छत्तीसगढ़ में निवेश को आकर्षित करने और उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में साय सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक 2026' के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है. इस कानून को लागू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा.
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इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य में व्यापार और उद्योग स्थापित करने की पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल, पारदर्शी, पूरी तरह डिजिटल और समयबद्ध (Time-bound) बनाना है. इससे निवेशकों को दफ्तरों के चक्कर काटने और सरकारी प्रक्रियाओं में होने वाली बेवजह की देरी से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी.
नए कानून की 5 सबसे बड़ी बातें (5 Key Features)
विधेयक के प्रारूप में इंस्पेक्टर राज और लालफीताशाही को खत्म करने के लिए कई क्रांतिकारी प्रावधान शामिल किए गए हैं:
डीम्ड परमिशन (Deemed Permission): यदि किसी विभाग से तय समय सीमा के भीतर एनओसी या मंजूरी नहीं मिलती है, तो उसे खुद स्वीकृत (Approved) मान लिया जाएगा.
स्व-प्रमाणीकरण (Self-certification): निवेशक अब कई तरह की मंजूरियों के लिए खुद प्रमाणित करके दस्तावेज जमा कर सकेंगे, जिससे शुरुआती देरी खत्म होगी.
जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-based Inspection): उद्योगों की प्रकृति और जोखिम के आधार पर ही उनका निरीक्षण किया जाएगा, हर छोटी बात पर अधिकारी परेशान नहीं कर सकेंगे.
दोहरे लाइसेंस से मुक्ति: एक ही काम के लिए दो अलग-अलग विभागों से लाइसेंस लेने की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है.
थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन: कुछ विशेष एनओसी और जांच के लिए अधिकृत तृतीय-पक्ष सत्यापन की सुविधा मिलेगी, जिससे काम तेजी से होगा.
औद्योगिक विकास और रोजगार को मिलेगी रफ्तार
राज्य सरकार का मानना है कि इस कानून के धरातल पर उतरने से छत्तीसगढ़ में देश और दुनिया के बड़े निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल (Business Environment) बेहद अनुकूल हो जाएगा. प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी. सरकार को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक सुधार से न सिर्फ राज्य का औद्योगिक विकास तेजी से होगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
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