Chhattisgarh Elections 2023- छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा की ओर से सभी 90 सीटों पर प्रत्याशियों के ऐलान के बाद अब पार्टी बागी नेताओं से जूझ रही है. टिकट वितरण से नाराज भाजपा की कद्दावर नेता गोपिका गुप्ता (Gopika Gupta) ने शुक्रवार को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में रायगढ़ विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल किया. इस दौरान उन्होंने गाजे-बाजे के साथ रैली निकालकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया. भाजपा ने इस सीट से आईएएस अधिकारी से नेता बने ओपी चौधरी (OP Chaudhary) को अपना उम्मीदवार बनाया है.
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25 सालों से भाजपा में कई पदों की जिम्मेदारी निभा चुकी गोपिका गुप्ता दो बार जिला पंचायत सदस्य भी रह चुकी हैं. कोलता समाज से आने वाली गोपिका ने कहा कि उनकी लड़ाई अधिकारों की लड़ाई है. 25 साल तक पार्टी की सेवा करने के बाद भी उन्हें वह प्रतिफल नहीं मिला जो मिलना चाहिए.
ओपी चौधरी से की अपील
गुप्ता ने कहा, “मैं अपने हक की लड़ाई लड़ रही हूं. मैं हक की लड़ाई के लिए सबका साथ मांग रही हूं. मैं अपने आप को अभी भी भाजपा की सदस्य मानती हूं. मेरी नाराजगी व्यक्तिगत है. मैं ओपी चौधरी को भी बोली हूं कि वो त्यागें (उम्मीदवारी छोड़ें). हमें पता नहीं था कि वे रायगढ़ से चुनाव लड़ेंगे और हमारा हक मारेंगे. इसीलिए हमारी नाराजगी है.”
गोपिका गुप्ता ने आगे कहा, “मेरी नाराजगी सिर्फ ओपी चौधरी से है. मैं अभी भी उनसे निवेदन करती हूं कि हमारे हक को ना मारें. आप यहां से अपना उम्मीदवारी त्याग दें. हमारी ओर से शुभकामनाएं है कि आप अच्छे पद पर जाएं और सबका मार्गदर्शन करें.”
ओपी चौधरी को मिला रायगढ़ से टिकट
भाजपा ने इस बार ओपी चौधरी को रायगढ़ से प्रत्याशी बनाया है. चौधरी ने पिछली बार खरसिया से चुनाव लड़ा. इस दौरान 94,201 वोट पाकर कांग्रेस के उमेश पटेल ने चुनाव जीता, जबकि चौधरी 77,234 वोट पाकर चुनाव हार गए थे. ओपी चौधरी को इस बार खरसिया के बजाय रायगढ़ से टिकट दिया गया.
ओपी चौधरी के लिए क्यों है चुनौती
रायगढ़ विधानसभा सीट पर कोलता समाज के तकरीबन 20 हजार मतदाता हैं. ऐसे में गोपिका गुप्ता के निर्दलीय चुनाव लड़ने से कोलता समाज के वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है. गोपिका गुप्ता भाजपा का चर्चित और सक्रिय चेहरा हैं, ऐसे में भाजपा के वोट बैंक को धक्का लग सकता है. वहीं गोपिका ने भी साफ किया है कि उनकी लड़ाई ओपी चौधरी से है. ऐसे में चौधरी के लिए यह बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.
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