राम मंदिर चंदे पर छिड़ी जंग, केजरीवाल के 'आप कौन' वाले बयान पर भड़की बीजेपी, रेखा गुप्ता ने किया पलटवार

दिनेश यादव

• 06:11 PM • 06 Jul 2026

Arvind Kejriwal vs Rekha Gupta: राम मंदिर में चंदा चोरी के आरोपों पर दिल्ली की सियासत गरमा गई है. अरविंद केजरीवाल द्वारा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को सोशल मीडिया पर 'आप कौन' लिखकर नजरअंदाज करने के बाद, बीजेपी ने उनके अहंकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है और रावण के अंत की याद दिलाई है. 

केजरीवाल के एक सवाल पर पूरी बीजेपी ने खोला मोर्चा
केजरीवाल के एक सवाल पर पूरी बीजेपी ने खोला मोर्चा
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Arvind Kejriwal on Ram Mandir Chanda Chori Controversy: राम मंदिर निर्माण के चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक घमासान चरम पर पहुंच गया है. हाल ही में शुरू हुई यह जुबानी जंग अब एक नए मोड़ पर आ गई है, जहां सीधे तौर पर नेताओं के अहंकार और उनके राजनीतिक वजूद को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

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क्या है विवाद की असली वजह?

इस पूरे सियासी बवाल की शुरुआत तब हुई जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को कटघरे में खड़ा किया. इस पर पलटवार करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर बेहद तल्ख तेवर दिखाए. केजरीवाल ने नितिन नवीन को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए केवल तीन शब्द लिखे- "आप कौन हैं?".

बीजेपी का चौतरफा पलटवार और रावण से तुलना

केजरीवाल के इस 'अहंकार' भरे जवाब के बाद पूरी बीजेपी उन पर हमलावर हो गई है. दिल्ली की बीजेपी नेता रेखा गुप्ता ने मोर्चा संभालते हुए केजरीवाल को इतिहास का हवाला दिया. उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि कभी ममता बनर्जी ने भी इसी तरह के अहंकार में पूछा था कि 'कौन अमित शाह?' लेकिन समय हर सवाल का जवाब दे देता है. रेखा गुप्ता ने तीखा हमला बोलते हुए आगे लिखा कि जब इस धरती पर रावण का अहंकार भी नहीं टिक पाया, तो फिर आप कौन हैं?

इसी बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता परवेश साहिब सिंह वर्मा ने भी केजरीवाल की इस पोस्ट पर चुटकी लेते हुए लिखा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष तो बहुत बड़ी बात हैं, मैं (परवेश वर्मा) आपको याद हूं या नहीं? 

अहंकार बनाम अधिकार की जंग

फिलहाल राम मंदिर के चंदे से शुरू हुआ यह पूरा मामला अब पूरी तरह से 'राजनीतिक अहंकार बनाम अधिकार' की लड़ाई में तब्दील हो चुका है. जहां एक तरफ आम आदमी पार्टी बीजेपी के बड़े पदाधिकारियों को पहचानने से साफ इंकार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इसे अरविंद केजरीवाल का बढ़ता हुआ राजनीतिक घमंड बताकर दिल्ली चुनाव की हार याद दिला रही है. 

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