ग्लोबल टूरिज्म से जुड़ेंगे छत्तीसगढ़ के जंगल: सिंगापुर के मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व पहुंचे CM विष्णु देव साय, इको-टूरिज्म मॉडल का लिया जायजा

न्यूज तक डेस्क

• 06:29 PM • 05 Oct 2026

छत्तीसगढ़ के जंगलों को मिलेगा ग्लोबल पहचान! सिंगापुर के मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व पहुंचे CM विष्णु देव साय ने इको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण के मॉडल का लिया जायजा.

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तस्वीर: सोशल मीडिया से.
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छत्तीसगढ़ की समृद्ध प्राकृतिक और वन्यजीव संपदा को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बड़ा कदम उठाया है. अपने सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री साय ने प्रसिद्ध मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व (Mandai Wildlife Reserve) का दौरा किया और वहां वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवास प्रबंधन और आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का बारीकी से अध्ययन किया.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर के सफल अनुभवों और तकनीकों की मदद से छत्तीसगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल एक बेहतरीन इको-टूरिज्म मॉडल तैयार किया जाएगा. इससे वनों के संरक्षण के साथ-साथ राज्य में रोजगार और पर्यटन को नई दिशा मिलेगी.

हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी भी रहे साथ 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के निमंत्रण पर सिंगापुर में आयोजित प्रथम 'सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026' में हिस्सा लेने पहुंचे हैं. मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व के इस विशेष दौरे में उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे. दोनों मुख्यमंत्रियों ने रिजर्व में पर्यटकों के लिए की गई विश्वस्तरीय व्यवस्थाओं और जागरूकता गतिविधियों को देखा.

राज्य का 44% वन क्षेत्र बनेगा पर्यटन का आधार 

छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा जंगलों से ढका हुआ है. बस्तर से लेकर सरगुजा तक फैली घनी जैव-विविधता, राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य राज्य को इको-टूरिज्म का मजबूत आधार प्रदान करते हैं.

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि सिंगापुर के मॉडल को हूबहू कॉपी करने के बजाय, वहां की बेहतरीन व्यवस्थाओं को छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं और प्राकृतिक परिवेश के अनुसार ढाला जाएगा.

संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य जंगलों और वन्यजीवों को सुरक्षित रखते हुए स्थानीय समुदायों, युवाओं और ग्रामीणों के लिए आय व रोजगार के नए अवसर पैदा करना है.

उन्होंने उल्लेख किया कि बस्तर, कांगेर घाटी, अचानकमार, इंद्रावती और उदंती-सीतानदी जैसे अद्भुत प्राकृतिक क्षेत्र छत्तीसगढ़ को केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इको-टूरिज्म के अग्रणी केंद्र के रूप में उभारने की अपार क्षमता रखते हैं.