'दुर्ग में ट्रांसफॉर्मर को भी लग रही लू'...बचाने के लिए लगाए कूलर, वायरल तस्वीर पर आ रहे अजब-गजब रिएक्शन

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में पारा 44 डिग्री पहुंचने पर बिजली के ट्रांसफॉर्मर्स को लू से बचाने के लिए कूलर और पानी की बौछार का सहारा लिया जा रहा है.

ट्रांसफॉमर की ये तस्वीर हो रही वायरल
ट्रांसफॉमर की ये तस्वीर हो रही वायरल

रघुनंदन पंडा

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छत्तीसगढ़ में गर्मी ने इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. आसमान से बरसती आग और 44 डिग्री के पार जाते पारे ने न सिर्फ आम जनता का जीना मुश्किल कर दिया है, बल्कि अब बिजली विभाग की मशीनें भी पसीने-पसीने होने लगी हैं. दुर्ग जिले से एक बेहद दिलचस्प लेकिन गंभीर तस्वीर सामने आई है. यहां बिजली के भारी-भरकम ट्रांसफॉर्मर्स को लू लगने से बचाने के लिए प्रशासन को कूलर का सहारा लेना पड़ रहा है.

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मशीनों का 'पसीना' छुड़ा रही गर्मी

अक्सर हमने देखा है कि गर्मी बढ़ते ही घरों में कूलर और एसी चल जाते हैं लेकिन दुर्ग के बिजली सब-स्टेशनों का नजारा कुछ अलग है. यहां बिजली की बेरोक-टोक सप्लाई जारी रखने के लिए विभाग ने ट्रांसफॉर्मर्स के सामने बड़े-बड़े कूलर लगा दिए हैं. दरअसल, बढ़ती गर्मी और बिजली के बढ़ते लोड की वजह से ये ट्रांसफॉर्मर ओवरहीट होकर फेल होने की कगार पर पहुंच गए थे. इन्हें फटने या खराब होने से बचाने के लिए अब कूलर की ठंडी हवा और पानी की बौछार का सहारा लिया जा रहा है.

मिशन मोड में बिजली विभाग

इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने इसे 'मिशन गर्मी' का नाम दिया है. दुर्ग क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक संजय खंडेलवाल ने बताया कि जिले के 14 सब-स्टेशनों में लगभग 20 बड़े ट्रांसफॉर्मर्स पर कूलर लगाए गए हैं. दुर्ग, भिलाई और चरोदा मिलाकर 19 ट्रांसफॉर्मर्स पर कूलर चल रहे हैं. वहीं बालोद जिले में भी एक ट्रांसफॉर्मर को इसी तरह कूलिंग दी जा रही है.

क्यों उठाया गया ये कदम

ट्रांसफॉर्मर के भीतर ऑयल और वाइंडिंग पेपर होता है. ज्यादा गर्मी से इनकी कार्यक्षमता कम हो जाती है. तापमान को सामान्य रखने के लिए दिन में तीन से चार बार रेडिएटर पर पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है.

सावधानी ही समाधान

अधिकारियों का कहना है कि अगर ये ट्रांसफॉर्मर ज्यादा गर्म होकर जवाब दे गए तो पूरे इलाके की बत्ती गुल हो सकती है. लू के थपेड़ों के बीच बिजली विभाग के कर्मचारी मुस्तैदी से डटे हुए हैं ताकि लोगों के घरों के पंखे और कूलर बंद न हों. मशीनों को यह 'VIP ट्रीटमेंट' इसलिए दिया जा रहा है ताकि उनकी लाइफ बढ़े और तकनीकी खराबी के कारण होने वाली कटौती से बचा जा सके. दुर्ग में पड़ रही यह भीषण गर्मी इस बात का सबूत है कि अब सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि लोहे की मशीनें भी कुदरत के इस कहर के आगे बेबस नजर आ रही हैं.

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