रायपुर प्रेस क्लब बना अखाड़ा: भूपेश बोले- 'केंद्र ने रोका काम', तो विजय शर्मा ने गिना दिया 11 लाख घरों का हिसाब!

न्यूज तक डेस्क

• 04:22 PM • 17 Sep 2026

रायपुर प्रेस क्लब में PM आवास योजना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच आंकड़ों पर तीखी बहस हुई. जहां विजय शर्मा ने साय सरकार के दौरान रिकॉर्ड मकान बनने का दावा किया, वहीं भूपेश बघेल ने केंद्र पर पोर्टल बंद कर काम अटकाने का आरोप लगाया.

एक ही मंच पर बैठे भूपेश बघेल और विजय शर्मा
एक ही मंच पर बैठे भूपेश बघेल और विजय शर्मा
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छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में प्रधानमंत्री आवास योजना पर जुबानी जंग नई नहीं है, लेकिन इस बार का नज़ारा बिल्कुल अलग था. बयानबाज़ी और आरोपों के दौर से निकलकर बात खुली चुनौती तक पहुंची और फिर रायपुर प्रेस क्लब का मंच गवाह बना एक हाई-वोल्टेज बहस का.

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मौजूदा उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा गरीबों की छत के मुद्दे पर आमने-सामने बैठे. दोनों ही नेताओं ने आंकड़े सामने रखे, अपने-अपने दावों की ढाल बनाई और एक-दूसरे के कार्यकाल की कमियां गिनाईं.

विजय शर्मा का हमला

बहस की शुरुआत करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सीधे कांग्रेस के 5 साल के कामकाज पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि पिछली भूपेश बघेल सरकार के दौरान गरीबों के घर बनने की रफ्तार बेहद सुस्त थी.

विजय शर्मा ने आंकड़े पेश करते हुए दावा किया

पिछली सरकार का रिपोर्ट कार्ड: कांग्रेस के 5 वर्षों में महज ₹3,900 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति मिली, 3 लाख 87 हजार आवास स्वीकृत हुए और लगभग 3 लाख मकान ही बन पाए.

साय सरकार का दावा: विष्णुदेव साय की मौजूदा बीजेपी सरकार ने केवल 3 साल में करीब ₹16,000 करोड़ खर्च किए हैं. अब तक कुल 11 लाख 75 हजार मकानों का निर्माण पूरा किया जा चुका है.

भूपेश बघेल का पटलवार

विजय शर्मा के तीखे हमलों का जवाब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बेहद आक्रामक अंदाज में दिया. उन्होंने कहा कि बीजेपी सिर्फ एक खास हिस्से के आंकड़े दिखाकर आधी-अधूरी सच्चाई पेश कर रही है.

भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए अपनी बात रखी:

  • पोर्टल बंद करने का आरोप: साल 2022-23 में केंद्र सरकार ने अचानक पोर्टल बंद कर दिया था, जिसकी वजह से लाखों गरीबों के मकान प्रक्रियागत कारणों से अटक गए.
  • 41 लाख का आंकड़ा: बघेल ने दावा किया कि अगर योजना की शुरुआत से लेकर अलग-अलग चरणों की सभी स्वीकृतियों को जोड़कर सही तरीके से देखा जाए, तो यह आंकड़ा बढ़कर 41 लाख तक पहुंचता है.

सियासत के बीच असली सवाल कायम

पूरे कार्यक्रम के दौरान दोनों दिग्गजों के बीच आंकड़ों की व्याख्या को लेकर कई बार तीखी नोकझोंक हुई. जहां एक तरफ विजय शर्मा अपनी सरकार की रफ्तार और फंड ट्रांसफर को भुनाते दिखे, वहीं भूपेश बघेल नियमों और केंद्र की अड़चनों का हिसाब देते नजर आए.

मंच पर हुई यह खुली बहस भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन इसने राज्य में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू कर दिया है. अब देखना यह होगा कि आंकड़ों के इस जाल से परे, गांव और कस्बों में पक्की छत का इंतजार कर रहे उस आखिरी गरीब परिवार तक इसका फायदा कब और कैसे पहुंचता है.

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