिल हैं. उनका मानना है कि जो निवेशक ज्यादा पढ़ता है, वह बेहतर फैसले ले सकता है.
नए निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड की सलाह
अगर किसी व्यक्ति को शेयर चुनना नहीं आता, बैलेंस शीट समझ में नहीं आती या वह बाजार में नया है, तो बफेट इंडेक्स फंड को बेहतर विकल्प मानते हैं. उनका कहना है कि इसमें अलग अलग कंपनियों का फायदा एक साथ मिल सकता है और जोखिम भी कुछ हद तक कम हो सकता है.
सीधे शेयर खरीदने से पहले क्या देखें
अगर आप किसी कंपनी का शेयर खरीदना चाहते हैं, तो बफेट सबसे पहले कंपनी को समझने की सलाह देते हैं. उनके मुताबिक सिर्फ इसलिए शेयर नहीं खरीदना चाहिए कि कोई दोस्त, कोई वीडियो बनाने वाला या सोशल मीडिया पर कोई व्यक्ति उसे खरीद रहा है.
• कंपनी क्या काम करती है, यह समझना जरूरी है.
• उसकी कमाई कैसे होती है, यह देखना जरूरी है.
• उसका कारोबार किस ढंग से चलता है, यह जानना जरूरी है.
• बैलेंस शीट कैसी है, यह समझना जरूरी है.
वॉरेन बफेट के 4 आसान नियम.
• पहला नियम यह है कि निवेश से पहले कंपनी को अच्छे से समझें.
• दूसरा नियम यह है कि लंबे समय के लिए निवेश करें, क्योंकि अच्छी कंपनियों को बढ़ने में समय लगता है.
• तीसरा नियम यह है कि खर्च कम रखें, क्योंकि ब्रोकरेज, मैनेजमेंट फीस और टैक्स आपके रिटर्न को घटाते हैं.
• चौथा नियम यह है कि सिर्फ महंगी दिखने वाली कंपनी के पीछे न भागें, बल्कि शेयर की कीमत से ज्यादा उसकी वैल्यू देखें.
बचत और इक्विटी, दोनों की अपनी जगह
भारत में बहुत से लोग अपनी बचत एफडी, पीपीएफ और पेंशन योजनाओं में रखते हैं. बफेट इन विकल्पों को गलत नहीं मानते. लेकिन उनका कहना है कि अगर लंबे समय में दौलत बनानी है, तो सिर्फ बचत ही नहीं, इक्विटी में निवेश भी जरूरी है. उनके मुताबिक लंबे समय में शेयर बाजार और इंडेक्स फंड महंगाई को मात देने की क्षमता रखते हैं.
सबसे बड़ी सीख, कंपाउंडिंग
बफेट की सबसे अहम सीख कंपाउंडिंग है. इसका सीधा मतलब यह है कि पैसा, पैसे से और पैसा बनाता है. बफेट का कहना है कि उनकी पूरी जिंदगी पर कंपाउंड इंटरेस्ट का असर रहा है.
इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि निवेश शुरू करने के लिए करोड़पति होना जरूरी नहीं है. जरूरी यह है कि निवेशक पहले सीखे, फिर समझे और उसके बाद छोटे कदम से शुरुआत करे. वॉरेन बफेट की कहानी बताती है कि शेयर बाजार में सबसे मुश्किल काम करोड़ों कमाना नहीं, बल्कि पहला कदम उठाना होता है.
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