Lok Sabha Election: नींबू-मिर्च का टोटका, भूपेश बघेल को हराने का ख्वाब! कौन है ये समोसे वाला?

ChhattisgarhTak

04 Apr 2024 (अपडेटेड: Apr 4 2024 8:39 PM)

Lok Sabha Election: छत्तीसगढ़ के लोकसभा के चुनावी मैदान में बढ़ती मंहगाई और बेरोजगारी से परेशान और नाराज समोसा बेचने वाले कवर्धा के रहने वाले अजय पाली भी है. Bhupesh Baghel और Santosh Pandey के खिलाफ अजय ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन पत्र भर दिया.

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Lok Sabha Election:छत्तीसगढ़ के लोकसभा के चुनावी मैदान में बढ़ती मंहगाई और बेरोजगारी से परेशान और नाराज समोसा बेचने वाले कवर्धा के रहने वाले अजय पाली भी है.अजय नींबू मिर्च की माला पहनकर राजनांदगांव कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे. भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) के खिलाफ अजय ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन पत्र भर दिया. वैसे तो राजनांदगांव में पहले ही सियासी पारा गरम है, इस बीच गरम-गरम समोसे बेचने वाले एक शख्स ने भूपेश बघेल की टेंशन बढ़ा दी है.

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महंगाई और बेरोजगारी से लोग परेशान- अजय 

निर्दलीय प्रत्याशी अजय पाली ने कहा कि हम कोई भी शुभ काम करते हैं तो नींबू मिर्ची की माला घर-दुकान में जरूर लगाते हैं. यह हमारी आस्था का प्रतीक है. इसी वजह से मैं भी नींबू मिर्च का माला पहनकर आया हूं. मैं दोनों प्रमुख पार्टियों को बताना चाहता हूं कि महंगाई बहुत बढ़ गई है.आम आदमी बहुत परेशान है, लोग बेरोजगार घूम रहे हैं.  मैं सभी को साथ लेकर चलूंगा और बेरोजगारी सहित अन्य मुद्दों को लेकर लोकसभा चुनाव लड़ूंगा.

नेताओं के चुनावी वादों से आहत है अजय 


अजय कवर्धा में समोसा बेचकर अपना जीवन यापन करते है. राजनांदगांव कलेक्टर पहुंचे अजय ने बीते दिनों 10 रुपए और 50 रुपए के चिल्हर जोड़कर 25 हजार रुपए में नामांकन फार्म खरीदा था. अजय नेताओं के चुनावी वादों से आहत है, इससे परेशान होकर ही चुनावी रण में कूदे है. गरीब और मजदूर तबके के लोगों को छोटे-छोटे काम करवाने के लिए नेताओं को चक्कर काटना पड़ता है. अजय कहते है कि कवर्धा में लंबे समय से रेलवे की मांग की जा रही है, इन सभी मुद्दों को लेकर मैं जनता के बीच जा रहे हैं. बता दें राजनादंगांव लोकसभा सीट से बीजेपी ने मौजूदा सांसद संतोष पांडेय (Santosh Pandey) पर एक बार फिर से भरोसा जताया है. वहीं कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनांदगांव सीट से चुनाव लड़ने से यहां का चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया हैं. 

राजनांदगांव से परमानंद रजक की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ तक