हफ्ते के पहले कारोबारी दिन Zee Entertainment Enterprises के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. सोमवार को कंपनी का शेयर 12% से ज्यादा टूटकर 101.50 रुपये तक पहुंच गया. शेयर में यह गिरावट SEBI की सख्त कार्रवाई के बाद आई है. मार्केट रेगुलेटर SEBI ने कंपनी के संस्थापक सुभाष चंद्रा और CEO पुनीत गोयनका को एक साल के लिए शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है. इसके अलावा कंपनी पर भी जुर्माना लगाया गया है.
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SEBI ने क्या कार्रवाई की?
- सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका पर 1-1 साल का सिक्योरिटीज मार्केट बैन लगाया
- दोनों पर मिलाकर 1.48 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया
- Zee Entertainment पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
- कंपनी को 2 महीने तक पूंजी बाजार (Capital Market) से दूर रहने का आदेश दिया
पूरा मामला क्या है?
SEBI के मुताबिक, दिसंबर 2018 में Zee Entertainment की हैदराबाद स्थित जमीन के मूल दस्तावेज बिना जरूरी मंजूरी के Indiabulls Housing Finance के पास गिरवी रखे गए थे. इस गिरवी के जरिए Essel Group की चार कंपनियों ने करीब 726 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. SEBI का आरोप है कि यह पूरा लेनदेन प्रमोटर ग्रुप से जुड़ा था, लेकिन इसे कंपनी ने Related Party Transaction के रूप में सार्वजनिक नहीं किया.
कैसे खुला मामला?
इस मामले की जांच तब शुरू हुई जब कंपनी के ऑडिटर Deloitte Haskins & Sells LLP ने FY19 की ऑडिट रिपोर्ट में बताया कि कंपनी की कुछ संपत्तियों के मूल दस्तावेज गायब हैं. जांच में SEBI को पता चला कि जमीन गिरवी रखने से पहले
- ऑडिट कमेटी की मंजूरी नहीं ली गई
- बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मंजूरी नहीं ली गई
- शेयरधारकों की मंजूरी भी नहीं ली गई
फंड जुटाने की योजना पर क्या असर?
दिलचस्प बात यह है कि SEBI के आदेश से ठीक पहले हुई कंपनी की EGM (Extraordinary General Meeting) में शेयरधारकों ने 3,144 करोड़ रुपये जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. ये फंड प्रमोटर ग्रुप को Fully Convertible Warrants जारी करके जुटाया जाना है. हालांकि, SEBI की कार्रवाई के बाद इस योजना पर कुछ कानूनी और नियामकीय सवाल खड़े हो सकते हैं. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक SEBI इस फंडरेज पर अलग से कोई आदेश नहीं देता, तब तक EGM में पारित प्रस्ताव प्रभावी रहेगा.
कंपनी ने क्या कहा?
Zee Entertainment ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा है कि वह SEBI के आदेश का अध्ययन कर रही है और अपने कानूनी सलाहकारों से चर्चा के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लेगी.
निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
SEBI की इस कार्रवाई से कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल उठे हैं. यही वजह है कि निवेशकों ने शेयर में बिकवाली की और स्टॉक में दोहरे अंक की गिरावट देखने को मिली. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कंपनी की कानूनी रणनीति और फंड जुटाने की योजना पर रहेगी.
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