AAP को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत! अरविंद केजरीवाल को अयोग्य ठहराने और पार्टी बैन करने की PIL खारिज

AAP News: दिल्ली हाई कोर्ट से आम आदमी पार्टी को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और AAP को अयोग्य घोषित करने व पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग वाली PIL खारिज कर दी. जानिए पूरा मामला, कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं, किसने दाखिल की थी याचिका और अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी क्यों हो रही है.

AAP Court Case
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न्यूज तक डेस्क

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आम आदमी पार्टी के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने और अरविंद केजरीवाल सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को आजीवन चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों से असहमति जताते हुए यह फैसला सुनाया, जिससे आम आदमी पार्टी को एक बड़ी कानूनी संजीवनी मिली है.

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हिंदू महासभा के भूतपूर्व उपाध्यक्ष ने दायर की थी याचिका

यह जनहित याचिका हिंदू महासभा के भूतपूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल की तरफ से दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल की गई थी. याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि आम आदमी पार्टी का राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से खत्म किया जाए. इसके साथ ही आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं- अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से कार्य करने और चुनाव लड़ने से रोका जाए.

कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने का लगा था आरोप

याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार, यह पूरा मामला निचली अदालत के एक आदेश से जुड़ा है. दरअसल, सीबीआई की एक याचिका के मामले में निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल जज (एकल पीठ) के समक्ष याचिका दायर की थी.

आरोप लगाया गया कि इस मामले की सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं ने माननीय एकल जज और हाई कोर्ट के खिलाफ बेहद गरिमा विहीन टिप्पणियां कीं. याचिका में कहा गया कि नेताओं ने इस कानूनी प्रक्रिया का राजनीतिकरण करने और न्यायालय की साख व डिग्निटी को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया, जो कि कोर्ट की अवमानना और अदालती कार्यवाही के बहिष्कार जैसा है.

'पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट' के उल्लंघन का दिया गया हवाला

याचिका में 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट' की धारा 29A का विशेष रूप से हवाला दिया गया था. याचिकाकर्ता का तर्क था कि किसी भी राजनीतिक दल को रजिस्ट्रेशन के वक्त यह घोषणा देनी होती है कि वह देश के कानून और संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखेगा. याचिका में दावा किया गया कि हाई कोर्ट और उसके जजों की गरिमा को ठेस पहुंचाकर आम आदमी पार्टी ने इस संवैधानिक घोषणा का सीधा उल्लंघन किया है. इस आधार पर दलील दी गई थी कि आम आदमी पार्टी को अब एक राजनीतिक दल के रूप में काम करने या चुनाव मैदान में उतरने का कोई अधिकार नहीं रह गया है.

हाई कोर्ट ने लंबी बहस के बाद खारिज की याचिका

दिल्ली हाई कोर्ट में इस संवेदनशील मामले पर दोनों पक्षों के बीच काफी लंबी और तीखी बहस हुई. याचिकाकर्ता के वकीलों ने अपनी दलीलों से कोर्ट को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन अदालत याचिका में दिए गए तर्कों और आधारों से सहमत नहीं हुई. लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए इस जनहित याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया. हालांकि, कोर्ट का विस्तृत लिखित आदेश आना अभी बाकी है.

अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे याचिकाकर्ता

हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल ने अपनी निराशा व्यक्त की है. उनका कहना है कि अरविंद केजरीवाल कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि तीन बार के मुख्यमंत्री हैं और उनकी पार्टी दिल्ली के साथ-साथ पंजाब में भी सत्ता में है. ऐसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति और उनकी पार्टी द्वारा हाई कोर्ट की गरिमा को चोट पहुंचाना बेहद गंभीर मामला है. अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि वे अपने वकीलों से हाई कोर्ट के लिखित आदेश की बारीकियों पर चर्चा करेंगे और इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे.

यहां देखें वीडियो

AAP का रजिस्ट्रेशन होगा रद्द? अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर मंडराया सबसे बड़ा संकट...दिल्ली हाईकोर्ट में PIL दाखिल

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