सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद से राजनीतिक हलकों और एक्टिविस्टों के बीच चर्चा तेज हो गई है. इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस कार्रवाई को लेकर CJP के संस्थापक दिपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे असंवैधानिक और आवाज को दबाने की कोशिश करार दिया है. दिपके ने साफ किया कि इस तरह के कदमों से विरोध की आवाजों को रोका नहीं जा सकता है और उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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पुलिस के प्रिजंपशन और बंड उल्लंघन के दावों पर सवाल
दिपके ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि दिल्ली पुलिस की तरफ से कोर्ट में यह दलील दी गई कि आरोपियों ने अपने बॉन्ड का उल्लंघन किया है और पुलिस को यह प्रिजंपशन था कि वे दोबारा ऐसा कर सकते हैं. पुलिस का यह भी आरोप था कि उन्होंने 163 धारा का उल्लंघन किया है और बिना प्राइवेट कंप्लेंट फाइलिंग के खुद कॉग्निजेंस लेते हुए एक्शन लिया गया है. इस पर पक्ष रखते हुए दिपके ने कहा कि पुलिस की तरफ से कोर्ट में झूठे तथ्य रखे गए और किसी भी तरह के बॉन्ड या कानून का उल्लंघन नहीं किया गया था, बल्कि पुलिस ने अपनी पावर और अथॉरिटी का दुरुपयोग करते हुए पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है.
अथॉरिटी को चुनौती और कानूनी तर्क
कोर्ट में उठाए गए कानूनी पहलुओं पर चर्चा करते हुए दिपके ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले संबंधित अथॉरिटी की क्षमता को ही चुनौती दी थी. उनका तर्क था कि इस तरह की न्यायिक हिरासत या अन्य कड़ी कार्रवाई करने की पावर जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास या सेकंड क्लास के पास होती है. इसके अलावा, प्रिवेंटिव डिटेंशन के प्रावधानों और धाराओं का गलत इस्तेमाल करके असहमति की आवाज़ों को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है, जिसको लेकर कई महत्वपूर्ण अदालती जजमेंट्स के हवाले से भी कोर्ट में अपनी बात रखी गई है.
कॉकरोच जनता पार्टी की रणनीति और साझा कॉज
इस आंदोलन के भविष्य और विपक्षी दलों के रुख पर बात करते हुए दिपके ने स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) हमेशा से एक इंडिपेंडेंट प्रेशर ग्रुप रही है और आगे भी इसी रूप में काम करती रहेगी. हालांकि, इसका यह कतई मतलब नहीं है कि वे अन्य दलों या इंडिया ब्लॉक के आंदोलन के खिलाफ हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी का उद्देश्य एक ही है और वे सब मिलकर एक साझा कॉज के लिए लड़ रहे हैं, जो सत्ता में बैठे लोगों और चुनावी प्रक्रियाओं के खिलाफ मजबूती से अपनी बात रखने से जुड़ा हुआ है.
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