दिल्ली के जज अमन शर्मा की आत्महत्या के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. इस दुखद घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ता बरखा त्रेहन दिवंगत जज के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंचीं. बरखा त्रेहन ने अमन शर्मा के पिता प्रेम शर्मा से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया. इस दौरान उन्होंने देश में पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके साथ हो रहे कथित अन्याय को लेकर गंभीर सवाल उठाए.
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अमन शर्मा के पिता को न्यायपालिका पर भरोसा
जज अमन शर्मा के पिता प्रेम शर्मा अपने बेटे को खोने के गम में डूबे हुए हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्हें देश की न्यायपालिका और पुलिस व्यवस्था पर पूरा भरोसा है. मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और उन्हें उम्मीद है कि जांच एजेंसियां इस मामले की निष्पक्ष जांच करेंगी. उन्होंने विश्वास जताया कि उनके बेटे के साथ जो हुआ, उसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा जरूर मिलेगी.
कौन हैं बरखा त्रेहन और क्यों पहुंचीं जज के घर?
बरखा त्रेहन एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो पिछले एक दशक से अधिक समय से पुरुषों के अधिकारों और उनके खिलाफ होने वाले अन्याय के मुद्दे पर काम कर रही हैं. उन्होंने बताया कि वह अमन शर्मा को न्याय दिलाने की लड़ाई में उनके परिवार के साथ खड़ी हैं. बरखा ने कहा कि एक होनहार लड़का जिसे माता-पिता ने इतने लाड-प्यार से पालकर जज के पद तक पहुंचाया, उसे किन परिस्थितियों में आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए.
पुरुषों में बढ़ती आत्महत्या की दर पर जताई चिंता
मीडिया से बात करते हुए बरखा त्रेहन ने NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए चौंकाने वाली बातें कहीं. उन्होंने दावा किया कि देश में पुरुषों, विशेषकर शादीशुदा पुरुषों के सुसाइड की दर महिलाओं की तुलना में तीन गुना अधिक है. उन्होंने हाल के कुछ अपराधों का जिक्र करते हुए कहा कि पुरुषों के साथ भी क्रूरता की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी सुनवाई के लिए कोई ठोस तंत्र मौजूद नहीं है. बरखा ने बताया कि वह इस मुद्दे को लेकर पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर चुकी हैं और उन्हें ज्ञापन सौंप चुकी हैं.
पुरुष आयोग और जेंडर न्यूट्रल कानून की मांग
बरखा त्रेहन ने सरकार के सामने दो मुख्य मांगें रखी हैं. पहली मांग यह कि जिस तरह महिलाओं के लिए महिला आयोग है, उसी तर्ज पर पुरुषों की समस्याओं को सुनने के लिए एक राष्ट्रीय पुरुष आयोग का गठन किया जाना चाहिए. उनकी दूसरी प्रमुख मांग कानूनों को जेंडर न्यूट्रल बनाने की है. उनका तर्क है कि कानून में लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए, ताकि पुरुषों और महिलाओं दोनों को समान रूप से न्याय मिल सके और किसी भी निर्दोष को प्रताड़ित न होना पड़े.
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
जज अमन शर्मा सुसाइड केस में दर्ज हुई एफआईआर पर बात करते हुए बरखा ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि आरोपियों का पद चाहे जो भी हो, चाहे वे आईएएस अधिकारी ही क्यों न हों उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कोई भी ओहदा किसी को अपराध से बचने का सर्टिफिकेट नहीं देता है. बरखा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस केस पर लगातार नजर रखेंगी और अगर पुलिस कार्रवाई में ढिलाई बरती गई, तो वह उचित मंचों पर इस मुद्दे को उठाएंगी.
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