शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिए जाने और केंद्र सरकार द्वारा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कई शीर्ष अधिकारियों को बर्खास्त किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार पर करारा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि पिछले 12 वर्षों में अपनी जिद पर अड़ी रहने वाली सरकार को देश के युवाओं और 'जेन-जी' (Gen-Z) के अटूट आंदोलन के आगे आखिरकार झुकना ही पड़ा.
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12 सालों में दूसरी बार झुकी सरकार: संजय सिंह
'आप' के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पिछले 12 सालों के कार्यकाल में केवल दो ही मौके आए हैं जब सरकार को मजबूरी में अपना फैसला बदलना पड़ा. हालांकि 12 साल में यह पहली बार है, जब किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ है. संजय सिंह ने आगे कहा- इससे पहले किसान आंदोलन में गृह राज्य मंत्री के बेटे द्वारा पांच किसानों को कुचलने के बावजूद मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ.
संजय सिंह ने आगे कहा, "हम नारा लगाते थे कि 'जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है.' देश के करोड़ों युवाओं ने दिखा दिया कि जब युवा सड़क पर उतरता है, तो सत्ता को नींद से जागना ही पड़ता है." उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर से लेकर पूरे देश में चले इस आंदोलन, सोनम वांगचुक के अनशन और अभिजीत दीपके के संघर्ष ने युवाओं को एक मंच पर लाया. युवाओं की मांग बहुत साफ थी कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं होगा. उन्होंने कहा कि पेपर लीक से उठी यह आवाज अब देश में रोजगार और जवाबदेही तय करने की दिशा में आगे बढ़ेगी.
यह शिक्षा सुधार के नए युग की शुरुआत: मनीष सिसोदिया
दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने देश के छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि युवाओं ने नरेंद्र मोदी सरकार के अहंकार को तोड़ दिया है. उन्होंने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया नहीं है, बल्कि देश के बच्चों और जेन-जी ने उनसे इस्तीफा छीन लिया है. अगर सरकार में जरा सी भी संवेदनशीलता होती, तो NEET घोटाले और बच्चों की आत्महत्याओं के वक्त ही इस्तीफा हो जाता." सिसोदिया ने कहा कि पेपर लीक माफिया से मुक्ति पहली जंग थी. आने वाले 5-10 सालों में जब देश में बड़ा शिक्षा सुधार होगा, तब इस युवा आंदोलन को उसकी मजबूत नींव के रूप में याद रखा जाएगा.
लाठियां और आरोप भी युवाओं का हौसला नहीं तोड़ सके: गोपाल राय
'आप' के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने कहा कि NEET मामले के बाद छात्र भीषण गर्मी और बारिश में सड़कों पर डटे रहे. 20 जुलाई को बर्बर लाठीचार्ज और आंसू गैस के बावजूद छात्रों ने हार नहीं मानी और अंततः तानाशाही मानसिकता को घुटने टेकने पड़े.
आंदोलन को दबाने के लिए छात्रों पर अनर्गल आरोप लगे- सौरभ भारद्वाज
वहीं, 'आप' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिस घमंड को बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियां नहीं तोड़ पाईं, उसे 16 से 25 साल के युवाओं ने तोड़ दिया. उन्होंने कहा कि आंदोलन को दबाने के लिए छात्रों पर अमेरिका-चीन का एजेंट होने, विदेशी फंडिंग और एंटी-नेशनल होने तक के अनर्गल आरोप लगाए गए, लेकिन युवाओं ने किसी दुष्प्रचार की परवाह नहीं की.
युवाशक्ति के आगे सरकार को झुकना पड़ा- आतिशी
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि युवाशक्ति के आगे सरकार के अहंकार को झुकना पड़ा है. MCD में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग और विधायक कुलदीप कुमार ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब युवा अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर खड़े होते हैं, तो बड़ी से बड़ी सत्ता की नींव हिल जाती है.
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