अग्निपथ योजना में केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है. अब चार साल की सेवा पूरी करने के बाद नियमित सैनिक नहीं बन पाने वाले अग्निवीरों को दो साल और सेना में काम करने का मौका मिलेगा. इस दौरान उनकी सैलरी भी बढ़ जाएगी. पांचवें साल और छठे साल उन्हें ज्यादा सैलेरी मिली और छह साल बाद जो अग्निवीर सेना छोड़ेंगे, उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा सेवा निधि भी मिलेगी. सरकार ने 4 नवंबर को इस बदलाव को मंजूरी दी है.
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अतिरिक्त दो साल में कितनी मिलेगी सैलरी?
जो अग्निवीर चार साल के बाद दो साल और सेना में काम करेंगे उनकी सैलरी भी बढ़ जाएगी. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के मुताबिक, अतिरिक्त सेवा के पहले साल में अग्निवीरों को हर महीने 43,500 रुपये मिलेंगे. वहीं, दूसरे साल उनकी सैलरी बढ़कर 47,500 रुपये हो जाएगी.
इसे ऐसे समझिए कि अग्निवीर पहले चार साल तक सेना में अपनी सेवाएं देंगे. अगर वे 25 फीसदी में चयनित होकर नियमित सैनिक नहीं बन पाते हैं, तो बाकी 75 फीसदी को दो साल और काम करने का विकल्प मिलेगा. जो अग्निवीर इस विकल्प को चुनेंगे, उन्हें पांचवें साल 43,500 रुपये और छठे साल 47,500 रुपये महीने मिलेंगे. यानी अतिरिक्त दो साल की सेवा के दौरान उनकी आमदनी पहले से ज्यादा होगी.
6 साल बाद बाहर होने वाले को मिलेगा ज्यादा पैसा
अब सवाल है कि जो अग्निवीर छह साल तक सेना में काम करने के बाद भी नियमित सैनिक नहीं बन पाते या नियमित सेवा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुनते, उनका क्या होगा? ऐसे अग्निवीरों को बढ़ा हुआ सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा.
दरअसल, अग्निवीरों को सेवा निधि के नाम से एकमुश्त रकम मिलती है. इसमें अग्निवीर की तरफ से जमा की गई रकम के साथ सरकार भी अपना योगदान देती है. अतिरिक्त दो साल की सेवा के बाद सेवा निधि में सरकार की हिस्सेदारी बढ़ाकर 70 फीसदी की जाएगी. पहले यह हिस्सेदारी 50 फीसदी थी.
यानी जो अग्निवीर चार साल के बजाय छह साल तक सेना में सेवा देंगे और बाद में बाहर होंगे, उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा सेवा निधि मिलेगी. इसके अलावा, दूसरी सेवा अवधि में उन्हें वरिष्ठता से जुड़े लाभ भी दिए जाएंगे.
नियमित सैनिक बनने के लिए फिर होगा चयन
दो साल की अतिरिक्त सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीरों को नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा. लेकिन इसके लिए उन्हें कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी. सेना उनके कामकाज, अनुशासन और अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने की क्षमता का आकलन करेगी. उनके खिलाफ सतर्कता यानी विजिलेंस से जुड़ा कोई मामला नहीं होना भी चयन के मानकों में शामिल होगा. इसलिए छह साल तक सेना में काम करने का मतलब यह नहीं है कि हर अग्निवीर की स्थायी नौकरी पक्की हो जाएगी. नियमित सैनिक बनने के लिए चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा.
हर साल दर्ज होता है अग्निवीरों का प्रदर्शन
सेना में अग्निवीरों के कामकाज का रिकॉर्ड रखने के लिए तीनों सेनाओं ने एक साझा डेटाबेस तैयार किया है. इसमें उनकी ड्यूटी और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है. हर साल उनके काम का मूल्यांकन किया जाता है.
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के मुताबिक, पिछले चार साल में अग्निवीरों का प्रदर्शन अच्छा पाया गया है. उनकी शारीरिक फिटनेस, काम के प्रति उत्साह, तकनीकी समझ और कौशल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. इसी समीक्षा के बाद सेना ने दो साल की अतिरिक्त सेवा का सुझाव दिया था.
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