Delhi Auto Taxi Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारतीय मजदूर संघ (BMS) के तत्वावधान में देशव्यापी प्रदर्शन के तहत विशाल रैली का आयोजन किया गया. इस प्रदर्शन में दिल्ली के ऑटो-टैक्सी चालकों के साथ-साथ असंगठित और संगठित क्षेत्रों के हजारों श्रमिकों ने हिस्सा लिया. केंद्र और दिल्ली सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मजदूर संघ और ऑटो-टैक्सी यूनियन ने कई ज्वलंत मुद्दों को उठाया और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया.
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ईएसआई, पीएफ लिमिट और न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग
भारतीय मजदूर संघ ने प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों को लेकर आवाज उठाई. संगठन की प्रमुख मांग है कि ईएसआई की सीमा को 21,000 रुपये से बढ़ाकर 42,000 रुपये किया जाए और पीएफ की सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये की जाए. इसके साथ ही ईपीएफ-95 की न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये करने और उसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग रखी गई. स्कीम वर्कर्स जैसे आंगनबाड़ी, आशा वर्कर, मिड-डे मील और मनरेगा कर्मियों को स्थायी कर्मचारी घोषित करने अथवा मानदेय में बढ़ोतरी की मांग भी की गई.
दिल्ली सरकार और आरपीएफ प्रताड़ना के खिलाफ आक्रोश
प्रदर्शन में पहुंचे ऑटो और टैक्सी चालकों ने दिल्ली सरकार और रेल प्रशासन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली. ऑटो चालकों का कहना है कि दिल्ली सरकार द्वारा बढ़ाई गई 800 रुपये की फिटनेस फीस तुरंत वापस ली जाए और निजी नंबरों पर चल रही ऐप आधारित बाइक टैक्सियों पर रोक लगाई जाए. इसके अलावा चालकों ने शिकायत की कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ और स्थानीय पुलिस द्वारा बेवजह भारी-भरकम चालान काटे जाते हैं और उन्हें स्टेशन परिसर से भगा दिया जाता है. चालकों ने स्टेशन के पास ऑटो-टैक्सी लगाने के लिए स्थाई स्टैंड देने की मांग की है.
'हमने तीन सरकारें पलटी हैं, हल्के में न ले सरकार'
यूनियन के नेताओं ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि ऑटो और टैक्सी चालकों ने दिल्ली में तीन-तीन सरकारें पलटी हैं, इसलिए सरकार उन्हें कमजोर समझने की भूल न करे. पिछले डेढ़ साल से चालकों की समस्याओं पर कोई सुनवाई न होने पर उन्होंने नाराजगी जताई और कहा कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो दिल्ली की परिवहन व्यवस्था ठप हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.
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