झारखंड के गढ़वा जिले के लोगों की रातों की नींद उड़ चुकी है. छत्तीसगढ़ के जंगलों के रास्ते आए जंगली हाथियों ने गढ़वा के सीमावर्ती इलाकों में डेरा डाल लिया है, जिससे करीब 24 गांवों में भयंकर दहशत का माहौल है. हालात यह हैं कि शाम ढलते ही लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं और हर पल किसी अनहोनी के साये में जी रहे हैं.
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छत्तीसगढ़ के रास्ते पहुंचे दर्जनों हाथी
गढ़वा जिला छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं से सटा हुआ है. जंगलों से घिरे होने के कारण यहां हाथियों का आना-जाना आम बात है, लेकिन इस बार मामला काफी गंभीर है. छत्तीसगढ़ की ओर से हाथियों के कई झुंड गढ़वा की सीमा में दाखिल हुए हैं, जिनमें करीब 40 से 50 हाथियों (चार से पांच दर्जन) का एक बहुत बड़ा झुंड भी शामिल है.
इस भारी-भरकम झुंड और अन्य हाथियों की आवाजाही से जिले के चिनिया, रंका, रमकंडा, भंडरिया, मेराल और बड़गढ़ प्रखंडों के जंगलों के आसपास बसे 24 गांवों के लोग बुरी तरह सहम हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इन गजराजों का कोई तय ठिकाना नहीं है, वे कब किस दिशा में रुख कर लें, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन है.
बदल गई लोगों की डेली रूटीन
हाथियों के खौफ ने आम जनजीवन को पूरी तरह थाम कर रख दिया है. ग्रामीण प्रदीप और चिंता देवी बताते हैं कि हाथियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि हर वक्त यह डर सताता रहता है कि कहीं वे घरों को तोड़कर अंदर न घुस आएं. यही वजह है कि लोगों ने अपनी दिनचर्या पूरी तरह बदल ली है.
अब ग्रामीण सुबह करीब 7 बजे से लेकर शाम के 5 बजे तक ही अपने जरूरी कामकाज या खेती-किसानी से जुड़े काम निपटाते हैं. सूरज ढलते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है और लोग घरों के अंदर सुरक्षित बैठ जाते हैं. रात के समय चैन की नींद लेना तो दूर, लोग जागकर पहरा देने जैसे हालात में हैं.
वन विभाग और प्रशासन मुस्तैद
ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं.
- क्यूआरटी तैनात: वन विभाग की ओर से इलाके में 4 क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRT) तैनात की गई हैं, जो हाथियों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रही हैं.
- विशेषज्ञों की मदद: हाथियों की मानिटरिंग के लिए विशेषज्ञों की दो टीमें भी मौके पर मौजूद हैं.
- अधिकारियों के निर्देश: गढ़वा के डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम ने स्पष्ट किया है कि हाथियों द्वारा फसल या मकान का नुकसान किए जाने पर नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा. वहीं, उपायुक्त पीएन मिश्रा ने भी स्थिति को गंभीर बताते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं और ग्रामीणों से लगातार सतर्क रहने की अपील की है.
प्रशासन की तरफ से लगातार अनाउंसमेंट और जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है. वन विभाग का साफ कहना है कि हाथियों के झुंड के करीब जाने या उन्हें छेड़ने की कोशिश भारी पड़ सकती है, इसलिए सावधानी ही इस वक्त सबसे बड़ा बचाव है.
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