केजरीवाल Vs जस्टिस स्वर्णकांता: दिल्ली हाई कोर्ट में खुद पेश हुए अरविंद केजरीवाल, जज पर उठाए सवाल; गिनाए 10 कारण

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें शराब नीति मामले की सुनवाई से हटने के लिए 10 कारण गिनाए। केजरीवाल ने जज की विचारधारा और जांच एजेंसियों के प्रति कथित झुकाव का मुद्दा उठाया, जिस पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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अनुराधा तंवर

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बीच अदालती कार्यवाही के दौरान तीखी बहस और गंभीर आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले. शराब नीति मामले (Excise Policy Case) में राहत मिलने के बाद सीबीआई द्वारा उसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. अब इस मामले की सुनवाई से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को हटाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने 'रिक्यूजल पिटीशन' (Recusal Petition) दायर की है, जिस पर 13 अप्रैल को उन्होंने खुद एक घंटे से ज्यादा समय तक दलीलें दीं.

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क्या है रिक्यूजल पिटीशन?

रिक्यूजल का अर्थ है जब किसी कानूनी मामले में एक पक्ष को यह लगता है कि सुनवाई करने वाले जज निष्पक्ष नहीं हैं या उनका झुकाव दूसरे पक्ष की ओर है, तब वह जज से केस से हटने का अनुरोध कर सकता है. केजरीवाल ने इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के सामने 10 कारण रखे कि क्यों उन्हें इस केस की सुनवाई नहीं करनी चाहिए.

केजरीवाल की 3 बड़ी दलीलें:

सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल ने जिन कारणों का प्रमुखता से जिक्र किया, वे इस प्रकार हैं:

सत्येंद्र जैन मामले का हवाला: केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन बनाम ईडी मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस वक्त ईडी की 'आशंका' (Apprehension) के आधार पर केस ट्रांसफर कर दिया गया था. उन्होंने कहा, "वही समानता (Parity) मुझे भी मिलनी चाहिए. यहाँ सवाल जज की ईमानदारी का नहीं, बल्कि मुवक्किल के मन में बैठी निष्पक्षता की शंका का है."

विचारधारा का आरोप: केजरीवाल ने दावा किया कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा 'अधिवक्ता परिषद' के कार्यक्रमों में चार बार शामिल हुई हैं, जिसे उन्होंने बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा से जुड़ा संगठन बताया. उन्होंने कहा, "चूंकि मैं विरोधी विचारधारा का हूँ, इसलिए मेरे मन में यह संदेह पैदा होता है कि क्या मुझे यहाँ न्याय मिलेगा?"

एजेंसियों का पक्ष लेने का आरोप: केजरीवाल ने अपनी दलीलों में यह भी कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि इस कोर्ट में सीबीआई और ईडी जो मांगती हैं, उन्हें मिल जाता है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 'पिंजरे में बंद तोता' वाले कमेंट का भी जिक्र किया.

कोर्ट का रुख

दलीलों के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने भी केजरीवाल के आरोपों पर पलटवार किया. जब केजरीवाल ने विचारधारा का मुद्दा उठाया, तो जज ने पूछा, "क्या आप कह रहे हैं कि मैं उनकी विचारधारा फॉलो करती हूँ?" जिस पर केजरीवाल ने सफाई देते हुए कहा कि वह सिर्फ अपनी 'आशंका' व्यक्त कर रहे हैं. फिलहाल, कोर्ट ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित (Order Reserved) रख लिया है. अब यह देखना होगा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा इस केस से हटती हैं या सुनवाई जारी रखती हैं.

 

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