ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले के आधार पर कभी छत्तीसगढ़ की सीएम की कुर्सी पर दावा ठोकने वाले मंत्री टीएस सिंहदेव अब राज्य के प्रथम उपमुख्यमंत्री बन गए हैं. लेकिन, विधानसभा चुनावों से महज चार महीने पहले कांग्रेस को हैरतंगेज सियासी दांव खेलने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? जानकारों का कहना है कि ‘कका’ अपने ‘मिशन 75 पार’ की राह में किसी किस्म का जोखिम नहीं चाहते. इसीलिए कभी बगावत बर्दाश्त नहीं करेंगे जैसे बयानों के जरिए तल्ख तेवर दिखाने वाले बघेल ने न केवल सिंहदेव को डिप्टी सीएम बनाया बल्कि अपने बधाई संदेश में उनके लिए ‘महाराज साहब’ जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया. 2018 के चुनावों में दोनों दिग्गज नेताओं की जोड़ी को सियासी हलकों में ‘जय-वीरू’ की संज्ञा दी गई थी. हालांकि बीते साल मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर हुई अनबन ने दोनों नेताओं और उनके समर्थकों के बीच काफी हद तक दरारें पैदा कर दी. लिहाजा, अब समझा जा रहा है कि आलाकमान की हालिया कवायद पार्टी में एकजुटता के जरिए आगामी चुनावों में जीत सुनिश्चित करना है.
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ऐसे तो भूपेश सरकार अपनी किसान केंद्रित योजनाओं को जनता तक प्रचारित-प्रसारित कर आगामी चुनावों में आसान जीत के दावे करती रहती है. लेकिन सूबे की राजनीति में महत्त्वपूर्ण सरगुजा अंचल से आने वाले सिंहदेव की नाराजगी को भी पार्टी हल्के में नहीं लेना चाहती थी. यही वजह है कि बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस की बैठक आयोजित की गई थी. इस दौरान राज्य कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पार्टी ने यह बड़ा ऐलान किया. सिंहदेव को उपमुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस ने न सिर्फ सिंहदेव की नाराजगी दूर करने की कोशिश की है बल्कि जनता के बीच यह संदेश देने का भी प्रयास किया है कि उनकी पार्टी एकजूट है.
बता दें कि सरगुजा की 14 विधानसभा सीटों पर दबदबा रखने वाले सिंहदेव का एक बयान बीते दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. जिसमें वह यह कहते हुए नजर आ रहे थे कि 2018 में हमने सरगुजा संभाग की 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में सभी 14 सीटों पर कांग्रेस की जीत पर संदेह है. वहीं इससे पहले न सिर्फ ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री फॉर्मूले को लेकर टीएस सिंहदेव की नाराजगी सामने आई थी बल्कि चुनाव लड़ने को लेकर भी उन्होंने अपनी अनिच्छा जाहिर की थी. पंचायती राज मंत्रालय से उनके इस्तीफे को भी उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा था. यानी नाराज सिंहदेव पार्टी के लिए नुकसानदेह तो साबित हो ही सकते थे.
वहीं, जब चुनाव नजदीक है तब कुशल संगठनकर्ता के रूप में चर्चित टीएस बाबा की अहमियत को भी कांग्रेस आलाकमान बखूबी समझ रहा है. दरअसल, छत्तीसगढ़ में 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में टीएस सिंहदेव की बड़ी भूमिका थी. जिस जनघोषणा-पत्र को लेकर कांग्रेस 2018 के विधानसभा चुनाव में उतरी थी, उसको टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में तैयार किया गया था. अब आने वाले चुनावों में भी पार्टी को उनकी सियासी सूझबूझ की आवश्यकता है. शायद इसीलिए बघेल ने सिंहदेव को बधाई देते हुए विशेष गर्मजोशी दिखाई. उन्होंने कहा कि हैं तैयार हम. महाराज साहब को उपमुख्यमंत्री के रूप में दायित्व के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं. वहीं टीएस सिंहदेव ने कहा, “हमें सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है और राज्य में चुनाव होने तक इस सीमित समय के भीतर अधूरे काम को पूरा करना है.”
हालांकि, भाजपा ने इस सियासी घटनाक्रम पर चुटकी ली है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने ट्वीट किया, “डूबने लगी कश्ती तो कप्तान ने कुछ यूँ किया, सौंप दी है पतवार आधी दूसरे के हाथ में. बाक़ी 4 महीने के लिए महाराज जी को बधाई.”
बहरहाल, सिंहदेव की ओर से डिप्टी सीएम की भूमिका स्वीकार करने के बाद उनकी नाराजगी लगभग खत्म मानी जा रही है. वहीं उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं में इस कदम का क्या असर होता है यह भी जल्द पता चल जाएगा.
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