'न्याय सिर्फ मिलना नहीं, दिखना भी चाहिए...', केजरीवाल की कोर्ट में पेशी और 'सत्याग्रह' पर वकील संजीव नासियार का बड़ा बयान

Arvind Kejriwal Court Case: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कोर्ट में पेशी, विशेष अदालत के बहिष्कार और सत्याग्रह के फैसले पर वरिष्ठ वकील संजीव नासियार का बड़ा बयान सामने आया है. नासियार ने न्यायपालिका की निष्पक्षता, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में सुनवाई, रिक्रूसल के सिद्धांत और सुप्रीम कोर्ट जाने की रणनीति पर खुलकर अपनी राय रखी.

Arvind Kejriwal Court Case
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न्यूज तक डेस्क

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों और न्यायपालिका की भूमिका को लेकर सियासी और कानूनी गलियारों में बहस तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी के कानूनी प्रकोष्ठ से जुड़े और वरिष्ठ वकील संजीव नासियार ने इस पूरे मामले पर अपनी राय रखते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बने केस को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित करार दिया है. नासियार का कहना है कि जिस तरह से पिछले कुछ सालों में देश के भीतर राजनीति चल रही है, उससे कोई भी संस्थान अछूता नहीं बचा है और हर जगह एक तरह का दबाव महसूस किया जा रहा है.

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जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत और 'रिक्रूसल' का सवाल

संजीव नासियार ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में हुई सुनवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल ने बहुत ही विनम्र तरीके से 10 महत्वपूर्ण बिंदु अदालत के सामने रखे थे. उन्होंने बताया कि केजरीवाल ने उन शंकाओं को भी जाहिर किया जो जस्टिस शर्मा के बच्चों के पेशे और उनके पैनल में होने को लेकर थीं. नासियार के अनुसार, कानून के पेशे में चार दशकों के अनुभव के दौरान उन्होंने देखा है कि अगर कोई पक्षकार जज पर विश्वास न होने की बात कहता है, तो जज तुरंत खुद को केस से अलग कर लेते हैं. लेकिन इस मामले में जज का पीछे न हटना कई तरह की शंकाओं को जन्म देता है.

केजरीवाल का 'सत्याग्रह' और सर्वोच्च न्यायालय की ओर रुख

जब नासियार से पूछा गया कि क्या अरविंद केजरीवाल का हाई कोर्ट की सुनवाई में खुद या अपने वकील के जरिए पेश न होना सही है, तो उन्होंने इसे एक तरह का सत्याग्रह बताया. नासियार ने कहा कि केजरीवाल कोई साधारण नागरिक नहीं हैं, बल्कि लाखों लोगों के नेता हैं और वे यह संदेश देना चाहते हैं कि वर्तमान न्याय व्यवस्था किस हाल में है. उन्होंने स्पष्ट किया कि केजरीवाल के पास कानूनी रास्ते खुले हैं और वे इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) जाएंगे. नासियार ने सुप्रीम कोर्ट की एक पुरानी टिप्पणी को दोहराते हुए कहा कि 'न्याय न केवल मिलना चाहिए, बल्कि वह होते हुए दिखना भी चाहिए.' 

ट्रायल कोर्ट के फैसले और हाई कोर्ट की टिप्पणी पर उठाए सवाल

वरिष्ठ वकील ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई बेल और उसके बाद हाई कोर्ट के रुख पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला काफी विस्तृत था, जिसमें कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह केस ट्रायल में एक मिनट भी नहीं टिकेगा. नासियार ने सवाल उठाया कि सैकड़ों पन्नों के उस विस्तृत फैसले को बिना गहराई से सुने ही हाई कोर्ट द्वारा महज 5 मिनट में उस पर टिप्पणी कर देना शंका पैदा करता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट में जजों की पर्याप्त संख्या है और इस केस को कोई भी अन्य जज सुन सकता था, लेकिन एक ही जज का केस सुनने पर अड़े रहना सवालिया निशान खड़े करता है.

सत्य की जीत का भरोसा और गांधीवादी रास्ता

संजीव नासियार ने अंत में कहा कि भारत एक गांधीवादी देश है जहां हम अहिंसा और सत्य में विश्वास करते हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि भले ही अभी मुश्किलें दिख रही हों, लेकिन अंत में सत्य की ही जीत होगी. उन्होंने कहा कि केजरीवाल और उनके लाखों कार्यकर्ता सत्य के रास्ते पर अडिग हैं और वे न्याय पाने के लिए हर संभव कानूनी और लोकतांत्रिक रास्ता अपनाएंगे. नासियार का मानना है कि इस सत्याग्रह के जरिए देश के सामने न्यायपालिका की वर्तमान स्थिति और राजनीतिक दबाव की हकीकत सामने आएगी.

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Kejriwal Vs Justice Swarna Kanta: केस नहीं लड़ेंगे तो क्या होगा? केजरीवाल के वकील ने सब कुछ बता दिया!

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