E20 पेट्रोल का झटका माइलेज और इंजन पर ? इससे गाड़ी को कैसे बचाएं, Car गुरु अमित खरे ने सब बता दिया

बृजेश उपाध्याय

10 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 10 2026 2:17 PM)

E20 फ्यूल (इथेनॉल मिक्स पेट्रोल) से क्या आपकी कार का माइलेज कम हो रहा है? क्या बीच रास्ते पर इंजन जवाब दे रहा है ? जानिए नई और पुरानी गाड़ियों पर इसका असर, मेंटेनेंस का सही समय और माइलेज बढ़ाने के बेस्ट ड्राइविंग टिप्स.

Google CTA

आज के दौर में जब हर कोई अपनी जेब और परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखकर कार खरीदता है, तब अचानक कार का पूरा बजट और हिसाब गड़बड़ा जाए, तो परेशान होना लाजमी है. आजकल कार मालिकों के बीच सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है E20 फ्यूल (20% इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) और इससे गाड़ियों पर पड़ने वाला असर. 

Read more!

क्या सच में इथेनॉल मिक्स पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है? क्या फ्यूल पंपों पर मिलावट का खेल चल रहा है? कार गुरु अमित खरें ने जनता के ऐसे कई सवालों का जवाब दिया है. न्यूज तक के खास शो 'मंच' में शिरकत करने आए अमित खरे ने E 20 से जुड़े कई गफलतों को दूर किया है. वहीं उन्होंने बेबाकी से कई बातें बताई हैं जो हैं तो आम आदमी की टेंशन बढ़ाने वाली हैं. 

अब कार का मेंटेनेंस खर्च बढ़ जाएगा ?

इस सवाल के जवाब में कार गुरु अमित खरे कहा-  'हां, इस कड़वे सच को अब स्वीकार करना ही होगा. अगर आपकी गाड़ी पुरानी है और वह E20 रेडी नहीं है, तो उसका मेंटेनेंस खर्च बढ़ चुका है. हालांकि, जो लोग अब नई गाड़ियां (E20 Ready Cars) खरीद रहे हैं, उन्हें ज्यादा पैनिक होने की जरूरत नहीं है. 

नई गाड़ियां E 45 तक को झेल जाएंगी

अब कार कंपनियां गाड़ियों में ऐसे एडवांस मटेरियल का इस्तेमाल कर रही हैं जो सिर्फ E20 ही नहीं बल्कि E35 और E45 (35% से 45% इथेनॉल मिक्स) तक को आसानी से झेल सकते हैं. पहले इस्तेमाल होने वाला PVC और P66 (पॉलीअमाइड 66) मटेरियल, जो इथेनॉल के संपर्क में आकर गल जाता था, अब उसकी जगह बेहतर टॉलरेंस लिमिट वाले कंपोनेंट्स और नई गास्केट का इस्तेमाल हो रहा है.

गाड़ी कब मांगेगी मेंटेनेंस? जानें सही सिग्नल 

अमित खरे ने बताया कि इंजन में हल्की सी 'किटकिट' की आवाज सुनते ही लोग डर रहे हैं कि कहीं यह E20 फ्यूल का साइड इफेक्ट तो नहीं. अगर आपकी गाड़ी पुरानी है तो डरना जायज है, लेकिन पैनिक होने के बजाय सही समय पर मेंटेनेंस कराना जरूरी है.

फ्यूल इंजेक्टर और फिल्टर की सफाई: कार एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अचानक बड़ी समस्या से बचने के लिए हर 15,000 से 20,000 किलोमीटर चलने के बाद कार का खास मेंटेनेंस पैकेज जरूर फॉलो करें.

पेट्रोल पंपों की लापरवाही: गाड़ियों में खराबी का पूरा ठीकरा फ्यूल पर फोड़ा जा रहा है, जबकि असल समस्या पेट्रोल पंपों के अंडरग्राउंड टैंकों में पानी मिक्स होने और प्रॉपर क्लीनिंग व स्टैंडर्डाइजेशन न होने की वजह से आ रही है. सरकार को इन फाइबर टैंक्स की सफाई पर सख्त नियम बनाने की जरूरत है. 

माइलेज में गिरावट तय, लेकिन इन ड्राइविंग स्किल्स से होगी बचत 

क्या इथेनॉल मिक्स होने के बाद कम हुए माइलेज की पूरी भरपाई मुमकिन है? इस सवाल के जवाब  में कार गुरु ने कहा- 'नहीं, पूरी भरपाई तो नहीं होगी, लेकिन सही आदतों से नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है. अगर आप लॉन्ग ड्राइव पर जा रहे हैं या डेली कम्यूट कर रहे हैं, तो इन बेस्ट ड्राइविंग प्रैक्टिसेस (Best Driving Practices) को अपनाएं- 

इंजन की आवाज पर दें ध्यान: जब भी इंजन ज्यादा शोर (Noise) करने लगे, समझ जाएं कि वह ज्यादा फ्यूल खींच रहा है. इंजन के ज्यादा आवाज करने से पहले ही एक्सीलरेटर से पैर थोड़ा धीमा कर लें. यानी 2000 RPM से कम पर गाड़ी ड्राइव करने की कोशिश करें. 

स्मूथ ड्राइविंग अपनाएं: अचानक तेज एक्सीलरेट करने (Hard Acceleration) और अचानक ब्रेक लगाने (Sudden Braking) से बचें. एक फिक्स आरपीएम (RPM) पैटर्न फॉलो करें. 

सही फ्यूल स्टेशन चुनें: मिलावट के डर से बचने के लिए हमेशा कंपनी ओन्ड (Company Owned / COCO) पेट्रोल पंपों से ही फ्यूल भरवाने की कोशिश करें. 

बदले हुए हालातों के साथ अब कार केयर का तरीका बदलना ही समझदारी है. हर 20 हजार किलोमीटर पर मेंटेनेंस और संभलकर ड्राइविंग ही आपकी गाड़ी की लाइफ बढ़ा सकती है. 

'मंच' का ये पूरा कार्यक्रम ये देख सकते हैं