दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक नए कानूनी पचड़े में फंसते नजर आ रहे हैं. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को केस से हटाने की याचिका खारिज होने के बाद अब केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दायर की गई है. दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में मशहूर पत्रकार रवीश कुमार और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का नाम भी शामिल है. विस्तार से जानिए इस मामले की पूरी कहानी.
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क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ वह वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग है, जो जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान की गई थी. उस सुनवाई में अरविंद केजरीवाल खुद अपनी वकालत कर रहे थे. नियमों के मुताबिक, अदालत की कार्यवाही की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग करना और उसे सार्वजनिक करना पूरी तरह वर्जित है.
किन-किन पर गिरी गाज?
हाई कोर्ट के वकील वैभव सिंह ने यह याचिका दायर की है. उन्होंने अपनी याचिका में निम्नलिखित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है:
आम आदमी पार्टी के नेता: अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, संजीव झा, और अन्य विधायक.
दिग्गज नेता व पत्रकार: कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और पत्रकार रवीश कुमार.
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन लोगों ने जानबूझकर अदालत की कार्यवाही के अनाधिकृत वीडियो और ऑडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर शेयर किया है.
न्यायपालिका की छवि खराब करने की साजिश?
याचिका में दावा किया गया है कि यह वीडियो साझा करना एक गहरी साजिश का हिस्सा है, ताकि जनता को यह दिखाया जा सके कि न्यायपालिका केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रही है. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इन वीडियो को सोशल मीडिया से तुरंत हटाया जाए. साथ ही इस मामले की जांच के लिए एक एसआईटी (SIT) का गठन किया जाए. न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का रुख
बता दें कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने पहले ही इस मामले पर चिंता जताई थी. उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि सोशल मीडिया पर उनके और पूरी न्यायपालिका के खिलाफ एक 'नैरेटिव' गढ़ने की कोशिश की गई है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पद की गरिमा के अनुरूप अपना काम जारी रखेंगी और उन्होंने खुद को केजरीवाल के केस से अलग करने से इनकार कर दिया था.
यहां देखें वीडियो
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